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पंजाब

अदालतों का सम्मान जरूरी, घुसपैठियों को देश से बाहर करना चाहिए: हरजीत ग्रेवाल

Updated on Wednesday, August 26, 2026 19:28 PM IST

चंडीगढ़ : राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के चेयरमैन हरजीत सिंह ग्रेवाल ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठियों को लेकर दिए गए बयान, पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति, पंजाब में भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने अदालतों के सम्मान को लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी बताया और पंजाब सरकार के दावों पर भी सवाल उठाए। इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी को लेकर हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि देश का हर नागरिक चाहता है कि अदालतों का सम्मान होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को अदालत के फैसले से असहमति है तो उसके लिए कानून में अपील का रास्ता मौजूद है। अदालत के फैसले का सार्वजनिक तौर पर विरोध करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ना चाहिए। लोकतंत्र तभी सुरक्षित और मजबूत रह सकता है, जब अदालतें निष्पक्ष होकर अपना फैसला दें और देश के नागरिक न्यायपालिका का सम्मान करें। किसी फैसले से असहमति होना अलग बात है, लेकिन अदालत के फैसले को सार्वजनिक रूप से इस तरह चुनौती देना कि उससे न्यायपालिका की गरिमा प्रभावित हो, उचित नहीं माना जा सकता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठियों को लेकर दिए गए बयान पर भी एनसीएम चेयरमैन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश का हर नागरिक चाहेगा कि अवैध घुसपैठ को रोका जाए और देश में घुसपैठियों को रहने नहीं दिया जाना चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी है कि देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई करे। अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं और यदि वे घुसपैठ को लेकर सख्त कार्रवाई की बात कर रहे हैं तो उस पर गंभीरता से अमल होना चाहिए। घुसपैठ को रोकना देशहित से जुड़ा विषय है और सरकार को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।


पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर हरजीत सिंह ग्रेवाल ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दिल्ली के स्कूलों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन स्कूलों को बेहतर बनाने के दावे किए गए थे, वहां कई जगह शिक्षक और भवन से जुड़ी समस्याएं सामने आई थीं। कई पुरानी इमारतों की केवल मरम्मत या रंग-रोगन कर उन्हें बेहतर स्कूल के तौर पर पेश किया जाता है। वास्तविक स्तर पर स्कूलों में क्या सुधार हुआ है, यह सरकार से पूछा जाना चाहिए। यदि सरकार वास्तव में स्कूलों की स्थिति बेहतर करने के लिए काम कर रही है तो यह अच्छी बात है, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन उन्होंने सरकार पर उपलब्धियों को लेकर कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर दावे करने का आरोप लगाया।


ग्रेवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार के भ्रष्टाचार को लेकर किए जाने वाले दावों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यह दावा किया जाता है कि पंजाब में भ्रष्टाचार खत्म हो गया है, लेकिन जमीनी स्थिति का आकलन जनता खुद कर सकती है। सरकार के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर है या नहीं, यह देखने के लिए लोगों को जमीन पर जाकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए। राज्य में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल लगातार उठते रहे हैं।


गैंगस्टर और वसूली के मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए ग्रेवाल ने कहा कि सरकार की ओर से पंजाब में शांतिपूर्ण माहौल होने की बात कही जाती है, लेकिन दूसरी तरफ गैंगस्टरों और कथित वसूली की शिकायतें सामने आती रहती हैं। जनता अब केवल बयानों से संतुष्ट नहीं होगी और सरकार को अपने दावों को जमीन पर साबित करना होगा।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी से जुड़े कथित 5 करोड़ रुपए के आरोपों को लेकर पूछे गए सवाल पर हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री को स्वयं सफाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आरोप किसी सामान्य व्यक्ति की ओर से नहीं लगाए गए हैं, बल्कि एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज का नाम इस मामले में सामने आया है। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता प्यारे लाल गर्ग और अन्य लोगों द्वारा भी इस मुद्दे को उठाए जाने का उल्लेख किया।


ग्रेवाल ने कहा कि जब किसी मामले में इतने गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि वे सामने आकर स्थिति स्पष्ट करें। यदि आरोप गलत हैं तो मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि वास्तविकता क्या है और आरोपों में कितनी सच्चाई है। उन्होंने आगे कहा कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों या अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। सरकार को शीर्ष स्तर पर भी जवाबदेही तय करनी चाहिए।
पंजाब की कानून व्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल पर ग्रेवाल ने कहा कि पत्रकार और जनता खुद जानते हैं कि राज्य में स्थिति कैसी है। उन्होंने सरकार के उन दावों पर सवाल उठाया जिनमें पंजाब में कानून व्यवस्था बेहतर होने की बात कही जाती है। केवल बयान देने या मजाकिया अंदाज में जवाब देने से कानून व्यवस्था की गंभीर समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को कानून व्यवस्था के मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और जमीन पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। यदि राज्य में गैंगस्टरों, जबरन वसूली या अपराध से जुड़ी शिकायतें सामने आ रही हैं तो सरकार को उन पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, कानून व्यवस्था ऐसी चीज है जिसका सीधा असर आम नागरिक की सुरक्षा और उसके रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है।


पंजाब सरकार को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई सरकार की आलोचना करता है तो उसे केवल राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं देखना चाहिए। आलोचना का उद्देश्य व्यक्ति या सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि व्यवस्था और राज्य के हित में सुधार की ओर ध्यान दिलाना भी हो सकता है। सरकार और नेताओं को आलोचना को सकारात्मक तरीके से लेना चाहिए। यदि कोई उनकी कमियां बताता है तो उसका जवाब देने के बजाय उन कमियों को दूर करने की कोशिश होनी चाहिए।

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