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पंजाब

भगवंत मान सरकार की हार्म-रिडक्शन सर्विसेज पंजाब की ‘ युद्ध नशों विरूद्ध’ मुहिम को दे रही हैं और मजबूती

Updated on Tuesday, August 25, 2026 18:19 PM IST

चंडीगढ़ : भगवंत मान सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही हार्म-रिडक्शन सर्विसेज ‘ युद्ध नशों विरूद्ध ’ मुहिम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और नशों की समस्या के खिलाफ राज्य की लड़ाई में अहम स्तंभ के रूप में उभर रही हैं।

सब्सटेंस यूज़ डिसऑर्डर (एसयूडी) से पीड़ित लोग स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे 547 आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) केंद्रों और पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी द्वारा चलाए जा रहे 47 ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) केंद्रों के साथ-साथ टार्गेटेड इंटरवेंशन सेवाओं के माध्यम से हार्म-रिडक्शन सर्विसेज का लाभ ले सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हार्म-रिडक्शन सर्विसेज में ऐसे कई उपाय शामिल हैं, जिनका उद्देश्य नशीले पदार्थों के उपयोग से जुड़े स्वास्थ्य और सामाजिक नुकसानों को कम करना है, जिसमें एचआईवी संक्रमण भी शामिल है। केवल नशों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, हार्म-रिडक्शन सर्विसेज की पहुंच इससे जुड़े विभिन्न जोखिम कारकों की पहचान करके उन्हें दूर करने का प्रयास करती है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। प्रमाणों से पता चला है कि जब हार्म-रिडक्शन सर्विसेज के उपाय आवश्यक स्तर और व्यापक कवरेज के साथ लागू किए जाते हैं, तो ये इंजेक्शन के माध्यम से नशीले पदार्थों का उपयोग करने वाले लोगों में एचआईवी महामारी को रोकने, इसकी गति को कम करने और यहां तक कि इसे समाप्त करने में भी मदद कर सकते हैं। इन सेवाओं से हेपेटाइटिस बी और सी जैसी अन्य रक्त के माध्यम से फैलने वाली संक्रमणों की रोकथाम, ओवरडोज के कारण होने वाली मौतों में कमी, अपराध की दर को कम करने और सामाजिक बहिष्कार को दूर करने में भी मदद मिलती है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने नुकसान कम करने को नशों की समस्या के प्रति सरकार की व्यापक रणनीति का एक अहम हिस्सा बताया है। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “हमें प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और उन्हें उपचार के साथ-साथ सम्मानजनक पुनःएकीकरण के लिए आवश्यक कौशल भी उपलब्ध करवाने चाहिए।” उन्होंने सरकार की इस पहुंच को स्पष्ट किया, जिसके तहत प्रभावित लोगों को उपचार से दूर रखने के बजाय उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने पर जोर दिया जा रहा है।

राज्य में हार्म-रिडक्शन सर्विसेज संबंधी सबसे बड़ा कार्यक्रम 500 से अधिक ओओएटी केंद्रों के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जहां मरीज सरकारी मनोचिकित्सक द्वारा जारी किए गए नुस्खे के आधार पर परामर्श के साथ-साथ ओपिओइड उपयोग संबंधी विकार के उपचार और गंभीर या लंबे समय के दर्द के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं प्राप्त कर सकते हैं। इस आउटपेशेंट उपचार रणनीति के तहत ब्यूप्रेनॉर्फिन (बीपीएन) या ब्यूप्रेनॉर्फिन और नालोक्सोन के संयोजन वाली दवा दी जाती है। यह दवा लत पैदा करने वाले ओपिओइड पदार्थों की तरह प्रभाव डालती है, लेकिन लंबे समय तक उपयोग के लिए तुलनात्मक रूप से अधिक सुरक्षित है।

मरीज निर्धारित खुराक लेने के लिए रोजाना ओओएटी केंद्रों में आते हैं। निर्धारित मापदंड पूरे करने वाले मरीजों को कुछ निर्धारित दिनों के लिए घर ले जाने के लिए दवा की खुराक भी दी जाती है। एम्स दिल्ली के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (एनडीडीटीसी) के प्रोफेसर डॉ. अतुल अंबेकर के अनुसार, “ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन ट्रीटमेंट (ओएसटी) या ओपिओइड एगोनिस्ट ट्रीटमेंट के नाम से जाना जाने वाला यह उपचार ओपिओइड निर्भरता के लंबे समय के उपचार के लिए पहली पसंद माना जाता है।”
उपचार की प्रकृति के बारे में बताते हुए डॉ. अतुल अंबेकर ने स्पष्ट किया कि, “इस उपचार में दी जाने वाली दवा भी लत पैदा करने वाली हो सकती है, इसलिए अक्सर यह गलत धारणा बन जाती है कि इसमें एक नशे की जगह दूसरा नशा लिया जा रहा है। लोगों को यह समझने की आवश्यकता है कि कई स्वास्थ्य समस्याओं में लंबे समय तक (कई वर्षों तक और संभवतः जीवनभर) रोजाना दवा लेनी पड़ सकती है। केवल रोजाना एक गोली लेने से कोई व्यक्ति ‘नशे का आदी’ नहीं बन जाता।”

इस कार्यक्रम के तहत नशीले पदार्थों का उपयोग करने वाले लोगों को इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में जागरूक किया जाता है और उन्हें उपचार करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जो लोग अभी भी इंजेक्शन के माध्यम से नशीले पदार्थों का उपयोग करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य टीमें सुरक्षित तरीके से इंजेक्शन लगाने के बारे में सलाह देती हैं। इसमें किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की जा चुकी सिरिंज को दोबारा न इस्तेमाल करने और एचआईवी तथा हेपेटाइटिस जैसी संक्रमणों के खतरे को कम करने वाली सुरक्षित इंजेक्शन प्रक्रियाएं अपनाने पर जोर दिया जाता है।

राज्य ने उपचार के विकल्पों का भी विस्तार किया है, जिसमें विशेष रूप से तरल मेथाडोन के माध्यम से ओरल सब्स्टीट्यूशन थेरेपी शामिल है। ब्यूप्रेनॉर्फिन के विकल्प के रूप में छह समर्पित मेथाडोन क्लीनिक अब फरीदकोट, लुधियाना, पटियाला, गुरदासपुर, मोहाली और जालंधर में चल रहे हैं। राज्य छह और मेथाडोन मेंटेनेंस ट्रीटमेंट केंद्र स्थापित कर रहा है, जिससे ऐसे समर्पित केंद्रों की कुल संख्या 12 हो जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (एनएसीओ) के दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू की जा रही मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी लंबे समय से ओपिओइड निर्भरता से जूझ रहे लोगों के लिए एक प्रभावी उपचार विकल्प उपलब्ध करवाती है। यह व्यापक पहुंच उपचार के परिणामों को बेहतर बनाने और मरीजों को अपने परिवार और समाज में सफलतापूर्वक फिर से शामिल होने में मदद करेगी।”

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