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पंजाब

41वाँ राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा: डॉ. बलबीर सिंह द्वारा लोगों से नेत्रदान के नेक कार्य के लिए आगे आने की अपील

Updated on Monday, August 24, 2026 18:27 PM IST

चंडीगढ़ : नेत्र प्रत्यारोपण के लिए कॉर्निया की भारी कमी को दूर करने के लिए नेत्रदान करने के महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने और लोगों से मृत्यु के बाद अपनी आँखें दान करने का संकल्प लेने की अपील करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का शुभारंभ किया।

स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से नेत्रदान करने का संकल्प लेने के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "नेत्रदान करना एक नेक कार्य है क्योंकि यह किसी नेत्रहीन व्यक्ति को दृष्टि का उपहार दे सकता है।"

41वाँ राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग इस पखवाड़े के दौरान आम लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियाँ चलाएगा।

डॉ. बलबीर सिंह, जो स्वयं एक नेत्र सर्जन हैं, ने जानकारी दी कि कॉर्निया के क्षतिग्रस्त होने के कारण अंधापन होता है, जिसे कॉर्नियल अंधापन कहा जाता है। कॉर्निया पुतली के सामने वाली एक पारदर्शी परत होती है। उन्होंने कहा, "यह कॉर्निया ही है जो दाता की आँखों से लिया जाता है और कॉर्नियल अंधेपन से पीड़ित व्यक्ति पर ट्रांसप्लांट किया जाता है, जिससे वह व्यक्ति दुनिया को देखने में सक्षम हो जाता है," उन्होंने आगे बताया कि इस सर्जिकल प्रक्रिया को केराटोप्लास्टी कहा जाता है।

नेत्रदान के महत्व को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हमारी आँखें बहुत महत्वपूर्ण संवेदी अंग हैं, क्योंकि हमारे सभी संवेदी अनुभवों में से 80% तक हमारी दृष्टि के माध्यम से अनुभव होते हैं। दृष्टि के उपहार के बिना सामान्य जीवन व्यतीत करना बहुत कठिन होता है। उन्होंने यह भी बताया कि कॉर्नियल अंधापन मुख्य रूप से बच्चों और युवाओं को प्रभावित करता है, जिनका आगे लंबा जीवन होता है और एक व्यक्ति द्वारा नेत्रदान करने से दो कॉर्नियल नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 11 लाख लोग कॉर्नियल अंधेपन से पीड़ित हैं और हर साल 25,000 नए मामले जुड़ रहे हैं। भारत में 1 लाख से अधिक कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है, लेकिन भारत में हर साल केवल 25,000 कॉर्नियल प्रत्यारोपण ही किए जाते हैं। उन्होंने कहा, "हम नेत्रदान और कॉर्नियल नेत्रहीनों की संख्या के बीच एक बड़ा अंतर देख सकते हैं। इसलिए हम सभी को अपनी आँखें दान करने का संकल्प लेकर इस अंतर को भरने के लिए आगे आना चाहिए और अपने राज्य और देश को कॉर्नियल अंधेपन से मुक्त बनाना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि यद्यपि हमारे पास प्रत्यारोपण करने के लिए प्रशिक्षित, उच्च योग्य सर्जन और अस्पताल की सुविधाएँ मौजूद हैं, लेकिन सर्जरी करने के लिए हमारे पास पर्याप्त नेत्र ऊतक नहीं हैं।

पंजाब में कुल 13 पंजीकृत आई बैंक और 20 पंजीकृत कॉर्नियल ट्रांसप्लांट केंद्र हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान पंजाब में कुल 1041 केराटोप्लास्टी की गईं, जबकि जुलाई 2026 तक ऐसी 351 सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशक डॉ. हितिंदर कौर ने बताया कि इस पखवाड़े के दौरान राज्य भर में विभिन्न आई.ई.सी. गतिविधियाँ चलाई जाएंगी और इस संबंध में सभी सिविल सर्जनों को पहले ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस जागरूकता अभियान के दौरान नेत्रदान से संबंधित विभिन्न भ्रांतियों और अंधविश्वासों को दूर किया जाएगा। विभाग द्वारा लोगों को यह समझाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे कि कौन नेत्रदान कर सकता है, दान की गई आँखों का उपयोग कैसे किया जाता है और मृत्यु के बाद नेत्रदान करने का संकल्प लेने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा।

