Wednesday, 28 October 2026
BREAKING
• हरियाणा में 12,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर MoU, गुजरात दौरे पर सीएम नायब सैनी ने की उद्योगपतियों से मुलाकात • 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में शामिल हुए हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण • हादसा देख मंत्री कृष्णलाल पंवार ने रुकवाया काफिला, घायल चालक को पायलट गाड़ी से भिजवाया अस्पताल • शिक्षा, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से देश एवं प्रदेश के विकास में अपना अहम योगदान दें युवा : राज्यपाल घोष • Happening Haryana 2.0: नायब सैनी का मिशन—हरियाणा के हर क्षेत्र में उद्योग, हर हाथ को काम और युवाओं को उद्यमी बनने का अवसर • आंदोलन और कानून के सहारे जेजेपी बचाएगी सीडीएलयू की बेशकीमती जमीन - दिग्विजय चौटाला • मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की घोषणाएं, भुंतर में खुलेगा विद्युत सब-डिवीजन; सीवरेज के लिए 22 करोड़ रुपये मंजूर • कुल्लू दशहरा के भव्य समापन पर सीएम सुक्खू का बड़ा ऐलान, देवी-देवताओं के मानदेय में की बढ़ोतरी • घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में शामिल करवाना चाहती है कांग्रेस? अपना रुख स्पष्ट करे : बिंदल • पंजाब राज्य सूचना आयोग ने राज्यपाल को भेंट की ‘आरटीआई एंड गुड गवर्नेंस’ पुस्तक

मनोरंजन

दीना पाठक ने 60 साल तक अपने अभिनय से जीता दिल, थिएटर से लेकर फिल्मों तक छोड़ी अमिट छाप

Updated on Saturday, October 10, 2026 19:14 PM IST

नई दिल्ली(एजेंसी) : हिंदी सिनेमा में जब भी यादगार मां और दादी के किरदारों की बात होती है, तो अभिनेत्री दीना पाठक का चेहरा आंखों के सामने आ जाता है। सफेद बाल, सहज अंदाज और संवाद बोलने का अनोखा तरीका उनकी पहचान बन गया था। दीना पाठक की पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। 11 अक्टूबर को उनकी पुण्यतिथि पर आइए, उनके जीवन और शानदार अभिनय सफर से जुड़ी कुछ खास बातें जानते हैं।

दीना पाठक की बचपन से ही अभिनय और कला में रुचि थी। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और अभिनय का प्रशिक्षण राशीकला पारेख से लिया। इसके अलावा, उन्होंने शांति वर्धन से नृत्य की शिक्षा भी प्राप्त की।

दीना बेहद कम उम्र में इंडियन नेशनल थिएटर से जुड़ गई थीं। गुजराती थिएटर में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। वह भवई थिएटर से भी जुड़ी रहीं, जो गुजरात की पारंपरिक लोकनाट्य शैली है। अपने अभिनय के माध्यम से उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लोगों को जागरूक करने में भी भूमिका निभाई।

दीना पाठक का जीवन केवल कला तक सीमित नहीं था। जब वह कॉलेज में पढ़ रही थीं, तब उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया। इसके कारण उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे कॉलेज में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई पूरी की। उनकी जिंदगी संघर्ष, आत्मविश्वास और अपने सिद्धांतों पर कायम रहने की मिसाल रही।

दीना पाठक महिला सशक्तीकरण के लिए भी सक्रिय थीं। वह नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेन की अध्यक्ष रहीं और सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करती रहीं।

दीना पाठक की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1940 के दशक में उनके नाटकों को देखने के लिए दर्शक बड़ी संख्या में थिएटर पहुंचते थे। साल 1957 में उन्होंने राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के सामने प्रस्तुति दी। इस उपलब्धि ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई और गुजराती रंगमंच के लिए भी यह एक उल्लेखनीय क्षण था।

दीना पाठक ने 1948 में गुजराती फिल्म 'करियावर' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बावजूद उन्होंने थिएटर से अपना रिश्ता कभी नहीं तोड़ा। 1960 के दशक में उन्होंने 'सत्यकाम', 'सात हिंदुस्तानी' और 'द गुरु' जैसी फिल्मों में काम किया।

इसके बाद वह 'मौसम', 'किनारा', 'किताब', 'चितचोर', 'घरौंदा' और 'भूमिका' जैसी फिल्मों में नजर आईं। अपनी सहज अदाकारी के कारण वह हर किरदार में जान डाल देती थीं। आगे चलकर उन्होंने मां और दादी की भूमिकाओं में भी खूब लोकप्रियता हासिल की। उनके अभिनय में बनावटीपन नहीं बल्कि जिंदगी की सच्चाई झलकती थी।

