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राष्ट्रीय

CM फडणवीस ने तुकाराम मुंढे के फैसले पर लगाई रोक, खुले में बिकेगा खाद्य तेल

Updated on Wednesday, September 02, 2026 09:27 AM IST

महाराष्ट्र में खुले यानी अनपैक्ड खाद्य तेल की बिक्री पर तत्काल कार्रवाई अब एक साल तक नहीं होगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे के उस फैसले को एक साल के लिए स्थगित कर दिया है, जिसमें खुले और बिना सत्यापन वाले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था।

हालांकि, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि एक साल की यह मोहलत खत्म होने के बाद दोबारा कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा। इस दौरान कारोबारियों को मौजूदा कानून के मुताबिक अपने कारोबार के तौर-तरीकों में जरूरी बदलाव करने होंगे।

क्यों लगाई गई थी खुले तेल की बिक्री पर रोक?
महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने खाद्य सुरक्षा को लेकर अभियान तेज करते हुए खुले और बिना पैकिंग वाले खाद्य तेल को निशाने पर लिया था। FDA का कहना था कि खुले तेल में मिलावट की आशंका अधिक रहती है और इसकी गुणवत्ता तथा स्रोत का सत्यापन करना मुश्किल होता है।

मुंढे इससे पहले भी होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में अस्वच्छ परिस्थितियों तथा एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं। खुले और मिलावटी खाद्य तेल के खिलाफ कार्रवाई को इसी अभियान का अगला कदम माना गया था।

FDA के मुताबिक, खाद्य तेल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई थीं। अगस्त में जारी आदेश में खाद्य तेल के नमूनों में मानकों के उल्लंघन और मिलावट से जुड़ी समस्याओं का हवाला दिया गया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में राज्य में जांचे गए 1,247 खाद्य तेल नमूनों में 77 नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, 13 असुरक्षित और 15 गलत ब्रांडिंग वाले थे।

व्यापारियों ने क्यों किया विरोध?
FDA के फैसले के बाद खुले खाद्य तेल का कारोबार करने वाले व्यापारियों और इससे जुड़े संगठनों ने इसका विरोध किया। तेली समुदाय ने सरकार के सामने कहा कि खुले तेल की बिक्री उनके लिए पारंपरिक कारोबार का हिस्सा है। उनका तर्क था कि अचानक प्रतिबंध लगाने से छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित होगी।

इसके अलावा, Edible Oil Federation के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखीं। व्यापारियों की ओर से यह मुद्दा भी उठाया गया कि बड़ी संख्या में कम आय वाले उपभोक्ता खुले तेल पर निर्भर हैं, क्योंकि यह उन्हें अपेक्षाकृत कम मात्रा में और उनकी जरूरत के मुताबिक खरीदने का विकल्प देता है।

फडणवीस सरकार ने निकाला ‘मिडिल पाथ’
व्यापारियों के विरोध के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लागू करने के बजाय कुछ समय देने का फैसला किया है। सरकार के मुताबिक, अगले एक साल तक FDA और खाद्य तेल कारोबारियों के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति बनाई जाएगी। यह समिति खुले तेल के कारोबार को मौजूदा खाद्य सुरक्षा कानूनों के अनुरूप बनाने के लिए जरूरी बदलावों और दिशानिर्देशों पर काम करेगी।

इसका मतलब यह है कि सरकार ने खुले तेल में मिलावट या खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया है, बल्कि तत्काल प्रतिबंध के बजाय कारोबारियों को नियमों के अनुरूप ढलने के लिए समय दिया है।

एक साल बाद क्या होगा?
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि यह राहत स्थायी नहीं है। एक साल पूरा होने के बाद खुले खाद्य तेल की बिक्री से जुड़े नियमों का पालन अनिवार्य होगा और इसके बाद किसी और विस्तार की अनुमति नहीं दी जाएगी। कारोबारियों को इसी एक साल के भीतर अपने कारोबारी मॉडल में आवश्यक बदलाव करने होंगे।

सरकार ने खाद्य तेल कारोबारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि इस अवधि में बाजार में मिलावटी या घटिया गुणवत्ता वाला खाद्य तेल न बिके। यानी फिलहाल बिक्री पर तत्काल कार्रवाई रोक दी गई है, लेकिन खाद्य सुरक्षा से जुड़े कानून और जिम्मेदारियां खत्म नहीं हुई हैं।

विवाद की असली वजह क्या है?
पूरे मामले में सरकार के सामने दो प्रमुख चिंताएं हैं- एक तरफ उपभोक्ताओं की खाद्य सुरक्षा और दूसरी तरफ छोटे एवं पारंपरिक तेल कारोबारियों की आजीविका। FDA का रुख है कि खुले तेल की बिक्री से मिलावट और गुणवत्ता की निगरानी मुश्किल होती है। दूसरी ओर व्यापारियों का कहना है कि अचानक पूरी तरह पैकेज्ड तेल की ओर जाने से छोटे दुकानदारों और पारंपरिक कारोबार पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा तथा कम आय वाले ग्राहकों पर भी असर पड़ सकता है। फडणवीस सरकार ने फिलहाल इन दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। इसलिए तत्काल प्रतिबंध लागू करने के बजाय कारोबारियों को एक साल का समय दिया गया है।

 

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