नई दिल्ली: राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में स्वच्छता ही सेवा-2026 (विशेष अभियान 6.0) के तहत पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 27 अक्टूबर को संगोष्ठी एवं प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस वर्ष अभियान की थीम ‘स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ रखी गई है।
कार्यक्रम में वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त भारत और पटाखों से दूरी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे। इसमें संग्रहालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के सदस्यों तथा संविदा कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता की प्रत्येक श्रेणी में चार-चार प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।
पटाखों से दूरी और स्वच्छ हवा का संदेश
कार्यक्रम के पहले सत्र में ‘पटाखों से बनाएं दूरी, स्वच्छ हवा है जरूरी’ विषय पर वक्ताओं ने दीपावली को पारंपरिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीके से मनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उप संग्रहाध्यक्ष (चित्रकला) डॉ. कनक लता सिंह ने कहा कि त्योहारों का मूल उद्देश्य खुशियां और प्रकाश फैलाना है। उन्होंने स्वच्छता को व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ पर्यावरण से जोड़ते हुए जागरूकता को आम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
अनुसंधान अधिकारी मौमिता धर ने दीपावली के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि त्योहारों की पारंपरिक लोकसंस्कृति को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि उनका स्वरूप केवल पटाखों तक सीमित न रहे। सहायक संग्रहाध्यक्ष (शिक्षा एवं व्याख्यान) डॉ. नाजिया कमाल ने पटाखों से होने वाले वायु एवं ध्वनि प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरों के प्रति आगाह किया। वहीं, सहायक रसायनज्ञ डी.जे. प्रदीप ने कम प्रदूषण वाले विकल्पों को अपनाकर त्योहारों के उत्साह और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का सुझाव दिया।
अवर श्रेणी लिपिक विकास ने स्वच्छ हवा को प्रत्येक नागरिक का अधिकार बताते हुए वायु एवं ध्वनि प्रदूषण कम करने की अपील की।
प्लास्टिक मुक्त भारत पर दिया जोर
दूसरे सत्र में ‘प्लास्टिक मुक्त भारत : प्लास्टिक को कहें ना, पृथ्वी को दें नया जीवन’ विषय पर चर्चा हुई। CISF के राहुल कुमार ने बताया कि प्लास्टिक कचरा नदियों के माध्यम से समुद्र तक पहुंचकर जलीय जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने एकल-उपयोग प्लास्टिक से बचने और कचरे के उचित निस्तारण पर जोर दिया।
CISF के राजू ने दैनिक जीवन में प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल तथा माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक से जुड़ी चिंताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
वृक्षारोपण के साथ पौधों की देखभाल भी जरूरी
तीसरे सत्र में ‘वृक्षारोपण : कल की सांसें, आज का संकल्प’ विषय पर संविदा कर्मचारियों ने विचार रखे। आशा रानी ने वृक्षों को प्राकृतिक एयर प्यूरीफायर बताते हुए कागज का सीमित उपयोग करने और बुके के स्थान पर पौधे भेंट करने की परंपरा अपनाने का सुझाव दिया।
सोनी कुमारी ने वृक्षों के पर्यावरणीय महत्व और विभिन्न राज्यों में वृक्षारोपण से जुड़ी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल को भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। प्रिंस ने मिट्टी के कटाव को रोकने और तापमान संतुलित रखने में पेड़ों की भूमिका बताई। छोटू गौतम ने कहा कि पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई भी जरूरी है। कमल ने कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन के महत्व का उल्लेख करते हुए विशेष अवसरों पर पौधे भेंट करने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।
राजेश कुमार ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता
संगोष्ठी एवं प्रतियोगिता की अध्यक्षता संग्रहालय के सहायक निदेशक (राजभाषा) एवं स्वच्छता ही सेवा-6.0 के सह-नोडल अधिकारी राजेश कुमार ने की। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त वातावरण और पटाखों से दूरी जैसे विषय केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुरक्षित भविष्य और मानव अस्तित्व से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
उन्होंने प्रतिभागियों से अपने विचारों को दैनिक जीवन में अपनाने और पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने की अपील की। साथ ही सभी वक्ताओं एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
डॉ. प्रवीण गुप्ता रहे निर्णायक
प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति के महासचिव डॉ. प्रवीण गुप्ता ने निर्णायक की भूमिका निभाई। उन्होंने प्रतिभागियों के विचारों और सुझावों की सराहना करते हुए एकल-उपयोग प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने, पटाखों से दूरी बनाने तथा पौधों की नियमित देखभाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सरकार, संस्थानों और नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है तथा ऐसी प्रतियोगिताओं का उद्देश्य जागरूकता को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना होना चाहिए।
प्रतियोगिता की सभी श्रेणियों में चार-चार प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में राजेश कुमार की पहल की सराहना की गई। प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक गुरमीत सिंह चावला के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों एवं उपस्थित लोगों ने पटाखों का न्यूनतम उपयोग करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की शपथ ली। आयोजन का संदेश रहा कि स्वच्छ एवं हरित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब जागरूकता को व्यवहार में बदला जाएगा।