दीना पाठक ने अपने लगभग छह दशक लंबे करियर में 120 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन्होंने तीन अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। लोकप्रिय टेलीविजन शो 'मालगुडी डेज' में भी वह नजर आईं। उनकी अंतिम फिल्मों में 'पिंजर' का नाम शामिल है।

दीना पाठक की दो बेटियां रत्ना पाठक शाह और सुप्रिया पाठक हैं। दोनों ने अपनी मां की तरह अभिनय की दुनिया में कदम रखा और अपनी प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाई। इस तरह दीना की कला और अभिनय की विरासत अगली पीढ़ी तक पहुंची।

फिल्मों में दशकों तक काम करने और लोकप्रियता हासिल करने के बावजूद दीना पाठक सादा जीवन जीना पसंद करती थीं। उन्होंने अपनी निजी जिंदगी में दिखावे से दूरी बनाए रखी। उनका जीवन इस बात का उदाहरण था कि असली पहचान धन-दौलत से नहीं बल्कि प्रतिभा, विचारों और कर्मों से बनती है।

दीना पाठक ने गुजराती रंगमंच से लेकर हिंदी सिनेमा तक अपनी प्रतिभा की अमिट छाप छोड़ी। उनके किरदार आज भी दर्शकों को याद आते हैं। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना भारतीय सिनेमा, रंगमंच और महिला सशक्तीकरण में उनके योगदान को सम्मान देने जैसा है।

 

Have something to say? Post your comment
दलेर मेहंदी के शो पर मंत्री की नाराजगी को लेकर मीका सिंह का तंज, बोले- 'ऑडियंस तो खुश थी'

: दलेर मेहंदी के शो पर मंत्री की नाराजगी को लेकर मीका सिंह का तंज, बोले- 'ऑडियंस तो खुश थी'

रवि किशन की नई फिल्म 'मेरा यार बजरंगी' का ऐलान, अगले साल दीपावली पर सिनेमाघरों में देगी दस्तक

: रवि किशन की नई फिल्म 'मेरा यार बजरंगी' का ऐलान, अगले साल दीपावली पर सिनेमाघरों में देगी दस्तक

तिरुमला के श्रीवारी मंदिर पहुंचीं भूमि पेडनेकर, परिवार के साथ किए भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन

: तिरुमला के श्रीवारी मंदिर पहुंचीं भूमि पेडनेकर, परिवार के साथ किए भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन

'सीआईडी' और 'आहट' के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का निधन, अशोक पंडित ने जताया दुख

: 'सीआईडी' और 'आहट' के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का निधन, अशोक पंडित ने जताया दुख

मिहिर आहूजा के लिए क्यों खास है 'दिलवाली दिवाली'? एक्टर बोले-'खुद का नया पहलू खोजने का मिला मौका'

: मिहिर आहूजा के लिए क्यों खास है 'दिलवाली दिवाली'? एक्टर बोले-'खुद का नया पहलू खोजने का मिला मौका'

'पता नहीं कहां भीख मांगेंगे', दीपिका सिंह से शादी के बाद बदली रोहित राज गोयल के परिवार की जिंदगी

: 'पता नहीं कहां भीख मांगेंगे', दीपिका सिंह से शादी के बाद बदली रोहित राज गोयल के परिवार की जिंदगी

'मैं भी अपनी शर्तों पर जीती हूं', 'दिल पड़ोसी' में दीया का किरदार निभाने पर बोलीं न्यारा एम बनर्जी

: 'मैं भी अपनी शर्तों पर जीती हूं', 'दिल पड़ोसी' में दीया का किरदार निभाने पर बोलीं न्यारा एम बनर्जी

सदाबहार गानों के साथ पुराने दौर में लौटेंगे दर्शक, अभिजीत सावंत ला रहे नया म्यूजिकल कॉन्सेप्ट

: सदाबहार गानों के साथ पुराने दौर में लौटेंगे दर्शक, अभिजीत सावंत ला रहे नया म्यूजिकल कॉन्सेप्ट

'पहले डर लगा कि क्या हम इस लायक हैं?', सीता-राम की भूमिका पर साई पल्लवी और रणबीर कपूर की प्रतिक्रिया

: 'पहले डर लगा कि क्या हम इस लायक हैं?', सीता-राम की भूमिका पर साई पल्लवी और रणबीर कपूर की प्रतिक्रिया

बर्थडे स्पेशल : रवीना टंडन ने 21 साल की उम्र में उठाई दो बच्चियों की जिम्मेदारी

: बर्थडे स्पेशल : रवीना टंडन ने 21 साल की उम्र में उठाई दो बच्चियों की जिम्मेदारी

X