Tuesday, 03 November 2026
BREAKING
• ग्लेन मैक्सवेल ने 14 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर को दिया विराम, कभी नहीं भूलेगी 2023 वर्ल्ड कप की वो पारी • एशियन चैंपियंस ट्रॉफी: भारत ने दर्ज की लगातार पांचवीं जीत, लीग चरण के अंतिम मैच में साउथ कोरिया को 8-0 से रौंदा • मनोज बाजपेयी ने उठाया सवाल: समाज की बात न करने वालों को स्टार का दर्जा क्यों? • पृथ्वीराज कपूर: सांसद बनने के बाद भी नहीं छोड़ा थर्ड क्लास का सफर, 112 शहरों में जाकर किए 2,662 थिएटर शो • इमरान खान को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत, 7 दिसंबर तक 'लीव इंडिया' नोटिस पर रोक • दीया मिर्जा के समर्थन में उतरे लोग, बीएमसी कमिश्नर को हटाने और एक्ट्रेस से माफी मांगने की मांग • लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ हरे निशान में खुला बाजार, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला • ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ व्यापार समझौते को बताया 'अपनी उपलब्धि' • आईटीसी का दूसरी तिमाही में मुनाफा 20 प्रतिशत घटा; आय 18,401 करोड़ रुपए रही • कैपिटल गेन टैक्स को लेकर विदेशी निवेशकों की चिंताएं सुनेगी सरकार : वित्त मंत्री सीतारमण

मनोरंजन

पृथ्वीराज कपूर: सांसद बनने के बाद भी नहीं छोड़ा थर्ड क्लास का सफर, 112 शहरों में जाकर किए 2,662 थिएटर शो

Updated on Tuesday, November 03, 2026 11:23 AM IST

मुंबई : हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने सिर्फ फिल्मों में अभिनय करके ही नहीं, बल्कि थिएटर के जरिए भी अपनी अलग पहचान बनाई। ऐसे ही कलाकारों में पृथ्वीराज कपूर का नाम शामिल है। वह फिल्मों के बड़े सितारे होने के साथ-साथ थिएटर के प्रति भी काफी समर्पित थे। उनकी इस लगन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सांसद बनने के बाद भी उन्होंने अपनी थिएटर टीम के साथ थर्ड क्लास में सफर करना जारी रखा। उनकी कंपनी ने देश के 112 शहरों में 2,662 शो किए और पृथ्वीराज ने हर शो में खुद मुख्य भूमिका निभाई।

पृथ्वीराज कपूर का जन्म 3 नवंबर 1906 को पंजाब के समुंदरी में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनके पिता बशेश्वरनाथ कपूर पुलिस विभाग में अधिकारी थे। बचपन से ही पृथ्वीराज को अभिनय और नाटक देखने का शौक था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पंजाब में की और आगे की पढ़ाई के लिए पेशावर पहुंचे। यहां पढ़ाई के दौरान उनका झुकाव थिएटर की तरफ बढ़ने लगा। उन्होंने कानून की पढ़ाई भी शुरू की, लेकिन अभिनय के शौक के कारण इसे बीच में ही छोड़ दिया।

अपने सपने को पूरा करने के लिए वह 1928 में मुंबई पहुंचे। यहां शुरुआत में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने फिल्मों में छोटे रोल किए और धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई। 1930 में आई मूक फिल्म 'सिनेमा गर्ल' से उन्हें एक अभिनेता के रूप में पहचान मिलने लगी। इसके बाद 1931 में भारत की पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' में उन्होंने काम किया। उनकी दमदार आवाज और अभिनय ने दर्शकों का ध्यान खींचा।

इसके बाद पृथ्वीराज कपूर ने कई फिल्मों में काम किया। वह कोलकाता के न्यू थिएटर्स से भी जुड़े और वहां कई फिल्मों में अभिनय किया। फिल्म 'विद्यापति' में उनके काम को काफी सराहना मिली। 1941 में आई सोहराब मोदी की फिल्म 'सिकंदर' में उन्होंने सिकंदर का किरदार निभाया। इस भूमिका ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। इसके बाद वह 'आवारा', 'दहेज' और 'मुगल-ए-आजम' जैसी फिल्मों में नजर आए।

फिल्मों में सफलता मिलने के बावजूद पृथ्वीराज कपूर का थिएटर से लगाव कभी कम नहीं हुआ। 1944 में उन्होंने अपनी थिएटर कंपनी 'पृथ्वी थिएटर्स' की शुरुआत की। उनका मकसद अच्छे नाटक तैयार करना और उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों तक पहुंचाना था। कंपनी का पहला नाटक 'शकुंतला' था। इसके बाद उन्होंने 'दीवार', 'पठान', 'गद्दार', 'आहूति' और 'पैसा' जैसे नाटक पेश किए। इन नाटकों में परिवार, देश के बंटवारे, हिंदू-मुस्लिम एकता, गरीबी और समाज से जुड़े मुद्दों को उठाया गया।

