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महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में आगे नहीं बढ़ सकता: लोकसभा अध्यक्ष

Updated on Tuesday, September 08, 2026 15:39 PM IST

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व की पैरवी पुरजोर तरीके से की है। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान ऐतिहासिक आवश्यकता है। विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और पेशों में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से वो दिन दूर नहीं जब 50 प्रतिशत नेतृत्व महिलाओ के हिस्से होगा। आधी आबादी की आने वाले वर्षों में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं की एक नई पीढ़ी उभरकर सामने आएगी।

बिरला ने सोमवार को फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा आयोजित “लिंग-उत्तरदायी शासन” विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए ये बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि अब ध्यान केवल सहायता और अवसर प्रदान करने से हटकर महिलाओं को नीतियों, कार्यक्रमों और कानूनों को सक्रिय रूप से आकार देने में सक्षम बनाने पर होना चाहिए। महिलाओं को स्वयं उन कानूनों को तय करने में भाग लेना चाहिए जो उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं का समाधान कर सकें। उन्होंने समानता के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता और महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण व आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए विभिन्न विधायी उपायों का जिक्र किया। बिरला ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय महिला आयोग जैसी संस्थाओं की उभरती चुनौतियों की पहचान करने और समाधान सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। महिला विधायक—लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, पंचायतों और नगर पालिकाओं के माध्यम से—महिलाओं के मुद्दों को उचित मंचों तक पहुंचाने और यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं कि कानून जमीनी वास्तविकताओं के अनुकूल हों।

इस बात पर भी जोर दिया कि देश की लगभग आधी आबादी वाली महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि हर महिला के पास रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण के अवसर होने चाहिए। उन्होंने महिलाओं से ऐसी प्रभावी नीतियों, योजनाओं और विधायी उपायों पर विचार-विमर्श करने का आह्वान किया जो अभाव और कठिनाइयों का सामना कर रही महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत कर सकें।

लोकसभा अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि इस कार्यशाला में प्रतिभागी विधायक अपने अपने क्षेत्र के अनुभवों और सफल पहलों को साझा करें , ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को देश भर में अपनाया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं में उन कानूनों और संस्थागत तंत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया जो उनकी चिंताओं के समाधान के लिए उपलब्ध हैं।

यह उल्लेख करते हुए कि महिलाएं हमेशा से भारत के परिवर्तन के मोर्चे पर आगे रही हैं—स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र-निर्माण से लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने तक बिरला ने रेखांकित किया कि यह कार्यक्रम महिला विधायकों को अपने अनुभवों, विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करने के लिए एक आवश्यक मंच प्रदान करता है, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता मजबूत होती है। विभिन्न राज्यों इन और केंद्र शासित प्रदेशों की महिला विधायकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि वे विधायी मंचों के माध्यम से महिलाओं की आकांक्षाओं को आवाज देने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए अपने कौशल को और धार देने का आग्रह किया।

 

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