Thursday, 29 October 2026
BREAKING
• हरियाणा दिवस पर रोहतक पदयात्रा में शामिल होंगे BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन : डॉ. अर्चना गुप्ता • हरियाणा केवल निवेश का गंतव्य नहीं, उद्योगों के विकास में विश्वसनीय साझेदार’ : नायब सिंह सैनी • गुजरात में बनेगा हरियाणा भवन, प्रवासी हरियाणावासियों की समस्याओं के समाधान के लिए बनेगा विशेष पोर्टल • शहीद स्मारक निर्माण के लिए कई बार विधानसभा में उठाई मांग, हमारी सरकार आई तो मिली मंजूरी : अनिल विज • अतिथि अध्यापकों के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाए हरियाणा सरकार : कुमारी सैलजा • झज्जर में 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते पटवारी गिरफ्तार, विरासत इंतकाल दर्ज करने के बदले मांगी थी रकम • ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली के लिए हरियाणा कांग्रेस ने कसी कमर, हुड्डा बोले- रामलीला मैदान में जुटेंगे लाखों लोग • हरियाणा वक्फ बोर्ड के दो अधिकारी 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार, निजी आरोपी फरार • हिमाचल प्रदेश में करवा चौथ पर 29 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश, CM सुक्खू ने किया ऐलान • Shimla: वोट चोरी के खिलाफ सभी को सजग होना पड़ेगा : प्रतिभा सिंह

मनोरंजन

एक नाटक ने बदली जिंदगी : पत्रकारिता से अभिनय की ओर मुड़ीं सुरेखा सीकरी की कहानी

Updated on Thursday, July 16, 2026 11:49 AM IST

मुंबई : हिंदी सिनेमा, टेलीविजन और रंगमंच की दुनिया में अलग पहचान बनाने वाली दिग्गज अभिनेत्री सुरेखा सीकरी को गुजरे हुए कई साल हो चुके हैं, लेकिन उनके निभाए किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं। सख्त 'दादी सा' से लेकर संवेदनशील मां और मजबूत महिला के किरदार तक, उन्होंने हर भूमिका में जान डाल दी।

दिलचस्प बात यह है कि अभिनय की दुनिया में आने से पहले सुरेखा सीकरी पत्रकार बनने का सपना देखती थीं, लेकिन किस्मत उन्हें रंगमंच की दुनिया में ले गई और आगे चलकर उन्होंने अभिनय को ही अपनी पहचान बना लिया।

सुरेखा सीकरी का जन्म 19 अप्रैल 1945 को नई दिल्ली में हुआ था। उनका बचपन अल्मोड़ा और नैनीताल में बीता। पढ़ाई में वह काफी अच्छी थीं और शुरुआत में उनका सपना पत्रकार बनने का था। हालांकि, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया। इसी दौरान उन्होंने रंगमंच को करीब से जाना और अभिनय की तरफ उनका झुकाव बढ़ने लगा।

कहा जाता है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मशहूर रंगकर्मी इब्राहिम अल्काजी के नाटक ने सुरेखा सीकरी के मन पर गहरा असर डाला। उनकी बहन भी इस नाटक से प्रभावित हुई थीं और अभिनय की दुनिया में जाने का विचार किया था। बाद में सुरेखा ने खुद नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) का फॉर्म भरा और उनका चयन हो गया। साल 1968 में वह अभिनय सीखने के लिए दिल्ली पहुंचीं और 1971 में उन्होंने एनएसडी से पढ़ाई पूरी की।

एनएसडी से निकलने के बाद सुरेखा सीकरी ने कई साल तक थिएटर में काम किया। उन्होंने एनएसडी रिपर्टरी कंपनी के साथ लंबे समय तक रंगमंच किया और कई यादगार नाटकों में अभिनय किया। थिएटर ने उनके अभिनय को गहराई दी, और यही अनुभव आगे चलकर फिल्मों और टेलीविजन में उनके काम आया। साल 1989 में उन्हें रंगमंच में योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

सुरेखा सीकरी ने साल 1977 में 'किस्सा कुर्सी का' से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं, लेकिन हर किरदार को अपनी खास शैली से यादगार बना दिया। गोविंद निहलानी की फिल्म 'तमस', श्याम बेनेगल की 'मम्मो', 'सरफरोश', 'जुबेदा', 'रेनकोट' और कई अन्य फिल्मों में उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई।

