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पंजाब

गुरदासपुर में बाढ़ का अलर्ट! पहाड़ों में बादल फटने से रावी दरिया हो सकता है ओवरफ्लो

Updated on Tuesday, July 14, 2026 18:41 PM IST

गुरदासपुर : हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू कश्मीर के हिमाचल प्रदेश के साथ लगते पहाड़ी ईलाकों में हो रही जोरदार बरसात तथा बादल फटने की घटनाओं के चलते रावी दरिया में कब बाढ़ आ जाए किसी को पता नही होता है। कई बार तो रात के समय में ही रावी दरिया में इतना अधिक पानी आ जाता है कि जिला गुरदासपुर के रावी दरिया किनारे बसे गांवों को भारी मुश्किल का सामना करना पड़ जाता है। परंतु इस सबके बावजूद संबंधी ड्रनेज विभाग द्वारा बाढ़ से निपटने के लिए जरूरत अनुसार प्रबंध नही किए गए है। जिस कारण सीमा पर बसे गांवों के लोग भय के वातावरण में समय व्यतीत कर रहे हैं।


रावी दरिया वैसे तो हिमाचल प्रदेश से रंजीत सागर डैम तथा उसके बाद शाहपुर कंडी डैम के रास्ते माधोपुर हैडवर्कस से आगे जिला पठानकोट तथा जिला गुरदासपुर की सीमा में प्रवेश करता है। रावी दरिया जब जिला पठानकोट की सीमा में प्रवेश करता है तो जैनीपुर के पास उसमें जम्मू कश्मीर राज्य से आने वाला उज्ज दरिया सहित शिंगारवां भी मिलता है। जबकि कुछ स्थानिय नाले भी रावी दरिया में मिलते तैं। जबकि जिला गुरदासपुर में प्रवेश करने पर इस दरिया में पानी का बहाव बहुत अधिक तथा तेज हो जाता है। क्योंकि उज्ज तथा शिंगरावां दरिया का पानी भी इसमें मिल जाता है। जिस कारण जैनीपुर के पास स्थिति बहुत खराब हो जाती है। इस स्थान पर विभाग ने बाढ़ सुरक्षा प्रबंध बना रखे हैं,पंरतु पानी के आगे कुछ भी टिकता नही है। यही कारण है कि जिला गुरदासपुर में रावी दरिया बहुत ही खतरनाक स्थिति में बहता है। मकोड़ा पत्तन के पास रावी दरिया में बाढ़ की स्थिति में पानी का बहाव इतना अधिक होता हे कि किशती भी दरिया में नही डाली जाती है।


जैनीपुर के पास लगभग 400 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले डैम भी अभी अनिश्चिता के वातावरण में है
भारत सरकार ने रावी दरिया का पानी पाकिस्तान में जाने से रोकने के लिए पहले रावी दरिया पर रंजीत सागर डैम बनाया,फिर शाहपुर कंडी डैम बनाया है,जो शुरू होने वाला है। डैम के पीछे बनी झील में पानी भरने का काम शुरू हो चुको है। परंतु उसके बावजूद बरसात के मौसम में रावी दरिया से निकास हुए तथा स्थानिय नालों के पानी को रोकने के लिए जैनीपुर के पास यह लगभग 400 करोड़ रूपये की लागत से डैम बनाने की योजना तैयार की गई थी। जहां पर डैम बना कर एक तो रावी दरिया के पानी को रोका जाना है,वही डैम पर एक सडक़ बना कर दरिया पार बसे गांवों के लिए रास्ता भी बनाया जाता है। इस संबंधी सभी कारवाई पूरी होने सहित सभी तरह की मंजूरी मिलने के बावजूद इस डैम का काम कई सालों से शुरू नही किया जा रहा है। जिस कारण बरसात के दिनों के बाढ़ का खतरा रावी दरिया के किनारे बसे गांवों के लिए बना रहता है।


