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राष्ट्रीय

कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को बड़ी राहत, सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस से सभी रेल मार्गों पर परिचालन

Updated on Thursday, August 06, 2026 11:25 AM IST

भारतीय रेल ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (सीटीओ) के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था को सरल बनाने को मंजूरी दी है। अब ऑपरेटरों को अलग-अलग मार्ग श्रेणियों के लिए पृथक अनुमति और शुल्क लेने की मौजूदा व्यवस्था के बजाय 25 करोड़ रुपये के एकसमान पंजीकरण शुल्क के साथ सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस दिया जाएगा। इसके तहत वे भारतीय रेल नेटवर्क के सभी मार्गों पर कंटेनर ट्रेनों का परिचालन कर सकेंगे। इन संशोधनों को राजपत्र अधिसूचना के जरिए अधिसूचित किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इससे कारोबार सुगमता को बढ़ावा मिलेगा, परिवहन लागत और प्रदूषण में कमी आएगी तथा सड़कों पर भीड़भाड़ घटेगी।

सभी मार्गों के लिए एकल लाइसेंस
स्वीकृत संशोधनों के तहत कंटेनर ट्रेन लाइसेंस की मौजूदा मार्ग-वार श्रेणीकरण व्यवस्था समाप्त की जाएगी। रेल मंत्रालय की स्वीकृति के अधीन कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। इससे वे भारतीय रेल नेटवर्क के सभी मार्गों पर कंटेनर ट्रेनों का परिचालन कर सकेंगे।

25 करोड़ रुपये का एकसमान पंजीकरण शुल्क
विभिन्न मार्ग श्रेणियों के लिए अलग-अलग पंजीकरण शुल्क लेने की मौजूदा व्यवस्था खत्म कर दी गई है। अब प्रत्येक आवेदक को भारतीय रेल नेटवर्क के सभी मार्गों पर परिचालन के लिए 25 करोड़ रुपये का एकसमान और अप्रतिदेय पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा।

लाइसेंस विस्तार पर नहीं लगेगा शुल्क
संशोधनों के अनुसार, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर को दी गई अनुमति की अवधि समाप्त होने के बाद इसे आगे 20 वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकेगा। सक्षम प्राधिकारी ऑपरेटर के आवेदन और उसके संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर यह विस्तार प्रदान करेगा। इस विस्तार या भविष्य में उसी ऑपरेटर को दिए जाने वाले किसी अन्य विस्तार के लिए कोई विस्तार शुल्क नहीं लिया जाएगा।

मौजूदा कैटेगरी-I ऑपरेटरों को राहत
कैटेगरी-I लाइसेंसधारी ऑपरेटर अपनी मौजूदा श्रेणी के तहत कन्सेशन अवधि पूरी होने तक परिचालन जारी रख सकेंगे। नई लाइसेंस व्यवस्था के तहत नवीनीकरण या विस्तार के समय उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

कैटेगरी-II, III और IV ऑपरेटरों के लिए भी विकल्प
कैटेगरी-II, III और IV के ऑपरेटर भी अपनी मौजूदा श्रेणियों के तहत कन्सेशन अवधि पूरी होने तक परिचालन जारी रख सकेंगे। नई लाइसेंस व्यवस्था में नवीनीकरण या विस्तार के लिए उन्हें 15 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। यह राशि नए 25 करोड़ रुपये के शुल्क और पहले जमा किए गए 10 करोड़ रुपये के बीच का अंतर है और अप्रतिदेय होगी।

समय से पहले नई व्यवस्था में आने का विकल्प
कैटेगरी-II, III और IV के ऑपरेटर अपनी 20 वर्ष की कन्सेशन अवधि पूरी होने से पहले भी नई लाइसेंस व्यवस्था में स्थानांतरित होने का विकल्प चुन सकेंगे। ऐसी स्थिति में भी उन्हें 15 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।

नियामकीय और अनुपालन लागत घटेगी
एकसमान पंजीकरण शुल्क और लाइसेंस विस्तार शुल्क समाप्त किए जाने से ऑपरेटरों के नियामकीय और अनुपालन संबंधी खर्चों में कमी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही अनुमोदन प्रक्रिया भी सरल और अधिक सुव्यवस्थित होगी।

निजी क्षेत्र की भागीदारी को मिलेगा बढ़ावा
सरल लाइसेंसिंग व्यवस्था से निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहन मिलने और कंटेनर ट्रेन परिचालन के विस्तार की उम्मीद है। इससे देशभर में रेल आधारित माल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और कारोबार के लिए लॉजिस्टिक्स व्यवस्था अधिक दक्ष हो सकेगी।

एमएसएमई की लॉजिस्टिक्स लागत घटने की उम्मीद
कंटेनर परिवहन में रेल के अधिक इस्तेमाल से उद्योग, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), को लाभ होगा। रेल के जरिए अधिक दक्ष और लागत-प्रभावी माल परिवहन का विकल्प मिलने से उनकी लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

सड़क यातायात और प्रदूषण में कमी
कंटेनर यातायात का सड़क से रेल की ओर अधिक स्थानांतरण होने से राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीड़भाड़ कम होने की उम्मीद है। इससे ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी तथा अधिक टिकाऊ माल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

सरल और एकरूप लाइसेंसिंग व्यवस्था की दिशा में कदम
स्वीकृत संशोधनों का उद्देश्य भारतीय रेल नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए सरल और एकरूप लाइसेंसिंग व्यवस्था स्थापित करना है। इससे अनुमोदन प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी और मॉडल कन्सेशन एग्रीमेंट के तहत कंटेनर ट्रेन परिचालन के लिए एक समान नियामकीय ढांचा उपलब्ध होगा।

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