अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ और सैन्य कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं। हालांकि, उन्होंने आगे की कार्रवाई के लिए कोई समय-सीमा या स्पष्ट लक्ष्य नहीं बताया। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के वरिष्ठ डेमोक्रेट्स ने इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए वोटिंग की योजना बनाई है और युद्ध के उद्देश्यों तथा खर्च के बारे में प्रशासन से जवाब मांगे हैं।
ट्रंप का बयान: ‘शायद ऐसा करना पड़े’
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “अगर संभव हो तो मैं बाकी देश को बर्बाद नहीं करना चाहूंगा, लेकिन शायद मुझे ऐसा करना पड़े। आपको जल्द ही पता चल जाएगा।”
उन्होंने किसी नए हमले का आदेश देने की घोषणा नहीं की और न ही कोई समय-सीमा बताई। ओवल ऑफिस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि आगे क्या करना है, इस पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने चाहिए। तेहरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रस्तावों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “वे हमारी मंजूरी के बिना कुछ भी नहीं कर रहे हैं।”
डेमोक्रेट्स का विरोध और जवाबदेही की मांग
डेमोक्रेट्स अगली कांग्रेस के लिए अपनी विदेश नीति का एजेंडा तैयार कर रहे हैं। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट ग्रेगरी मीक्स ने 4 नवंबर को एक पत्र लिखकर सहयोगियों से कमेटी का अध्यक्ष बनने का समर्थन मांगा।
पत्र में उन्होंने लिखा, “कानूनी मोर्चे पर, मैं राष्ट्रपति के ईरान के साथ युद्ध को तुरंत खत्म करने के लिए प्रस्ताव लाऊंगा। साथ ही, अमेरिकी विदेश नीति तय करने में कांग्रेस की उचित भूमिका को वापस बहाल करने को प्राथमिकता दूंगा।”
मीक्स ने ईरान युद्ध, वेनेजुएला और सैन्य कार्रवाई तथा व्यापार पर कांग्रेस के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से सार्वजनिक गवाही मांगे जाने का भी प्रस्ताव रखा।
डेमोक्रेटिक व्हिप कैथरीन क्लार्क ने सीएनएन को बताया कि डेमोक्रेट्स प्रशासन पर लगातार फंडिंग जारी रखने और अमेरिकी सैनिकों को सुरक्षित घर वापस लाने की योजना के बारे में सवाल उठाएंगे। उन्होंने ट्रंप पर आरोप लगाया कि वे देश को “एक ऐसे लापरवाह युद्ध में धकेल रहे हैं, जिसकी न तो कोई एग्जिट स्ट्रेटेजी है और न ही कोई स्पष्ट लक्ष्य।” क्लार्क ने कहा कि इस संघर्ष की वजह से घरेलू ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है।
ऊर्जा बाजार पर असर की चिंता
खाड़ी क्षेत्र का यह संघर्ष भारत सहित एशिया के प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल परिवहन का अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग मानती है। इस मार्ग से जाने वाले तेल के मुख्य गंतव्यों में भारत, चीन और जापान शामिल हैं।
डेमोक्रेट्स की बढ़ती सक्रियता से साफ है कि नई कांग्रेस में ट्रंप की ईरान नीति को लेकर तीखी बहस होने की संभावना है।