पृथ्वी थिएटर्स का सफर आसान नहीं था। कंपनी को एक शहर से दूसरे शहर जाना पड़ता था। थिएटर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, कंपनी ने 16 साल के सफर में 112 शहरों में कुल 2,662 शो किए। पृथ्वीराज कपूर ने इन सभी शो में मुख्य भूमिका निभाई। वह अपनी टीम के साथ लगातार यात्रा करते थे। कंपनी के कलाकार और दूसरे सदस्य थर्ड क्लास में सफर करते थे और पृथ्वीराज भी उनके साथ ही यात्रा करते थे।

इस दौरान वह राज्यसभा के मनोनीत सांसद भी बने। वह 1952 से 1960 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। सांसद बनने के बाद उन्हें हवाई जहाज या फर्स्ट क्लास में यात्रा करने की सुविधा मिल सकती थी, लेकिन उन्होंने अपनी थिएटर टीम से अलग सफर करना पसंद नहीं किया। उनके लिए टीम के साथ रहना ज्यादा जरूरी था। पृथ्वी थिएटर्स 1960 में उनकी खराब सेहत के कारण बंद हो गया।

पृथ्वीराज कपूर को भारतीय थिएटर और सिनेमा में योगदान के लिए कई सम्मान मिले। उन्हें 1954 में संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और 1969 में पद्म भूषण से नवाजा गया। भारतीय सिनेमा और थिएटर के विकास में उनके ऐतिहासिक और अतुलनीय योगदान को देखते हुए पृथ्वीराज कपूर को भारत सरकार ने वर्ष 1971 में प्रतिष्ठित दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया था। पृथ्वीराज कपूर का निधन 29 मई 1972 को मुंबई में हुआ। वह कैंसर से पीड़ित थे।

 

Have something to say? Post your comment
मनोज बाजपेयी ने उठाया सवाल: समाज की बात न करने वालों को स्टार का दर्जा क्यों?

: मनोज बाजपेयी ने उठाया सवाल: समाज की बात न करने वालों को स्टार का दर्जा क्यों?

इमरान खान को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत, 7 दिसंबर तक 'लीव इंडिया' नोटिस पर रोक

: इमरान खान को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत, 7 दिसंबर तक 'लीव इंडिया' नोटिस पर रोक

दीया मिर्जा के समर्थन में उतरे लोग, बीएमसी कमिश्नर को हटाने और एक्ट्रेस से माफी मांगने की मांग

: दीया मिर्जा के समर्थन में उतरे लोग, बीएमसी कमिश्नर को हटाने और एक्ट्रेस से माफी मांगने की मांग

श्वार्जनेगर और रिचसन की अपकमिंग क्रिसमस ड्रामा 'द मैन विद द बैग' का पहला ट्रेलर रिलीज

: श्वार्जनेगर और रिचसन की अपकमिंग क्रिसमस ड्रामा 'द मैन विद द बैग' का पहला ट्रेलर रिलीज

रश्मिका मंदाना स्टारर 'माइसा' के मेकर्स ने फिल्म का पहला दमदार सिंगल किया रिलीज

: रश्मिका मंदाना स्टारर 'माइसा' के मेकर्स ने फिल्म का पहला दमदार सिंगल किया रिलीज

प्रीति जिंटा ने बेटी के लिए अपनाया 'ब्यूटी एंड द बीस्ट' की बेले का लुक, पति और बच्चों संग मनाया हैलोवीन

: प्रीति जिंटा ने बेटी के लिए अपनाया 'ब्यूटी एंड द बीस्ट' की बेले का लुक, पति और बच्चों संग मनाया हैलोवीन

ब्रिटनी स्पीयर्स को पसंद आई 'प्रैक्टिकल मैजिक', सैंड्रा बुलॉक और निकोल किडमैन को बताया गर्ल क्रश

: ब्रिटनी स्पीयर्स को पसंद आई 'प्रैक्टिकल मैजिक', सैंड्रा बुलॉक और निकोल किडमैन को बताया गर्ल क्रश

'इंडिया के टॉप 1 प्रतिशत' के लिए अनिल कपूर ने 50 दिनों तक की कड़ी तैयारी

: 'इंडिया के टॉप 1 प्रतिशत' के लिए अनिल कपूर ने 50 दिनों तक की कड़ी तैयारी

जब एक रोल के लिए शाहरुख खान को कटवाने पड़े थे लंबे बाल, दुखी मन से मानी थी शर्त

: जब एक रोल के लिए शाहरुख खान को कटवाने पड़े थे लंबे बाल, दुखी मन से मानी थी शर्त

ईशान खट्टर: बाल कलाकार से लीड हीरो तक, जानें शिक्षा से लेकर फिल्मी करियर तक का सफर

: ईशान खट्टर: बाल कलाकार से लीड हीरो तक, जानें शिक्षा से लेकर फिल्मी करियर तक का सफर

X