Wednesday, 28 October 2026
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मन की बात: पीएम मोदी ने महर्षि वाल्मीकि और भाई परमानंद को किया याद, उनके जीवन को बताया प्रेरणास्रोत

Updated on Sunday, October 25, 2026 17:16 PM IST

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में महर्षि वाल्मीकि और स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानंद को याद किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण हजारों वर्ष बाद भी हमें जीवन के नए मूल्य और सीख देती है। प्रधानमंत्री ने भाई परमानंद की 150वीं जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्य समाज से उनका गहरा जुड़ाव उनकी प्रेरणा और आदर्शों का प्रमुख स्रोत था।

प्रधानमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन और रामायण की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा, “महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से हमें जीवन की गहरी सीख दी है। एक ओर वे निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश देते हैं, तो दूसरी ओर सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व समझाते हैं। वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का सुंदर उदाहरण है।”

उन्होंने आगे कहा, “भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को अपनाया। निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया। सबको साथ लेकर चलने का भाव, ये आदर्श आज भी हमें दिशा दिखाते हैं। इस भावना का प्रतिबिंब अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी दिखाई देता है। वहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी के मंदिर भी बनाए गए हैं। मुझे संतोष है कि अयोध्या में एयरपोर्ट का नाम भी महर्षि वाल्मीकि के नाम पर ही रखा गया है। ये प्रयास हमारी उसी महान परंपरा को समृद्ध करते हैं, जिसमें सेवा, समरसता और करुणा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।”

भाई परमानंद जी को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारत की माटी में ऐसे कितने ही महान व्यक्तित्व पैदा हुए जिन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व हैं, भाई परमानंद जी। कुछ ही दिनों बाद 4 नवंबर को हम उनकी 150वीं जयंती मनाएंगे। भाई परमानंद जी की प्रेरणा और आदर्श का बड़ा स्त्रोत था – आर्य समाज से उनका गहरा जुड़ाव।”

पीएम मोदी ने कहा कि 20वीं सदी के बिल्कुल शुरुआती कालखंड में ही भाई परमानंद जी आर्य समाज के काम से दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां उनकी मुलाकात पूज्य बापू से भी हुई थी। उन्होंने गुयाना में गिरमिटिया समाज के बीच भी काम किया, जो उस समय आर्य समाज का एक बड़ा केंद्र था। अपनी गुयाना यात्रा का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मुझे भी गुयाना की अपनी यात्रा के समय आर्य समाज के स्मारक पर जाने का सौभाग्य मिला था।”

उन्होंने यह भी कहा कि भाई परमानंद जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि भाई परमानंद जी ने ही लाला हरदयाल जी को अमेरिका जाने के लिए मनाया था। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से भी एक थे। आजादी की लड़ाई में उनका प्रभाव इतना ज्यादा था कि अंग्रेजों ने उन्हें काला पानी की सजा दे दी थी। उनकी एक किताब है ‘आपबीती : काले पानी की कारावास कहानी’ स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को समझने के लिए ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भाई परमानंद जी ने सजा खत्म होने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में कदम बढ़ाया। उन्होंने कहा, “आपको यह जानकार हैरानी होगी कि उन्होंने वीर भगत सिंह को भी पढ़ाया था। बाद के समय में वे कई वर्षों तक हिंदू महासभा से भी जुड़े रहे। यानि गांधी जी से लेकर गुयाना तक, गदर से लेकर अंडमान तक उनका व्यक्तित्व बहुत प्रेरणादायक है। मैं भाई परमानंद जी को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। युवा साथियों से मेरा आग्रह है कि वे उनके बारे में जानें और दूसरों को भी प्रेरित करें।”

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