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राष्ट्रीय

गोबरधन योजना से 40 हजार करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की होगी बचत, सृजित होंगे 1.5 लाख रोजगार: सरकार

Updated on Friday, August 07, 2026 16:33 PM IST

नई दिल्ली : एक आधिकारिक बयान में शुक्रवार को कहा गया कि केंद्र सरकार की हाल ही में घोषित 'गोबरधन' (राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना) के माध्यम से भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी और 40,000 करोड़ रुपए से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत की जा सकेगी। साथ ही यह क्षेत्र राष्ट्रीय जीडीपी में 75,000 करोड़ रुपए से अधिक का योगदान देगा और लगभग 1.5 लाख नए रोजगार पैदा करेगा।

सरकारी बयान के अनुसार, यह योजना अगले दस वर्षों में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाने में मदद करेगी। इसके साथ ही यह निजी निवेश को आकर्षित करेगी, सर्कुलर बायोइकोनॉमी को बढ़ावा देगी और उत्पादकों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए विशेष सीबीजी ऑफटेक एश्योरेंस फ्रेमवर्क स्थापित करेगी।

इस योजना के तहत उत्पादित स्वदेशी और स्वच्छ गैस जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी। अनुमान है कि इससे करीब एक करोड़ मीट्रिक टन (10 मिलियन टन) जीवाश्म ईंधन के उपयोग को प्रतिस्थापित किया जा सकेगा।

सरकारी बयान के अनुसार, जैविक कचरे को लैंडफिल में जाने से रोकने से 40 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में कमी आएगी। साथ ही लगभग 250 मिलियन मीट्रिक टन जैविक उर्वरक का उत्पादन होगा, जो कृषि क्षेत्र के लिए भी बड़ा लाभ साबित हो सकता है।

गोबरधन योजना के तहत सीबीजी उत्पादकों को बाजार की निश्चितता देने के लिए गैस खरीद की गारंटी दी जाएगी। सरकार ने 2,110 रुपए प्रति एमएमबीटीयू की प्रशासित कीमत निर्धारित की है। इसके अलावा परियोजनाओं को प्रति टन प्रतिदिन क्षमता पर 2 करोड़ रुपए तक की पूंजीगत सहायता मिलेगी और एमएसएमई इकाइयों को 85 प्रतिशत तक क्रेडिट गारंटी का लाभ भी दिया जाएगा।

सरकार ने कहा कि परिवहन, घरेलू उपयोग, उद्योग और वाणिज्यिक क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू स्तर पर उत्पादित कंप्रेस्ड बायोगैस इस मांग का बड़ा हिस्सा पूरा कर सकती है।

सीबीजी रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समान होती है और इसे मौजूदा गैस वितरण नेटवर्क में बिना किसी बड़े बदलाव के शामिल किया जा सकता है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा के लाभों को देश के बढ़ते गैस बुनियादी ढांचे के साथ जोड़ा जा सकेगा।

हर सीबीजी संयंत्र स्थानीय स्तर पर कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों के उपयोग पर आधारित एक सर्कुलर अर्थव्यवस्था विकसित करेगा, जिससे कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, संयंत्र संचालन और जैविक खाद उत्पादन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही, कचरा प्रबंधन में सुधार और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।

जो भी व्यक्ति या संस्था भारत में सीबीजी या बायो-सीएनजी संयंत्र स्थापित करना चाहती है या उसका संचालन कर रही है, वह गोबरधन यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण संख्या प्राप्त कर सकती है। मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं और सहायता का लाभ लेने के लिए यह पंजीकरण आवश्यक होगा।

पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में अब तक 1,908 कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी)/बायो-सीएनजी संयंत्र पंजीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 217 संयंत्र चालू हो चुके हैं, जो प्रतिदिन 0.4 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (एमएमएससीएमडी) गैस का उत्पादन कर रहे हैं। वहीं 339 संयंत्र निर्माणाधीन हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बीते गुरुवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 23,731 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय वाली 'गोबरधन' (राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना) को मंजूरी दी गई।

यह योजना वित्त वर्ष 2027 से 2036 तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य कंप्रेस्ड बायोगैस को भारत के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का एक प्रमुख स्तंभ बनाना है।

सरकार ने यह भी बताया कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों द्वारा सीबीजी की खरीद को बढ़ावा देकर निर्धारित सीबीजी मिश्रण लक्ष्य हासिल किए जाएंगे, जिसके तहत वित्त वर्ष 2027 में 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2028 में 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2029 से 5 प्रतिशत मिश्रण लक्ष्य तय किए गए हैं, जो सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) श्रेणियों में लागू होंगे।

 

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