धुस्सी बांध भी रावी दरिया में आई बाढ़ को नही रोक पाता
रावी दरिया में हर साल आने वाली बाढ़ संबंधी संबंधित विभाग ने बहुत पहले रावी दरिया के भारतीय ईलाके की तरफ के किनारे पर एक विशाल धुस्सी बांध बना रखा है। जिसका मुख्य काम दरिया के पानी को धुस्सी बांध से आगे आने से रोकना है। परंतु गुज्जरों तथा किसानों द्वारा धुस्सी बांध के रास्ते धुस्सी बांध के आगे के ईलाकों में अपने खेतों में जाने के लिए धुस्सी बांध पर से रास्ते बना रखे हैं। जो धुस्सी बांध को नुकसान पंहुचाते हैं तथा बाढ़ आने पर इस स्थानों से धुस्सी बांध टूट जाता है।


वही पाकिस्तान ने भी हमारे भारतीय धुस्सी बांध के मुकाबले में हाजीपुर गुजरांवाला धुस्सी बांध बना रखा है। जिस कारण पानी का बहाव भारतीय ईलाके की तरफ बना रहता है। वही भारतीय ईलाका पाकिस्तान के मुकाबले ढलान पर होने के कारण रावी दरिया के पानी का बहाव तथा दवाब सदा ही भारतीय ईलाके में बना रहता है। जो हमें हर साल नुकसान पंहुचाने का कारण बनता है।


पाकिस्तान द्वारा खोदा नाला भी भारतीय क्षेत्र के लिए खतरनाक साबित हुआ
काफी साल पहले रावी दरिया पाकिस्तान के ईलाके में बहता था। परंतु पाकिस्तान सरकार ने भारतीय ईलाके की तरफ एक नाला खोद कर काफी साल पहले दरिया का पानी नाले में डाल दिया था। जिस कारण दरिया ने अब नाले को ही स्थाई रास्ता बना लिया है। जिस कारण रावी दरिया पहले बहते स्थान के मुकाबले में तीन चार किलोमीटर भारतीय ईलाके में बहता है।


धुस्सी बांध पर जितना पैसा खर्च हुआ उससे दरिया किनारे लोहे की दिवार बन सकती थी
भारत सरकार ने रावी दरिया किनारे बनाए धुस्सी बांध तथा कई स्थानों पर स्पर व स्टड़ आदि बनाने पर बेतहाशा पैसा खर्च किया है। हर साल बाढ़ में धुस्सी बांध सहित यह स्टड़ व स्पर टूट जाते थे तथा विभाग के लिए यह सोने की खान बन गया था। जितना पैसा इस धुस्सी बांध पर खर्च किया गया है उससे दरिया के पानी को रोकने के लिए लोहे की दिवार बन सकती थी।


अब भारत तथा पाकिस्तान ने धुस्सी बांध पर किसी तरह के बाढ़ प्रबंधों को न बनाने का समझौता कर रखा है
कई साल रावी दरिया के पानी को एक दूसरे देश की तरफ मोडऩे के लिए दोनो देशों की सरकारों ने करोड़ों रूपये खर्च किए। पंरतु हर साल बाढ़ के मौसम में क्भी भारत तो क्भी पाकिस्तान इस पानी के युद्व में हार जाता था। जिस कारण अब दोनो देशों ने समझौता कर रखा है कि धुस्सी बांध पर बहुत जरूरी बाढ़ सुरक्षा प्रबंध ही बनाए जाएंगे।


लोग दिन रात भय के वातावरण में जीते हैं
बरसात के मौसम में रावी दरिया में आने वाली बाढ़ के भय से भारतीय सीमा पर दरिया के आसपास के गांवों के लोग भय के वातावरण में ही जीते हैं। क्योंकि हर साल बाढ़ से इन लोगों को अपनी ताबाही देखनी पड़ती है। लोगों की मांग है कि रावी दरिया किनारे जरूरत अनुसार बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था समय रहते ही जाए।

 

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