राष्ट्रीय अंधत्व एवं दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीसीबीवीआई) की राज्य प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. नीति सिंगला ने बताया कि वेबसाइट https://notto.abdm.gov.in/ पर जाकर नेत्रदान करने का संकल्प लिया जा सकता है। संकल्प लेने के बाद इसी वेबसाइट से प्रतिज्ञा प्रमाणपत्र डाउनलोड किया जा सकता है।

बक्सा: नेत्रदान के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न, तथ्य और भ्रांतियाँ

• आई बैंक क्या होता है? - यह दाता और प्राप्तकर्ता/नेत्र सर्जन के बीच एक कड़ी का काम करता है। यह सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एक ऐसी संस्था है जो कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता वाले लोगों के लिए मानव आँखें एकत्रित और प्रदान करती है।
• कौन नेत्रदान कर सकता है? - आयु, लिंग और रक्त समूह की परवाह किए बिना कोई भी नेत्रदान कर सकता है।
• क्या ट्रांसप्लांट के लिए पूरी आँख का उपयोग किया जाता है? - नहीं, केवल पुतली के सामने वाली पतली पारदर्शी परत जिसे कॉर्निया कहा जाता है, ट्रांसप्लांट के लिए उपयोग की जाती है। कॉर्निया बिना किसी रक्त वाहिकाओं वाला एक पारदर्शी ऊतक होता है। साफ कॉर्निया व्यक्ति को अच्छी दृष्टि प्रदान करता है।
• कॉर्नियल प्रत्यारोपण से क्या अभिप्राय है? - यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है जहाँ खोई हुई दृष्टि वापस लाने के लिए रोगी के क्षतिग्रस्त कॉर्निया को दाता के स्वस्थ कॉर्निया से बदल दिया जाता है।
• मृत्यु के बाद कॉर्निया/आँख को कितनी जल्दी निकाला जाना चाहिए? - मृत्यु के 6 घंटों के भीतर।
• क्या मधुमेह और उच्च रक्तचाप का रोगी नेत्रदान कर सकता है? - हाँ।
• कौन नेत्रदान नहीं कर सकता? - उन दाताओं से आँखें नहीं ली जाती हैं जो निम्नलिखित बीमारियों से पीड़ित हैं या जिनकी मृत्यु निम्नलिखित कारणों से हुई हो: एड्स (एचआईवी)/हैपेटाइटिस बी या सी, सेप्सिस, ल्यूकेमिया, रेबीज, मेनिनजाइटिस, एन्सेफलाइटिस, टिटनेस और अन्य वायरल बीमारियाँ।
• मृतक के रिश्तेदारों को क्या करना चाहिए? - मृत्यु के तुरंत बाद निकटतम आई बैंक या आई कलेक्शन सेंटर को सूचित करें।
• नेत्रदान करना केवल मृत्यु के बाद ही संभव है।
• कॉर्निया को 6 घंटों के भीतर निकालना आवश्यक होता है।
• यद्यपि किसी व्यक्ति ने अपनी आँखें दान करने का संकल्प लिया हो, फिर भी दान की प्रक्रिया के लिए परिवार की सहमति अनिवार्य होती है।
• आँखें निकालने की प्रक्रिया एक सामान्य सर्जिकल प्रक्रिया है जो दाता के चेहरे को विकृत नहीं करती।
• नेत्रदान एक निःशुल्क सेवा है, दाता के परिवार से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
• यह सुनिश्चित करें कि आपके परिवार के सदस्य आपकी नेत्रदान करने की इच्छा से भली-भांति परिचित हों।
• मृत्यु होने पर परिवार को तुरंत निकटतम आई बैंक से संपर्क करना चाहिए।
• आई बैंक की टीम मृतक के स्थान पर जाकर आँखें एकत्रित करेगी।

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