साल 1988 में आई फिल्म 'तमस' और 1995 की फिल्म 'मम्मो' के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद साल 2018 में आई फिल्म 'बधाई हो' ने उन्हें नई पीढ़ी के दर्शकों तक पहुंचाया। फिल्म में उन्होंने दुर्गा देवी कौशिक यानी आयुष्मान खुराना की दादी का किरदार निभाया था। इस भूमिका के लिए उन्हें तीसरी बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें फिल्मफेयर और स्क्रीन अवॉर्ड भी मिले।

हालांकि, सुरेखा सीकरी को घर-घर पहचान टीवी सीरियल 'बालिका वधू' से मिली। इस शो में उन्होंने कल्याणी देवी यानी 'दादी सा' का किरदार निभाया था। लोग उन्हें उनके असली नाम से ज्यादा 'दादी सा' के नाम से पहचानने लगे। उनके डायलॉग बोलने का तरीका और चेहरे के एक्सप्रेशन इस किरदार की सबसे बड़ी ताकत थे।

सुरेखा सीकरी ने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव भी देखे। साल 2018 में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिसके बाद उनकी सेहत पर असर पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और काम करने की इच्छा बनाए रखी। उन्होंने हमेशा कहा कि वह अभिनय से दूर नहीं होना चाहतीं और सम्मान के साथ काम करना चाहती हैं।

उनकी आखिरी फिल्मों में 'घोस्ट स्टोरीज' और 'क्या मेरी सोनम गुप्ता बेवफा है?' शामिल रहीं। 16 जुलाई 2021 को मुंबई में कार्डियक अरेस्ट के कारण 76 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

 

Have something to say? Post your comment
दर्शकों का दिल जीत रही है राजस्थानी फ़िल्म ‘धूड़’, देशभर में मिल रहा प्यार

: दर्शकों का दिल जीत रही है राजस्थानी फ़िल्म ‘धूड़’, देशभर में मिल रहा प्यार

दलेर मेहंदी के शो पर मंत्री की नाराजगी को लेकर मीका सिंह का तंज, बोले- 'ऑडियंस तो खुश थी'

: दलेर मेहंदी के शो पर मंत्री की नाराजगी को लेकर मीका सिंह का तंज, बोले- 'ऑडियंस तो खुश थी'

रवि किशन की नई फिल्म 'मेरा यार बजरंगी' का ऐलान, अगले साल दीपावली पर सिनेमाघरों में देगी दस्तक

: रवि किशन की नई फिल्म 'मेरा यार बजरंगी' का ऐलान, अगले साल दीपावली पर सिनेमाघरों में देगी दस्तक

तिरुमला के श्रीवारी मंदिर पहुंचीं भूमि पेडनेकर, परिवार के साथ किए भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन

: तिरुमला के श्रीवारी मंदिर पहुंचीं भूमि पेडनेकर, परिवार के साथ किए भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन

'सीआईडी' और 'आहट' के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का निधन, अशोक पंडित ने जताया दुख

: 'सीआईडी' और 'आहट' के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का निधन, अशोक पंडित ने जताया दुख

मिहिर आहूजा के लिए क्यों खास है 'दिलवाली दिवाली'? एक्टर बोले-'खुद का नया पहलू खोजने का मिला मौका'

: मिहिर आहूजा के लिए क्यों खास है 'दिलवाली दिवाली'? एक्टर बोले-'खुद का नया पहलू खोजने का मिला मौका'

'पता नहीं कहां भीख मांगेंगे', दीपिका सिंह से शादी के बाद बदली रोहित राज गोयल के परिवार की जिंदगी

: 'पता नहीं कहां भीख मांगेंगे', दीपिका सिंह से शादी के बाद बदली रोहित राज गोयल के परिवार की जिंदगी

'मैं भी अपनी शर्तों पर जीती हूं', 'दिल पड़ोसी' में दीया का किरदार निभाने पर बोलीं न्यारा एम बनर्जी

: 'मैं भी अपनी शर्तों पर जीती हूं', 'दिल पड़ोसी' में दीया का किरदार निभाने पर बोलीं न्यारा एम बनर्जी

सदाबहार गानों के साथ पुराने दौर में लौटेंगे दर्शक, अभिजीत सावंत ला रहे नया म्यूजिकल कॉन्सेप्ट

: सदाबहार गानों के साथ पुराने दौर में लौटेंगे दर्शक, अभिजीत सावंत ला रहे नया म्यूजिकल कॉन्सेप्ट

'पहले डर लगा कि क्या हम इस लायक हैं?', सीता-राम की भूमिका पर साई पल्लवी और रणबीर कपूर की प्रतिक्रिया

: 'पहले डर लगा कि क्या हम इस लायक हैं?', सीता-राम की भूमिका पर साई पल्लवी और रणबीर कपूर की प्रतिक्रिया

X