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पंजाब

मुख्यमंत्री सेहत योजना ने लंबे समय तक चलने वाले छाती के कैंसर के इलाज में वित्तीय बाधाओं को दूर किया; पंजाब भर में 26.59 करोड़ रुपये की लागत से हुआ ब्रेस्ट कैंसर के 15,494 मरीजों का इलाज

Updated on Monday, August 24, 2026 18:22 PM IST

चंडीगढ़ : छाती के कैंसर का इलाज केवल सर्जरी और कीमोथेरेपी तक सीमित नहीं होता, बल्कि कुछ मरीजों को रेडिएशन, टारगेटेड या हार्मोन थेरेपी के साथ लंबे समय तक फॉलो-अप की भी आवश्यकता पड़ सकती है। मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के माध्यम से प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार प्रदान करके इलाज जारी रखने के दौरान आर्थिक कठिनाई को दूर करने में सहायता की जा रही है।

छाती के कैंसर होने पर छाती में असामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने और फैलने लग जाती हैं। यह भारतीय महिलाओं में होने वाले कैंसर की सबसे आम किस्म है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉरमैटिक्स एंड रिसर्च (आई.सी.एम.आर.-एन.सी.डी.आई.आर.) के अनुसार वर्ष 2022 में भारत में लगभग 2,16,108 महिलाओं में छाती के कैंसर की पहचान हुई थी, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 2,32,832 होने का अनुमान है। कार्यक्रम के अनुमान के अनुसार, 29 भारतीय महिलाओं में से एक को 74 वर्ष की आयु तक पहुँचने पर छाती के कैंसर होने की संभावना रहती है।

इस संबंध में पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने जोर देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक दिक्कतें किसी भी पात्र मरीज के लिए मानक स्वास्थ्य सेवाएं लेने में बाधा न बनें। उन्होंने कहा, "किसी भी प्रकार की वित्तीय तंगी के कारण पात्र मरीज मानक कैंसर उपचार से वंचित नहीं रहने चाहिए।"

एडवांस्ड कैंसर इंस्टीट्यूट, बठिंडा में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी की प्रोफेसर और प्रमुख डा. करुणा सिंह ने कहा कि कैंसर के इलाज की पूरी प्रक्रिया कई महीनों तक चल सकती है और कुछ मरीजों के लिए यह अवधि और भी बढ़ सकती है। उन्होंने बताया, " छाती का कैंसर का इलाज लंबे समय तक चल सकता है, इसीलिए कुछ मरीजों को लंबे समय तक थेरेपी और फॉलो-अप की आवश्यकता होती है। छाती के कैंसर के इलाज का प्रारंभिक चरण कई महीनों तक चल सकता है, जबकि कुछ मरीजों को टारगेटेड या हार्मोनल थेरेपी के साथ वर्षों तक फॉलो-अप की आवश्यकता पड़ सकती है।"

इसके बाद भी वर्षों तक नियमित फॉलो-अप जारी रहते हैं, जिसके दौरान स्वास्थ्य लाभ, उपचार के दुष्प्रभावों और बीमारी के दोबारा होने के संकेतों की निगरानी के लिए क्लिनिकल जांच और आवश्यक टेस्ट किए जाते हैं।

डा. करुणा सिंह ने जोर देते हुए कहा कि इलाज बीमारी की स्थिति और इसकी जैविक विशेषताओं पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, "लोकोरिजनल बीमारी के मामले में इलाज में कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी शामिल हो सकती है और आवश्यकता पड़ने पर हार्मोन थेरेपी भी दी जा सकती है। मेटास्टैटिक बीमारी में मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर इम्यूनोथेरेपी के साथ या इसके बिना कीमोथेरेपी का उपयोग किया जा सकता है।"

पंजाब राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत 26.59 करोड़ रुपये की लागत से छाती के कैंसर के 15,494 उपचार किए गए हैं। दर्ज मामलों की सबसे अधिक संख्या 50–59 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं की रही, जिनके 4,515 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 40–49 वर्ष आयु वर्ग में 4,141 और 60–69 वर्ष आयु वर्ग में 3,557 मामले दर्ज किए गए। इसी प्रकार, 30–39 वर्ष आयु वर्ग में 1,332 मामले दर्ज किए गए। 40–69 वर्ष के आयु वर्गों में कुल 12,213 उपचार दर्ज किए गए।

सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, अमृतसर में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डा. मनराज सिंह कंग ने बताया कि उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी (जिसमें वीमैट, 3डी, आईएमआरटी और ब्रैकीथेरेपी शामिल हैं), हार्मोनल थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी शामिल हैं।

कई महिलाओं में छाती के कैंसर का संबंध आनुवांशिक कारकों से भी हो सकता है। उन्होंने कहा, "यदि यह 30–40 वर्ष की आयु में, विशेषकर मीनोपॉज़ से पहले होता है, तो यह अधिक गंभीर रूप वाला, हार्मोन रिसेप्टर नेगेटिव या ट्रिपल नेगेटिव हो सकता है। इसके विपरीत, 50 वर्ष और इससे अधिक आयु की महिलाओं में यह हार्मोन पॉजिटिव होता है, आम तौर पर कम गंभीर होता है और इसका पूर्वानुमान अक्सर बेहतर होता है, विशेषकर स्टेज 1–3 में।"

डा. कंग ने आगे कहा, "सर्जरी के दो मुख्य तरीके हैं: ब्रेस्ट-कन्जर्विंग सर्जरी, जिसका उद्देश्य छाती को सुरक्षित रखना है और जो स्टेज 1–3 में संभव हो सकती है, और मोडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी। उपचार का चयन बायोप्सी के परिणाम, ट्यूमरों की संख्या और आकार, लिम्फ नोड्स की संलिप्तता और ट्यूमर की अन्य विशेषताओं एवं कारणों पर निर्भर करता है।"

संगरूर की रहने वाली राजिंदर कौर ने टाटा मेमोरियल अस्पताल में क्रायोप्लास्टी के साथ ब्रेस्ट-कन्जर्विंग सर्जरी करवाई। उनके पति परबू सिंह ने कहा, "मुख्यमंत्री सेहत योजना हमारे परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं रही। मेरी पत्नी को बिना किसी आर्थिक बोझ के बेहतरीन इलाज मिला। ऐसी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए हम सरकार के आभारी हैं।"

डा. करुणा सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मुख्यमंत्री सेहत योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रही है। उन्होंने कहा, "इनमें से अधिकतर मरीज इस सहायता से अपना इलाज पूरा कर पाते हैं।" उन्होंने कहा कि योजना का महत्व चिकित्सकीय निर्णयों को प्रभावित करने में नहीं, बल्कि इलाज पूरा करने में आने वाली वित्तीय मुश्किल को दूर करने में है।

लंबे समय तक चलने वाले कैंसर के इलाज का सामना कर रहे परिवारों के लिए ऐसी सहायता का मतलब कम वित्तीय बोझ, इलाज पूरा करने पर अधिक ध्यान, फॉलो-अप जारी रखने और स्वास्थ्य लाभ की ओर बढ़ने में मदद हो सकता है।

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