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टॉक्सिक रिव्यू: एक्शन, इमोशन और रिश्तों की परतों से बनी है यश की ये फिल्म, क्लाइमैक्स करेगा हैरान

Updated on Wednesday, August 26, 2026 13:11 PM IST

'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' को किसी एक जॉनर में बांधना आसान नहीं है। यह एक एक्शन फिल्म है, लेकिन इसमें गैंगस्टर की दुनिया, रिश्ते, प्यार, परिवार, वफादारी और इंसानी भावनाओं की कई परतें हैं। फिल्म अपने विजुअल्स के जरिए भव्य दुनिया खड़ी करती है, लेकिन इसकी असली ताकत उन किरदारों और उनके बीच के रिश्तों में है। गीतू मोहनदास ने इन सभी पहलुओं को अपनी कहानी कहने की शैली और अलग विजुअल के साथ पेश किया है।

यश फिल्म में राया और उसके बेटे टिकट की दोहरी भूमिका में नजर आते हैं। राया गैंगस्टर की दुनिया का मुख्य चेहरा है, जबकि टिकट कहानी में भावनाओं की एक अलग परत जोड़ता है। दोनों किरदारों का अंदाज एक-दूसरे से काफी अलग है और यश इन दोनों के बीच आसानी से बदलाव करते नजर आते हैं। फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, इन दोनों किरदारों के फर्क और उनके रिश्ते की अहमियत भी सामने आती है।

फिल्म की शुरुआत में कहानी अपने किरदारों, उनके रिश्तों और उनके इरादों को धीरे-धीरे खोलती है। नयनतारा की गंगा और कियारा आडवाणी की नादिया कहानी में भावनात्मक गहराई लेकर आती हैं। कियारा अपने किरदार में गर्मजोशी और कमजोरी दोनों को सामने लाती हैं। हुमा कुरैशी की एलिजाबेथ भी कहानी में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराती हैं।

रुक्मिणी वसंत फिल्म में मेलिसा के किरदार में हैं और एक तरह से सरप्राइज पैकेज बनकर सामने आती हैं। उनका अभिनय स्क्रीन पर असर छोड़ता है। इसके अलावा तारा सुतारिया की रेबेका, अक्षय ओबेरॉय के टोनी, डैरेल डी'सिल्वा के साल्वाडोर और सुदेव नायर के करमाडी जैसे किरदार भी कहानी को ज्यादा परतदार बनाते हैं। हर किरदार की अपनी कहानी और अपना सफर है।

फिल्म का पहला भाग काफी मसालेदार और मनोरंजक है, लेकिन इसके साथ कहानी की गंभीरता भी बनी रहती है। गीतू मोहनदास शुरुआत में ड्रामा, रिश्तों और गैंगस्टर की दुनिया को धीरे-धीरे आगे बढ़ाती हैं। फिर कहानी एक बड़े इंटरवल ब्लॉक तक पहुंचती है। इंटरवल ऐसा मोड़ लेकर आता है, जिसके बाद दर्शक के मन में यही सवाल रहता है कि अब आगे क्या होगा।

हालांकि, फिल्म का दूसरा भाग इसे एक अलग स्तर पर ले जाता है। यहां एक्शन पहले से कहीं बड़ा, ज्यादा तेज और ज्यादा हिंसक नजर आता है। शुरुआत में जो कहानी गैंगस्टर ड्रामा जैसी लगती है, वह धीरे-धीरे ज्यादा उग्र और विस्फोटक रूप ले लेती है।

इतने बड़े एक्शन के बीच फिल्म अपने भावनात्मक पक्ष को नहीं छोड़ती। प्यार, परिवार, वफादारी और चाहत कहानी के साथ लगातार जुड़े रहते हैं। राया, टिकट, गंगा और नादिया के रिश्ते एक्शन को निजी भावनाओं से जोड़ते हैं।

फिल्म की एक खास बात यह भी है कि यह कहानी को हर जगह सीधे-सीधे समझाने की कोशिश नहीं करती। जब आपको लगता है कि अब आप कहानी की दिशा समझ चुके हैं, तभी यह कोई नया मोड़ सामने रख देती है। क्लाइमेक्स में कहानी एक अप्रत्याशित मोड़ लेती है। फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शक के दिमाग में कहानी बनी रहती है।

यश पूरी फिल्म को अपने दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से संभालते हैं। शांत और भावुक दृश्यों से लेकर बड़े एक्शन सीक्वेंस तक वह अपने किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं। राया और टिकट के रूप में उनका दोहरा अभिनय फिल्म को एक और स्तर देता है। जैसे-जैसे दोनों किरदारों के बीच का अंतर सामने आता है, यश का प्रदर्शन और ज्यादा दिलचस्प हो जाता है।

गीतू मोहनदास ने 'टॉक्सिक' के जरिए बड़े स्तर पर कहानी कहने की कोशिश की है। फिल्म में कई किरदार हैं और लगभग हर किरदार को अपनी अलग कहानी दी गई है। निर्देशक दर्शकों को हर बात सीधे बताने के बजाय कई चीजें समझने और जोड़ने का मौका देती हैं। यही इसकी कहानी को दूसरी एक्शन फिल्मों से थोड़ा अलग बनाता है।

'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' एक भव्य, दमदार और महत्वाकांक्षी सिनेमाई अनुभव है। गैंगस्टर ड्रामा, प्यार, परिवार, भावनाओं और बड़े एक्शन को एक साथ लेकर चलने वाली यह फिल्म खासतौर पर बड़े पर्दे पर अपना असर छोड़ती है। यश का दमदार अभिनय और गीतू मोहनदास की अलग कहानी कहने की शैली इसे एक यादगार थिएटर अनुभव बनाने में सफल होती है।

 

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