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‘चिप से लेकर जहाजों तक’, राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम को बताया देश की जरूरत

Updated on Sunday, September 27, 2026 16:36 PM IST

नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत को घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत और महत्वपूर्ण तकनीकों पर अधिक नियंत्रण हासिल करना होगा, जिससे तेजी से जटिल होते वैश्विक सुरक्षा माहौल में रणनीतिक स्वायत्तता हासिल की जा सके।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि देश का दृष्टिकोण एक सरल सोच से निर्देशित है। भारत में जो भी चीज बनाई जा सकती है, उसका देश में ही उत्पादन किया जाए और आयात पर निर्भरता कम की जाए।

उन्होंने कहा, “चिप से लेकर जहाजों तक, स्क्रू से लेकर पूरी हथियार प्रणालियों तक, यही भारत को रणनीतिक स्वायत्तता की ओर ले जाएगा।”

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी डिजाइन, नवाचार और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने को आवश्यक बताया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा आपूर्ति श्रृंखला के महत्वपूर्ण घटकों का निर्माण और उन पर नियंत्रण रखने की भारत की क्षमता राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उनके अनुसार, दीर्घकालिक रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में महारत हासिल करना और पूरे विनिर्माण इकोसिस्टम में अधिक आत्मनिर्भरता जरूरी होगी।

हाल के नीतिगत कदमों का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि सरकार ने घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने के लिए संरचनात्मक और परिवर्तनकारी सुधार किए हैं, जिससे पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण गति मिली है।

उन्होंने कहा, “हम केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं; हम आत्मनिर्भर हैं और भविष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहे हैं।”

दूरसंचार क्षेत्र में 2जी से 5जी तकनीक तक के विकास की तुलना करते हुए सिंह ने कहा कि युद्ध भी पांचवीं पीढ़ी के चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां उन्नत तकनीक सैन्य क्षमताओं और युद्ध के परिणामों को तेजी से प्रभावित करेगी।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियां और साइबर सुरक्षा आधुनिक युद्ध का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही हैं।

सिंह ने कहा कि भारत स्वदेशी क्वांटम तकनीकों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है और साथ ही उभरते रक्षा नवाचारों को समर्थन देने के लिए जरूरी नीतिगत ढांचे को भी मजबूत कर रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत संपर्क आधारित और गैर-संपर्क युद्ध के साथ-साथ काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक सैन्य अभियानों के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ा रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों में भी विविधता लाई जा रही है।

सिंह के अनुसार, भविष्य के युद्धक्षेत्र कई क्षेत्रों तक फैले होंगे और उनमें तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जो देश अत्याधुनिक तकनीकों में बढ़त हासिल करेंगे, वे बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और आधुनिक संघर्षों में अपनी बढ़त बनाए रखने की बेहतर स्थिति में होंगे।

रक्षा मंत्री ने तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाने में भारत के युवाओं की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि युवा भारतीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा समाधान और स्वायत्त प्रणालियों पर काम कर रहे हैं और देश की भविष्य की रक्षा तैयारियों में योगदान दे रहे हैं।

सिंह ने कहा, “भारत के युवा अब केवल भविष्य की नौकरियों की तैयारी नहीं कर रहे हैं। वे भारत के भविष्य के युद्धों के लिए तकनीक तैयार कर रहे हैं।”

 

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