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राष्ट्रीय

सीएसआईआर की कौशल पहल में उद्योग-अकादमिक साझेदारी पर जोर, 37 प्रयोगशालाओं ने पेश की रिपोर्ट

Updated on Saturday, August 08, 2026 17:25 PM IST

सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल के तीसरे चरण (2025-30) के प्रथम वर्ष के लिए निगरानी समिति का समन्वयक सम्मेलन-सह-बैठक 6-7 अगस्त 2026 को सीएसआईआर-मानव संसाधन विकास केंद्र (सीएसआईआर-एचआरडीसी), गाजियाबाद ने सीएसआईआर-राष्ट्रीय रसायन प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनसीएल), पुणे के सहयोग से आयोजित किया। दो दिवसीय सम्मेलन में पहल के प्रथम वर्ष की प्रगति की समीक्षा, सहभागी प्रयोगशालाओं के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान और कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सहयोगात्मक प्रयासों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

उद्घाटन सत्र में कौशल विकास पर जोर

कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया गया। इसके बाद पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन समारोह हुआ। सीएसआईआर-एनसीएल के वैज्ञानिक-जी डॉ. राजेश गोनडे ने सभा का स्वागत किया और बैठक के उद्देश्यों को हासिल करने में सहयोग, नवाचार और कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया।

उद्योग के लिए तैयार प्रतिभाओं को बढ़ावा देने पर जोर

सीएसआईआर-एचआरडीसी के वैज्ञानिक-जी और कौशल नोडल प्रधान अन्वेषक डॉ. विनय कुमार ने सम्मेलन के उद्देश्यों को प्रस्तुत किया। उन्होंने 2025-26 के दौरान सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल के तहत हासिल प्रगति का अवलोकन दिया। उन्होंने प्रौद्योगिकी-संचालित कार्यबल तैयार करने के लिए उद्योग के लिए तैयार प्रतिभाओं को विकसित करने वाले राष्ट्रव्यापी कौशल विकास ईकोसिस्टम के निर्माण में पहल की भूमिका रेखांकित की।

नीतिगत हस्तक्षेपों और सीएसआईआर की प्रतिबद्धता पर चर्चा

सीएसआईआर-केंद्रीय योजना निदेशालय (सीपीडी) के वैज्ञानिक-एफ डॉ. अभिषेक कुमार ने पहल की प्रमुख उपलब्धियों और वर्ष के दौरान किए गए नीतिगत हस्तक्षेपों की जानकारी दी। सीएसआईआर-एचआरडीसी, गाजियाबाद के प्रमुख डॉ. टी. एस. राणा ने कौशल विकास के लिए ज्ञान को डिजिटल रूप से सक्षम, अनुभवात्मक और नवाचार-संचालित समाधानों में बदलने के प्रति सीएसआईआर की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

कौशल विकास को राष्ट्र निर्माण का अभिन्न हिस्सा बताया

गुरुग्राम स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ पेस्टिसाइड फॉर्मूलेशन टेक्नोलॉजी (आईपीएफटी) के निदेशक और निगरानी समिति के अध्यक्ष डॉ. मोहना कृष्ण रेड्डी मुदियम ने कहा कि कौशल विकास राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग है। उन्होंने सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल को मजबूत, भविष्य के लिए तैयार और उद्योग-संरेखित कौशल विकास ईकोसिस्टम बनाने की दिशा में मार्गदर्शन करने वाले पांच प्रमुख प्राथमिकता वाले स्तंभों को रेखांकित किया।

भारत को कुशल प्रतिभाओं का वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर

सीएसआईआर-एनसीएल, पुणे के निदेशक डॉ. आशीष लेले ने कहा कि सीएसआईआर अपने व्यापक राष्ट्रव्यापी प्रयोगशाला नेटवर्क और वैज्ञानिक विशेषज्ञता का लाभ उठाकर स्किल इंडिया मिशन में सार्थक योगदान देने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम है। उन्होंने कहा कि इससे भारत को कुशल प्रतिभाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

37 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं ने साझा की वार्षिक प्रगति

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल के तीसरे चरण के तहत 2025-26 में हासिल वार्षिक प्रगति की व्यापक समीक्षा रही। पहले दिन सभी 37 सहभागी सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के कौशल नोडल समन्वयकों ने अपनी वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इनमें आयोजित कार्यक्रमों, प्रशिक्षु आउटरीच, नवीन पहलों, चुनौतियों और भविष्य की कार्य योजनाओं की जानकारी दी गई।

निगरानी समिति ने प्रस्तुतियों का किया आकलन

प्रस्तुतियों के जरिए निगरानी समिति ने विभिन्न प्रयोगशालाओं में पहल के कार्यान्वयन की स्थिति का व्यापक आकलन किया। समिति में अध्यक्ष डॉ. मोहना कृष्ण रेड्डी मुदियम, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के निदेशक एन. रमेश बाबू, दिल्ली उत्पादकता परिषद की संयुक्त सचिव अंजू बजाज, जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार और जीवन विज्ञान क्षेत्र कौशल विकास परिषद (एलएसएसएसडीसी) के उपाध्यक्ष अंशुल सक्सेना शामिल रहे। समिति ने सर्वोत्तम प्रथाओं और कौशल विकास के सफल मॉडल पर भी चर्चा की।

कार्यक्रम की गुणवत्ता और प्रभाव बढ़ाने की सिफारिशें

पहले दिन का समापन निगरानी समिति की गहन समीक्षा और चर्चा के साथ हुआ। समिति ने पहल के तहत हुई प्रगति की सराहना की और कार्यक्रम की गुणवत्ता, प्रभावशीलता, आउटरीच तथा दीर्घकालिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए रचनात्मक सिफारिशें प्रस्तुत कीं।

उद्योग-अकादमिक साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा

दूसरे दिन दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। एलएसएसएसडीसी के उपाध्यक्ष अंशुल सक्सेना ने उद्योग-अकादमिक साझेदारी मजबूत करने, रोजगार क्षमता बढ़ाने और कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए सीएसआईआर और जीवन विज्ञान क्षेत्र कौशल विकास परिषद के बीच सहयोग के अवसरों पर चर्चा की।

परियोजना योजना और बजट प्रबंधन पर सत्र

सीएसआईआर-सीपीडी के वैज्ञानिक-एफ डॉ. अभिषेक कुमार ने परियोजना योजना और बजट प्रबंधन पर सत्र प्रस्तुत किया। इसमें प्रभावी योजना, वित्तीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग, निगरानी और कौशल विकास पहलों के कुशल कार्यान्वयन पर जोर दिया गया।

अनुभव और सुझाव साझा कर पहल को मजबूत करने पर जोर

कार्यक्रम का समापन खुले चर्चा सत्र के साथ हुआ, जिसमें कौशल नोडल अधिकारियों ने पहल से जुड़े अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। सम्मेलन ने सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के बीच समन्वय को मजबूत करने के साथ तीसरे चरण के प्रथम वर्ष की उपलब्धियों की व्यापक समीक्षा का अवसर दिया। चर्चा के दौरान पहल की पहुंच, गुणवत्ता और प्रभाव बढ़ाने के लिए प्रमुख रणनीतियों की पहचान की गई।

उच्च कुशल वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यबल विकसित करने की दिशा में कदम

सम्मेलन से सामने आए विचार-विमर्श और सिफारिशों से सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल के कार्यान्वयन को और मजबूत करने की उम्मीद है। इससे देश के लिए उच्च कुशल वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यबल विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की संभावना है।

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