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राष्ट्रीय

सीएटी में डिजिटल सुधारों से प्रशासनिक न्याय को मिली मजबूती: डॉ. जितेंद्र सिंह

Updated on Wednesday, August 05, 2026 12:13 PM IST

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत वसंतराव मोरे ने मंगलवार को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर न्यायाधिकरण की हालिया पहलों और सुधारों की जानकारी दी। इस दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रौद्योगिकी आधारित शासन, डिजिटल परिवर्तन और प्रक्रिया सरलीकरण ने प्रशासनिक न्याय को अधिक तेज, पारदर्शी और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सीएटी की निपटान दर 93% से अधिक
न्यायमूर्ति मोरे ने डॉ. जितेंद्र सिंह को बताया कि स्थापना के बाद से सीएटी को निर्णय के लिए 10 लाख से अधिक मामले प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 9.32 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इस तरह न्यायाधिकरण की कुल निपटान दर 93% से अधिक बनी हुई है। उन्होंने बताया कि नए मामलों के लगातार आने के बावजूद हाल के वर्षों में लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है और 2025 में वार्षिक निपटारे की संख्या नए मामलों से अधिक रही।

सुशासन का अभिन्न अंग है प्रशासनिक न्याय
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार ऐसे शासन सुधारों को आगे बढ़ा रही है, जिनसे सार्वजनिक संस्थान अधिक पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित बनें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक न्याय सुशासन का अभिन्न अंग है और देशभर में सरकारी कर्मचारियों के लिए सेवाओं की सुगमता तथा दक्षता में निरंतर सुधार होना चाहिए।

डिजिटल बदलाव से बढ़ी जवाबदेही
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक संस्थानों में बदलाव का प्रमुख आधार प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और प्रक्रिया सरलीकरण पर जोर है। डिजिटल प्लेटफॉर्म संस्थानों को सेवाएं तेजी से उपलब्ध कराने, जवाबदेही बढ़ाने और प्रक्रियात्मक देरी कम करने में मदद कर रहे हैं। इससे शासन नागरिकों और सेवा प्राप्तकर्ताओं की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बन रहा है।

सीएटी में सुधारों का नया चरण
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीएटी का विस्तारित डिजिटल इकोसिस्टम, मजबूत बुनियादी ढांचा और मामलों के निपटारे में निरंतर सुधार शासन सुधारों की व्यापक दिशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल परिवर्तन और बेहतर मामला निपटान न्यायाधिकरण में सुधारों के एक नए चरण का संकेत हैं और इससे अधिक कुशल तथा सुलभ प्रशासनिक न्याय व्यवस्था तैयार हो रही है।

दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचा प्रशासनिक न्याय
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि न्याय तक पहुंच का विस्तार सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है। नई पीठों की स्थापना और भौगोलिक रूप से दूरदराज क्षेत्रों में सर्किट बैठकों की शुरुआत से प्रशासनिक न्याय वादियों के करीब पहुंचा है। इससे यात्रा की आवश्यकता कम हुई है और देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यायिक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।

जम्मू-श्रीनगर में नई पीठें, चार शहरों में सर्किट बैठकें
न्यायमूर्ति मोरे ने बताया कि सीएटी ने हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। इनमें जम्मू-श्रीनगर में नई पीठों की स्थापना के साथ पुडुचेरी, लेह, कारगिल और विजयवाड़ा में सर्किट बैठकों की शुरुआत शामिल है। इन पहलों से दूरदराज और कम सेवा वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक न्याय तक पहुंच का विस्तार हुआ है।

एसीआईएस से डिजिटल सेवाओं का विस्तार
अध्यक्ष ने डॉ. जितेंद्र सिंह को एडवांस्ड केस इंफॉर्मेशन सिस्टम (एसीआईएस) के तहत हुई प्रगति की जानकारी दी। इसके जरिए ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, ऑनलाइन डिस्प्ले बोर्ड, एसएमएस और ई-मेल अलर्ट, अदालती फीस का ऑनलाइन भुगतान, मोबाइल एप्लिकेशन और ई-प्रमाणित प्रतियों जैसी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

पेपरलेस अदालती कामकाज को बढ़ावा
एसीआईएस के तहत न्यायिक अभिलेखों का डिजिटल निरीक्षण, उन्नत खोज सुविधाएं, ई-मेंशनिंग, ई-लिस्टिंग और दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली जैसी सुविधाएं भी सक्षम की गई हैं। इससे पेपरलेस अदालती कामकाज को बढ़ावा मिला है और मामलों से संबंधित सूचनाओं तथा दस्तावेजों तक पहुंच अधिक सुविधाजनक हुई है।

डिजिटल इंडिया के अनुरूप पहल
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीएटी की डिजिटल पहलें सरकार के डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी पारदर्शिता, दक्षता और शासन में सुगमता का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। डिजिटल परिवर्तन से ऐसी संस्थाएं तैयार हो रही हैं जो अधिक सुलभ, उत्तरदायी और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार हैं।

ई-ऑफिस और ई-एचआरएमएस का भी विस्तार
न्यायमूर्ति मोरे ने बताया कि सभी पीठों में ई-ऑफिस लागू किया गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों को ई-एचआरएमएस पर शामिल करने, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) अपनाने और भविष्य पोर्टल के माध्यम से पेंशन मामलों की डिजिटल प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया गया है। इसके साथ ही न्यायाधिकरण की व्यापक डिजिटल शासन पहलों के तहत ई-एसएएम को भी लागू किया गया है।

मापने योग्य परिणामों पर जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थागत सुधार तभी सबसे अधिक सार्थक होते हैं, जब उनसे मापने योग्य परिणाम हासिल हों। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण के साथ मामलों के निपटारे में निरंतर सुधार प्रौद्योगिकी और बेहतर प्रशासनिक प्रणालियों से समर्थित सतत सुधारों के महत्व को दर्शाता है।

कुशल और नागरिक-केंद्रित संस्थानों पर फोकस
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार संस्थागत क्षमता मजबूत करने, सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार लाने और कुशल, जवाबदेह तथा नागरिक-केंद्रित संस्थानों के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों का समर्थन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन सुधारों से सरकारी कर्मचारियों और नागरिकों दोनों को ठोस लाभ मिलता रहे।

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