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स्वास्थ्य

एम्स के अध्ययन में चौंकाने वाले आंकड़े: 38.6% वयस्क और 35.4% बच्चे फैटी लिवर से प्रभावित

Updated on Wednesday, September 02, 2026 13:46 PM IST

बदलती जीवनशैली, खराब खानपान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन ने देश में लिवर और पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों को गंभीर चुनौती बना दिया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के एक अध्ययन में देश के 38.6 प्रतिशत वयस्क और 35.4 प्रतिशत बच्चे फैटी लिवर से प्रभावित पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अस्वस्थ खानपान इस समस्या के प्रमुख कारण हैं।

एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि फास्ट फूड, अत्यधिक चीनी, डिब्बाबंद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन के साथ शारीरिक गतिविधियों में कमी ने पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों का बोझ बढ़ा दिया है। खराब जीवनशैली का असर केवल लिवर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंतों के स्वास्थ्य और कैंसर के जोखिम को भी प्रभावित कर रहा है।

मधुमेह रोगियों में फाइब्रोसिस का खतरा
अध्ययन में मधुमेह से पीड़ित करीब एक चौथाई लोगों के लिवर में फाइब्रोसिस भी पाया गया। फाइब्रोसिस ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर के ऊतकों में लगातार क्षति के कारण निशान बनने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पहचान और जीवनशैली में सुधार न होने पर यह स्थिति गंभीर लिवर रोग का रूप ले सकती है।

एम्स के गैस्ट्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. गोविंद मखारिया के अनुसार, पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं अब काफी आम हो गई हैं। पेट फूलना, डकार आना, अपच और डायरिया जैसी शिकायतों के पीछे खानपान और जीवनशैली की महत्वपूर्ण भूमिका है।

विशेषज्ञों के मुताबिक देश में हर तीसरे व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार की गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

प्रसंस्कृत भोजन से आंत के कैंसर की चिंता
डिब्बाबंद और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन का बढ़ता चलन भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन न केवल मोटापा और फैटी लिवर जैसी समस्याओं से जुड़ा है, बल्कि बड़ी आंत के कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार बड़ी आंत में बनने वाले पॉलिप कुछ मामलों में आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं। हालांकि समय रहते उनकी पहचान कर उन्हें हटाने से कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि शौच में खून आना, लगातार पेट संबंधी परेशानी, बिना कारण वजन कम होना या लंबे समय तक मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों ने उल्टी में खून आना, शौच में खून आना और खाना निगलने में परेशानी जैसे लक्षणों को गंभीर बीमारी का संकेत बताया है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

स्वस्थ पेट और लिवर के लिए क्या करें ?
डॉक्टरों के अनुसार पाचन तंत्र और लिवर को स्वस्थ रखने के लिए खानपान और जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। इसके लिए—

स्वच्छ और संतुलित भोजन का सेवन करें।
साफ और सुरक्षित पानी पिएं।
भोजन जरूरत के अनुसार करें और अधिक खाने से बचें।
फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें।
नियमित रूप से दही जैसे प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों का सेवन करें
चीनी, फास्ट फूड और प्रसंस्कृत भोजन का सेवन कम करें।
शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
रोजाना नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम करें।
भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं।

विशेषज्ञों का कहना है कि फैटी लिवर और पाचन तंत्र से जुड़ी कई समस्याओं को शुरुआती चरण में जीवनशैली में सुधार के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर जांच को स्वस्थ लिवर और बेहतर पाचन के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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