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राष्ट्रीय

पोखरण में पहले भारतीय वायु सेना ड्रोनाथॉन-2026 का शुभारंभ, 20 से अधिक कंपनियां ले रहीं हिस्सा

Updated on Tuesday, September 15, 2026 14:33 PM IST

वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने सोमवार को जैसलमेर स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में पहले भारतीय वायु सेना ड्रोनाथॉन-2026 का शुभारंभ किया। 14 से 16 सितंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में 20 से अधिक प्रमुख रक्षा कंपनियां, स्टार्ट-अप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और नवोन्मेषक हिस्सा ले रहे हैं। इसका उद्देश्य भारतीय उद्योग से सीधे जुड़ना और वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में मानवरहित हवाई प्रणालियों तथा उभरती तकनीकों की क्षमताओं का परीक्षण करना है।

सेना और बीएसएफ के प्रतिनिधि भी हुए शामिल

उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्रालय और एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। ड्रोनाथॉन-2026 को भारतीय वायु सेना की मानवरहित हवाई प्रणालियों के क्षेत्र में उद्योग के साथ सहयोग बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

मानव-संचालित विमानन के पूरक के रूप में मानवरहित प्रणालियां

भारतीय वायु सेना मानवरहित प्रणालियों को मानव-संचालित विमानन के लिए महत्वपूर्ण पूरक मानती है। इन प्रणालियों के जरिए हवाई अभियानों की पहुंच, निरंतरता, कार्रवाई क्षमता और परिचालन लचीलेपन को बढ़ाने के लिए कमांडरों को अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होंगे। ड्रोनाथॉन में भाग लेने वाली कंपनियां पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में अपनी मानवरहित विमान प्रणालियों और उनसे जुड़ी तकनीकों का प्रदर्शन कर रही हैं।

निगरानी से स्वार्म टेक्नोलॉजी तक क्षमताओं का प्रदर्शन

कार्यक्रम में निगरानी और टोह लेने, स्वायत्त संचालन, स्वार्म टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और मानवरहित विमान-रोधी प्रणालियों जैसी विभिन्न परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन किया जा रहा है। इन प्रणालियों की चुनौतीपूर्ण वास्तविक परिस्थितियों में विश्वसनीयता और प्रभावशीलता परखी जा रही है, साथ ही बदलती परिचालन आवश्यकताओं और उभरते खतरों के अनुरूप उनकी अनुकूलन क्षमता का भी परीक्षण किया जा रहा है।

भारतीय वायु सेना का मानवरहित वायु प्रणालियों का रोडमैप जारी

वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कार्यक्रम के दौरान ‘भारतीय वायु सेना मानवरहित वायु प्रणालियों का रोडमैप’ भी जारी किया। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को भविष्य की क्षमताओं से जुड़ी प्राथमिकताओं की दिशा मिलेगी। इसका उद्देश्य विशिष्ट नवाचारों को बढ़ावा देना तथा उद्योग, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान संगठनों को भारतीय वायु सेना की भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अपनी क्षमताएं विकसित करने में मदद करना है।

‘वायु उत्तम’ ने पोखरण में दिखाई अहम क्षमता

ड्रोनाथॉन-2026 के पहले दिन भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी रूप से विकसित बहु-आयामी मानवरहित हवाई यातायात प्रबंधन प्रणाली (यूटीएम) ‘वायु उत्तम’ की महत्वपूर्ण क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। वास्तविक समय के प्रदर्शन में प्रणाली ने सैन्य और असैन्य दोनों तरह की मानवरहित विमान प्रणालियों का पता लगाने और उनकी निगरानी करने की क्षमता दिखाई। यह भीड़भाड़ वाले हवाई क्षेत्र में ड्रोन संचालन के समन्वित प्रबंधन के साथ-साथ अनधिकृत या खतरनाक ड्रोन की समय रहते पहचान और उनसे निपटने में मदद करेगी।

हवाई क्षेत्र की सुरक्षा से जनसुरक्षा तक उपयोग

मानवरहित विमान प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए ‘वायु उत्तम’ का उपयोग केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इसे हवाई क्षेत्र की सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, नागर विमानन और जनसुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

पूरे मानवरहित पारिस्थितिकी तंत्र पर फोकस

ड्रोनाथॉन-2026 मानवरहित हवाई प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रति भारतीय वायु सेना की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। इसमें केवल विमान ढांचे के विकास पर नहीं, बल्कि प्रोपल्शन प्रणाली, सेंसर और पेलोड, संचार प्रणाली, स्वायत्तता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, प्रतिरोधी उपाय और हवाई क्षेत्र प्रबंधन सहित पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की क्षमताओं को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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