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अजीत डोभाल ने सुनाया चीन से जुड़े मिशन का किस्सा, बोले- ‘जानें आप कहां हैं, कहां जाना है और रास्ता क्या है’

Updated on Saturday, September 19, 2026 15:46 PM IST

रुड़की : आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने शुरुआती करियर का एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह 20 की उम्र में एक युवा आईपीएस अधिकारी थे और सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब एक खुफिया मिशन के दौरान उनके सामने ऐसी स्थिति आई, जिसने उन्हें अपने करियर को लेकर गंभीर चिंता में डाल दिया था। आईआईटी रुड़की का 2026 दीक्षांत समारोह 19 और 20 सितंबर को आयोजित हो रहा है। पहले दिन अंडरग्रेजुएट छात्रों को डिग्रियां प्रदान की जा रही हैं और डोभाल मुख्य अतिथि हैं। डोभाल ने बताया कि उस समय उनकी जिम्मेदारियों में सीमा क्षेत्रों पर नजर रखना और चीनी सेना यानी PLA की गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाना भी शामिल था। एक बार उनकी टीम के कुछ लोग सीमा क्षेत्र में एक इंटेलिजेंस मिशन पर गए थे। उन्हें करीब आठ दिन बाद लौटना था, लेकिन कई दिन बीतने के बावजूद उनकी कोई खबर नहीं मिली।


कई दिनों तक नहीं मिली टीम की खबर
डोभाल के मुताबिक, पहले पांच दिन बीते, फिर दस और उसके बाद करीब 15 दिन हो गए। किसी तरह की हिमस्खलन की सूचना भी नहीं थी। ऐसे में उन्हें चिंता होने लगी कि आखिर टीम के सदस्यों के साथ क्या हुआ।
इसी दौरान उन्हें मुख्यालय से फोन आया। उनके वरिष्ठ अधिकारी ने पूछा कि क्या उन्होंने कुछ लोगों को सीमा पार भेजा था। डोभाल ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि टीम जल्द लौट आएगी, लेकिन तभी उन्हें जानकारी दी गई कि वे लोग चीनी हिरासत में हैं।
उन्होंने बताया कि चीनी पक्ष ने उन लोगों को पकड़ा और उनसे पूछताछ की। बाद में बातचीत या किसी समझौते के बाद उन्हें वापस लौटा दिया गया। डोभाल के अनुसार, जब वे वापस आए तो उनकी हालत काफी खराब थी।


डोभाल को लगा खत्म हो जाएगा करियर
इस घटना के बाद मामले की जांच शुरू हुई। डोभाल ने बताया कि उस समय उन्हें लगा कि शायद उनका करियर खत्म हो गया है। वह अभी 20 की उम्र में थे और उन्हें लगा कि उन्हें अब नए सिरे से अपना करियर शुरू करना पड़ेगा।
हालांकि, जांच पूरी होने के बाद उन्हें जिम्मेदार नहीं पाया गया। उनके मुताबिक, मुख्यालय से उपलब्ध कराए गए नक्शों और स्केच में कुछ खामियां और गलतियां थीं, जिसकी वजह से यह स्थिति पैदा हुई थी।


एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने दी बड़ी सीख
डोभाल ने बताया कि इस घटना के बाद वह काफी निराश थे। इसी दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो में उनके साथ काम करने वाले एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने उनसे उनकी परेशानी के बारे में पूछा।
डोभाल ने जब उन्हें बताया कि वह बड़े उत्साह और उम्मीद के साथ करियर में आए थे, लेकिन सब कुछ गलत होता नजर आ रहा है, तो शेरपा ने उन्हें समझाया कि यह सब मैप रीडिंग का मामला है।
उन्होंने जिंदगी को नक्शे से जोड़ते हुए डोभाल को तीन बातें बताईं—पहली, यह जानो कि तुम कहां हो। दूसरी, यह जानो कि तुम्हें कहां जाना है। और तीसरी, वहां पहुंचने का रास्ता क्या है।


‘जिंदगी में दिशा का पता होना जरूरी’
डोभाल ने बताया कि बर्फ से ढके पहाड़ों में वर्षों तक काम कर चुके उस शेरपा की यह बात उनके लिए एक महत्वपूर्ण सीख बन गई। उनके अनुसार, जिंदगी में भी परिस्थितियां बदल सकती हैं और रास्ते में मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन व्यक्ति को अपनी मौजूदा स्थिति, अपने लक्ष्य और वहां तक पहुंचने के रास्ते की समझ होनी चाहिए।
आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में इस वर्ष कुल 2,701 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की जा रही हैं। संस्थान के अनुसार, 19 सितंबर को आयोजित पहले दिन के कार्यक्रम में डोभाल मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।

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