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मनोरंजन

'बेबी डू डाई डू' रिव्यू : बिना बोले पूरी कहानी कह गईं हुमा कुरैशी, रहस्य और सस्पेंस से भरपूर फिल्म

Updated on Friday, July 03, 2026 12:19 PM IST

बॉलीवुड में हर साल कई थ्रिलर और एक्शन फिल्में रिलीज होती हैं, लेकिन बहुत कम फिल्में अलग पहचान बना पाती हैं। 'बेबी डू डाई डू' ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। इसमें प्यार, दर्द, रहस्य, अपराध और भावनाओं का ऐसा मेल देखने को मिलता है, जो शुरुआत से आखिर तक दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखता है। फिल्म का माहौल, लगातार होती बारिश, शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक और हर कुछ देर में आने वाले नए मोड़ इसे हाल के वर्षों की सबसे अलग बॉलीवुड थ्रिलर फिल्मों में शामिल कर देते हैं।

फिल्म की कहानी बेबी करमरकर नाम की एक ऐसी महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सुन और बोल नहीं सकती। उसकी यही कमजोरी उसकी सबसे बड़ी ताकत भी बन जाती है। वह मुंबई के रियल एस्टेट माफिया के लिए एक पेशेवर सुपारी किलर के रूप में काम करती है। उसके जीवन का सबसे बड़ा दर्द उसकी बहन की हत्या है, जिसके जिम्मेदार लोगों की तलाश वह पिछले कई सालों से कर रही है। वह अपनी छतरी में बंदूक छिपाकर अपने बॉस के दुश्मनों को रास्ते से हटाती रहती है। कहानी तब नया मोड़ लेती है, जब उसे एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति की हत्या करनी होती है। इसके बाद उसकी जिंदगी में ऐसे बदलाव आते हैं, जो उसके अतीत और वर्तमान दोनों को हिला देते हैं।

इसी दौरान बेबी की जिंदगी में प्यार भी दस्तक देता है और वह सामान्य जीवन जीने का सपना देखने लगती है। इस हिस्से को बेहद संवेदनशील तरीके से फिल्माया गया है। गायक मोहित चौहान की आवाज में एक खूबसूरत गीत इस प्रेम कहानी को और भी असरदार बनाता है। जैसे ही बेबी एक सामान्य जिंदगी का सपना देखने लगती है, उसका हिंसक अतीत फिर उसके सामने आ खड़ा होता है। अपने प्यार को बचाने की कोशिश में आखिरकार उसे अपनी बहन की मौत से जुड़ा वह सच भी मिल जाता है, जिसकी तलाश वह बीस सालों से कर रही थी।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कलाकारों की टोली है। हुमा कुरैशी, चंकी पांडे, सिकंदर खेर, सीमा पाहवा, रचित सिंह, मरुधर शेखावत, अरुण कुशवाहा और अन्य कलाकार अपने-अपने किरदारों में प्रभाव छोड़ते हैं। हालांकि पूरी फिल्म में सबसे ज्यादा असर हुमा कुरैशी का अभिनय छोड़ता है। बिना कुछ बोले उन्होंने सिर्फ अपनी आंखों और चेहरे के एक्सप्रेशन से दर्द, प्यार, गुस्सा और बदले की भावना को जिस तरह पेश किया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। यह उनके करियर की सबसे बेहतरीन प्रस्तुतियों में से एक मानी जा सकती है।

फिल्म का संगीत इसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक है। संगीतकार अर्जुन अय्यर ने एक से बढ़कर एक गीत और बैकग्राउंड स्कोर तैयार किया है, जो कहानी के हर मोड़ को ज्यादा असरदार बना देता है। वहीं, तोजो जेवियर की सिनेमैटोग्राफी फिल्म को एक अलग ही पहचान देती है। बारिश, अंधेरे, रोशनी और रंगों का इस्तेमाल इतना प्रभावशाली है कि हर फ्रेम लंबे समय तक याद रहता है।

निर्देशक नचिकेत सामंत ने इस कहानी को बेहद आत्मविश्वास और नए अंदाज में पर्दे पर उतारा है। उन्होंने पारंपरिक बॉलीवुड मसाला फिल्मों से अलग हटकर एक नई तरह की थ्रिलर फिल्म बनाने की कोशिश की है, जिसमें वह काफी हद तक सफल भी रहे हैं। वहीं, निर्माता साकिब सलीम ने भी इस तरह के अलग विषय पर फिल्म बनाकर साहस दिखाया है।

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गंभीर और खतरनाक माहौल के बीच भी एक अलग तरह का हास्य और अजीब-सी दिलचस्प ऊर्जा बनाए रखती है। बॉलीवुड में इस तरह का अंदाज बहुत कम फिल्मकार सफलतापूर्वक दिखा पाए हैं। यही वजह है कि 'बेबी डू डाई डू' शुरुआत से आखिर तक ताजगी का एहसास कराती है।

बारिश, रहस्य, शानदार संगीत, बदले की कहानी, प्यार और अनोखा प्रस्तुतीकरण, इस फिल्म में मनोरंजन के लगभग सभी रंग मौजूद हैं। अगर आप कुछ नया, अलग और यादगार देखना चाहते हैं, तो 'बेबी डू डाई डू' आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।

 

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