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28 या 29 अक्टूबर, कब है करवा चौथ? जानें सरगी से चांद निकलने के समय तक की पूरी जानकारी

Updated on Sunday, October 25, 2026 17:09 PM IST

हिंदू धर्म में करवा चौथ का विशेष महत्व है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने के बाद शुरू होने वाला यह व्रत रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने और पति के हाथों से जल ग्रहण करने के बाद पूरा होता है। इस दिन महिलाएं सोलह शृंगार करती हैं, पूजा की थाली सजाती हैं और करवा माता की कथा सुनती हैं।

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 और 29 अक्टूबर की मध्यरात्रि 1 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 29 अक्टूबर को ही करवा चौथ मनाया जाएगा। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं तारीख को लेकर किसी तरह के भ्रम में न रहें।

करवा चौथ पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। पंचांग के मुताबिक, इस साल पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 38 मिनट से शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस दौरान महिलाएं भगवान गणेश, शिव-पार्वती और करवा माता की पूजा करती हैं। पूजा के समय करवा चौथ की कथा सुनने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा है।

करवा चौथ पर सरगी खाने की परंपरा बेहद खास है। आमतौर पर सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और दूसरी खाने-पीने की चीजें शामिल होती हैं। कई परिवारों में इसके साथ कपड़े और शृंगार का सामान भी दिया जाता है। सरगी खाने के बाद महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं।

इस साल सूर्योदय लगभग सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर होने की संभावना है। ऐसे में सरगी सूर्योदय से पहले खा लेनी चाहिए। कई परिवारों में इसे सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच खाने की परंपरा है। हालांकि, सरगी का समय और उसमें शामिल चीजें परिवार की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

करवा चौथ के दिन महिलाओं को चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार रहता है। पंचांग के अनुसार, 29 अक्टूबर को चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8 बजकर 17 मिनट है। हालांकि, चांद निकलने का वास्तविक समय शहर और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर का चंद्रोदय समय जरूर जांच लें।

चंद्रमा के दर्शन करने के बाद महिलाएं उन्हें अर्घ्य देती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।

 

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