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हरियाणा में नलकूपों के पानी की होगी मुफ्त जांच, रिपोर्ट के आधार पर तय होगी फसल : नायब सिंह सैनी

Updated on Friday, July 03, 2026 19:41 PM IST

चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में किसानों के नलकूपों/ट्यूबवेलों के पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए, ताकि किसानों को उनके खेत और पानी की गुणवत्ता के अनुरूप समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी नलकूपों के पानी की गुणवत्ता की जांच करवाएगी और इस पूरी प्रक्रिया को किसान हित में सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री शुक्रवार को चंडीगढ़ में राज्य सरकार की बजट घोषणाओं, मुख्यमंत्री घोषणाओं तथा संकल्प पत्र-2024 की प्रतिबद्धताओं की समीक्षा के लिए आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की योजनाओं एवं परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार,डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव अमनीत पी. कुमार, कृषि विभाग के महानिदेशक राजनारायण कौशिक, मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेन्द्र बढ़खालसा,मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।


नलकूप /ट्यूबवेल के पानी की मुफ्त जांच, ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल से जुड़ेगी पूरी व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बैठक में निर्देश दिए कि किसानों के नलकूपों के पानी के नमूनों की मुफ्त जांच सुनिश्चित की जाए तथा किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपने पानी के नमूने परीक्षण हेतु संबंधित प्रयोगशालाओं में जमा कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि इस पूरी व्यवस्था को ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल से जोड़ा जाए, ताकि प्रत्येक नमूने का रिकॉर्ड, उसकी जांच रिपोर्ट और उससे संबंधित कृषि परामर्श डिजिटल रूप से उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नलकूपों के पानी की जांच में कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्लोराइड सहित अन्य आवश्यक रासायनिक तत्वों और जल गुणवत्ता मानकों का परीक्षण किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन परीक्षणों के आधार पर किसानों को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि उनके पानी की गुणवत्ता के अनुसार कौन-सी फसलें उपयुक्त रहेंगी, किन फसलों से बचना चाहिए और किस प्रकार की पोषक तत्व संबंधी कमी या जल-गुणवत्ता की स्थिति में कौन-सी कृषि पद्धति अपनाई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पानी की जांच कर रिपोर्ट देना नहीं, बल्कि “पानी की रिपोर्ट के आधार पर फसल चयन” की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करना है, ताकि किसान उपलब्ध जल की गुणवत्ता के अनुरूप सही फसल का चयन कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के किसान अपने नलकूप का सैंपल अपनी नजदीकी लैब में कभी भी ले जाकर परीक्षण करवा सकते हैं


प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा, पात्र किसानों को प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट 2026-27 में की गई घोषणाओं के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किसानों को सहायता उपलब्ध कराने, प्रमाणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा इस क्षेत्र में संस्थागत ढांचा विकसित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं। बैठक में इस संबंध में विभिन्न प्रावधानों, व्यवस्थाओं और क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एपीडा (APEDA) से प्रमाणित अथवा प्राकृतिक/जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाए, ताकि पात्र किसानों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार इसका लाभ मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना से संबंधित पात्रता, आवेदन, प्रमाणन, सत्यापन तथा अनुदान वितरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए।

उन्होंने कृषि विभाग के स्वामित्व वाली लगभग 800 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में की जा रही कार्रवाई की भी समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भूमि का उपयोग प्राकृतिक/जैविक खेती के लिए करने संबंधी व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाए, ताकि इच्छुक किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती को व्यवहारिक रूप से मजबूत बनाने के लिए किसानों को आवश्यक आधारभूत सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को देसी गाय खरीदने के लिए 30,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जाए, ताकि किसान गो-आधारित प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी संसाधन जुटा सकें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रमाणन, प्रोत्साहन, प्रशिक्षण, भूमि उपयोग, विपणन और उत्पादों की बिक्री जैसे सभी पहलुओं को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाए, ताकि किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक बेहतर व्यवस्था मिल सके।


फॉस्फोरस युक्त जैविक खाद (PROM) को बढ़ावा देने पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री ने फॉस्फोरस युक्त जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य सुधार, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को मजबूत आधार देने के लिए ऐसी जैविक खादों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को फॉस्फोरस युक्त जैविक खाद सहित अन्य जैविक खादों के उपयोग, उपलब्धता और लाभों के बारे में जागरूक किया जाए तथा इन्हें प्राकृतिक एवं जैविक खेती से जुड़े कार्यक्रमों के साथ प्रभावी रूप से जोड़ा जाए।


गन्ना उत्पादन बढ़ाने, प्रोत्साहन राशि और आधुनिक तकनीक पर जोर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक में गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से गन्ना क्षेत्र से संबंधित योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गन्ने की अधिक पैदावार के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए, ताकि किसान उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना किसानों को राहत देने और लागत कम करने के लिए शुगरकेन हार्वेस्टर उपलब्ध कराने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने टिश्यू कल्चर के माध्यम से गन्ने की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इस तकनीक के विस्तार से किसानों को बेहतर किस्म, अधिक उत्पादन और बेहतर आय सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गन्ने से संबंधित सभी योजनाओं, प्रोत्साहन प्रावधानों, आधुनिक तकनीकों और यंत्रीकरण को समन्वित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाए, ताकि प्रदेश में गन्ना उत्पादन को नई गति मिल सके।


कपास की फसल को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराने के निर्देश
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में कपास की फसल को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आवश्यक सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि कपास की खेती को प्रोत्साहित करने, उत्पादन लागत कम करने तथा किसानों को राहत देने के उद्देश्य से हैंडहेल्ड बैटरी चालित मशीनों और ईंधन चालित कॉटन पिकिंग मशीनों पर अनुदान उपलब्ध कराने संबंधी व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाए, ताकि कपास उत्पादक किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके और प्रदेश में कपास की खेती को प्रोत्साहन मिले।


कृषि योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बजट घोषणाओं, मुख्यमंत्री घोषणाओं तथा संकल्प पत्र में किए गए प्रत्येक वादे को निर्धारित समय-सीमा में प्रभावी ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए और विभाग सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे।

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