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ग्रीन शिपिंग में भारत की बड़ी तैयारी, सोनोवाल ने बंदरगाहों को हरित ईंधन के लिए तेजी से तैयार होने को कहा

Updated on Friday, September 04, 2026 12:35 PM IST

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को गुरुग्राम स्थित ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टेरी) के ग्वाल पहाड़ी परिसर का दौरा कर ग्रीन शिपिंग से जुड़ी विभिन्न पहलों की समीक्षा की और भारत के समुद्री क्षेत्र को कार्बन-मुक्त करने के प्रयासों में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रस्तावित ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर, वैकल्पिक ईंधनों के लिए बंदरगाहों की तैयारियों, ग्रीन बंकरिंग हब और तटवर्ती विद्युत आपूर्ति जैसी पहलों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य कम-कार्बन वाले समुद्री व्यापार में अग्रणी भूमिका निभाना है। उन्होंने कहा कि 2026 में ग्रीन शिपिंग अब केवल विकल्प नहीं रह गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपने समुद्री क्षेत्र को कार्बन-मुक्त करने के प्रयासों को और तेज करने के लिए तैयार है।

ग्रीन शिपिंग अब विकल्प नहीं
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि ग्रीन शिपिंग अब कोई विकल्प मात्र नहीं रह गया है, बल्कि पूरी दुनिया इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इसमें अग्रणी भूमिका निभाने का इरादा रखता है। उन्होंने कहा कि हमारे बंदरगाहों को भविष्य के ईंधनों के लिए तैयार होना चाहिए और इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में टेरी जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भागीदार हैं। उन्होंने दौरे के दौरान पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश देते हुए एक पौधा भी लगाया।

ग्रीन शिपिंग के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की भूमिका
दौरे के दौरान सर्बानंद सोनोवाल को ग्रीन पोर्ट्स एंड शिपिंग के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCoEGPS) के कार्यों की जानकारी दी गई। केंद्र ने समुद्री क्षेत्र को कार्बन-मुक्त करने की दिशा में मंत्रालय को सहयोग देने के लिए अपने कार्यादेश, चल रही परियोजनाओं और आगामी योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि अनुसंधान संस्थानों, सरकार और समुद्री उद्योग के बीच मजबूत समन्वय से भारत में स्वच्छ समुद्री परिवहन के लिए जरूरी तकनीक और अवसंरचना को तेजी से विकसित किया जा सकता है।

शून्य-उत्सर्जन वाले शिपिंग कॉरिडोर पर फोकस
दौरे का प्रमुख केंद्र प्रस्तावित ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर और वैकल्पिक ईंधनों के लिए बंदरगाहों की तैयारियों की समीक्षा रहा। रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (RMI) ने कम और शून्य-उत्सर्जन वाले शिपिंग कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की प्रस्तुति दी। संस्थान ने शिपिंग इकोसिस्टम में स्वच्छ ईंधनों और नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तेजी लाने के प्रयासों की रूपरेखा भी साझा की। यह कम-कार्बन शिपिंग एजेंडे का प्रमुख आधार है, जिसे सर्बानंद सोनोवाल मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद से आगे बढ़ाने पर जोर देते रहे हैं।

तीन प्रमुख बंदरगाहों में ग्रीन बंकरिंग हब की तैयारी
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी, पारादीप पोर्ट अथॉरिटी और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी ने हरित ईंधन बंकरिंग हब से संबंधित अपनी प्रगति की जानकारी दी। इन बंदरगाहों ने वैकल्पिक और हरित समुद्री ईंधनों के लिए अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदमों के बारे में बताया। ग्रीन बंकरिंग हब विकसित होने से भविष्य में स्वच्छ ईंधनों से संचालित जहाजों को आवश्यक ईंधन उपलब्ध कराने के लिए भारत के प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता मजबूत होगी।

तटवर्ती विद्युत आपूर्ति से घटेगा उत्सर्जन

कामराजार पोर्ट लिमिटेड ने बताया कि उसके कोयला टर्मिनल अब तटवर्ती विद्युत आपूर्ति सुविधाओं से सुसज्जित हैं। इस व्यवस्था के तहत बंदरगाह पर खड़े जहाज अपने ऑनबोर्ड इंजनों को चलाने के बजाय तट से बिजली प्राप्त कर सकते हैं। इससे जहाजों के इंजन चलने से होने वाले ईंधन खपत और उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलेगी। इसे बंदरगाहों को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्वच्छ और भविष्य के लिए तैयार समुद्री क्षेत्र का लक्ष्य
सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि कोयला टर्मिनलों पर तटवर्ती विद्युत आपूर्ति से लेकर हरित ईंधनों के लिए बंकरिंग हब तक, जिन पहलों की आज समीक्षा की गई, वे भारत को अधिक स्वच्छ, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार समुद्री क्षेत्र की दिशा में आगे ले जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरे समुद्री पारितंत्र का सामूहिक प्रयास है। बंदरगाहों, अनुसंधान साझेदारों और उद्योग के एक साथ मिलकर काम करने से भारत ग्रीन शिपिंग में वैश्विक बदलाव लाने वाले अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है।

सरकार, बंदरगाह और उद्योग के समन्वय पर जोर
इन सभी पहलों में हरित ईंधन अवसंरचना, बंकरिंग की तैयारी, तटवर्ती विद्युत आपूर्ति और बंदरगाहों को कार्बन-मुक्त करने के प्रयास शामिल हैं। ये पहल भारत के समुद्री क्षेत्र में सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार, बंदरगाहों, अनुसंधान संस्थानों और ज्ञान साझेदारों के बीच समन्वय की भूमिका को रेखांकित करती हैं। मंत्रालय का जोर ऐसी समुद्री अवसंरचना तैयार करने पर है, जो भविष्य में कम और शून्य-उत्सर्जन वाले ईंधनों के बढ़ते इस्तेमाल की जरूरतों को पूरा कर सके।

ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर को तेजी देने की तैयारी
यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय भारतीय बंदरगाहों पर ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर और बंकरिंग क्षमता विकसित करने के प्रयासों को तेज कर रहा है। ये प्रयास देश के समुद्री क्षेत्र को वैश्विक कार्बन-मुक्ति की समय-सीमाओं के अनुरूप तैयार करने के व्यापक अभियान का हिस्सा हैं। सर्बानंद सोनोवाल ने ग्रीन शिपिंग को भारत की प्रमुख समुद्री शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा के लिए केंद्रीय बताया है और टेरी परिसर में हुई समीक्षा इस एजेंडे को बंदरगाह स्तर पर लागू करने पर मंत्रालय के निरंतर फोकस को दर्शाती है।

हितधारकों के साथ संवाद
कार्यक्रम का समापन मंत्री, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और भाग लेने वाले बंदरगाहों तथा संस्थानों के हितधारकों के बीच दोपहर के भोजन के दौरान हुए संवाद सत्र के साथ हुआ। इस दौरान समुद्री क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल, वैकल्पिक ईंधनों की उपलब्धता, बंदरगाहों की तैयारियों और भविष्य के ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। सरकार का लक्ष्य इन प्रयासों के जरिए भारत के समुद्री क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर बदलती पर्यावरणीय और कार्बन-मुक्ति की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

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