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Haryana में बदलेगा पटवारी व्यवस्था का ढांचा...लाखों लोगों पर पड़ेगा असर, जानिए क्या है नया प्लान

Updated on Sunday, June 07, 2026 19:55 PM IST

चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश में पटवार सर्कलों के पुनर्गठन का निर्णय लिया है। लंबे समय से लागू भूमि क्षेत्रफल आधारित व्यवस्था को बदलते हुए अब पटवारियों के कार्यक्षेत्र का निर्धारण कार्यभार, आबादी और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर किया जाएगा। सरकार का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के कारण पारंपरिक व्यवस्था अब पर्याप्त नहीं रह गई है।


भर्ती के बाद शुरू होगा नया पुनर्गठन अभियान
हाल ही में पटवारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और विभागीय परीक्षा से जुड़े मामलों के निपटारे के बाद सरकार ने यह व्यापक बदलाव लागू करने का फैसला किया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला उपायुक्तों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि नए मानकों के अनुसार पटवार सर्कलों का पुनर्निर्धारण किया जा सके।


रकबे की जगह कार्यभार बनेगा आधार
अब तक प्रदेश में पटवारियों के कार्यक्षेत्र का निर्धारण मुख्य रूप से भूमि के रकबे के आधार पर किया जाता था। लेकिन सरकार का कहना है कि वर्तमान समय में पटवारियों की जिम्मेदारियां केवल भूमि रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रह गई हैं। म्यूटेशन, डिजिटल भूमि अभिलेख, ऑनलाइन सेवाएं, फसल सर्वेक्षण और नागरिकों से जुड़े राजस्व कार्यों में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में कार्यक्षेत्र तय करने के लिए कार्यभार को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।


2000 एकड़ होगा मानक, स्थानीय जरूरतों के अनुसार बदलाव संभव
नई व्यवस्था के तहत एक पटवार सर्किल में औसतन लगभग 2000 एकड़ कृषि योग्य भूमि शामिल की जाएगी। हालांकि स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए यह सीमा 1500 से 2500 एकड़ तक निर्धारित की जा सकेगी।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पटवारी पर अत्यधिक कार्यभार न पड़े और नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं मिल सकें।


आबादी देह को भी मिलेगा महत्व
नए नियमों के अनुसार पटवार सर्किलों के गठन में केवल कृषि भूमि ही नहीं, बल्कि संबंधित राजस्व एस्टेट की आबादी देह को भी शामिल किया जाएगा। वर्ष 2025 के नए आबादी देह संबंधी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए सर्किलों की नई संरचना तैयार की जाएगी।

जिन क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक है और राजस्व संबंधी कार्यों की संख्या ज्यादा है, वहां छोटे पटवार सर्किल बनाए जाएंगे ताकि लोगों को बेहतर सेवाएं मिल सकें। इसके विपरीत कम आबादी वाले क्षेत्रों में अपेक्षाकृत बड़े सर्किल बनाए जा सकेंगे।


शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग दृष्टिकोण
सरकार ने माना है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतें अलग-अलग हैं। इसी कारण नए पुनर्गठन में दोनों क्षेत्रों के लिए अलग मानक अपनाए जाएंगे। शहरीकरण वाले इलाकों में भूमि संबंधी लेन-देन, नामांतरण और रिकॉर्ड अपडेट के मामलों की संख्या अधिक होने के कारण वहां पटवारियों का कार्यक्षेत्र अपेक्षाकृत छोटा रखा जा सकता है।


राजस्व प्रशासन होगा अधिक सक्षम
सरकार का मानना है कि पटवार सर्कलों के इस वैज्ञानिक पुनर्गठन से राजस्व सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, लंबित मामलों में कमी आएगी और नागरिकों को अधिक पारदर्शी तथा त्वरित सेवाएं मिल सकेंगी। साथ ही डिजिटल राजस्व प्रणाली को भी नई संरचना के अनुरूप अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।

यह बदलाव हरियाणा के राजस्व प्रशासन में वर्षों बाद होने वाला एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जो बदलती जरूरतों के अनुरूप प्रशासनिक ढांचे को नया स्वरूप देगा।

 

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