विवाद तब बढ़ गया जब कांग्रेस ने कहा कि नेहरू की ऐतिहासिक मूर्ति को क्रेन की मदद से उखाड़ दिया गया है और पास के ही एक जंगली इलाके में फेंक दिया गया है। इसके बाद कांग्रेस ने चेतावनी दी थी।
पश्चिम बंगाल के पश्चिमी बर्धमान जिले के दुर्गापुर में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 20 फीट ऊंची मूर्ति को लेकर बीते दिनों बड़ा विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मूर्ति दोबारा लगाने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया था। हालांकि अब खबर है कि स्थानीय पुलिस ने देर रात नेहरू की प्रतिमा को दोबारा उसी जगह स्थापित कर दिया है।
न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक मीडिया की नजरों से बचते हुए और किसी भी तरह के जनआक्रोश को रोकने के लिए इस ऑपरेशन को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया। बता दें कि इससे पहले पंडित नेहरू की इस विशाल मूर्ति को उसकी जगह से हटाए जाने को लेकर कांग्रेस बुरी तरह भड़क गई थी।
क्या है पूरा विवाद?
रिपोर्ट्स के मुताबिक पंडित जवाहरलाल नेहरू की यह विशाल मूर्ति 1980 के दशक की शुरुआत में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की जमीन पर स्थापित की गई थी। मूर्ति फिलहाल एक मेडिटेशन सेंटर को लीज पर दी गई स्कूल परिसर के पास स्थित है। बंगाल में विवाद तब बढ़ गया जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस सप्ताह आरोप लगाए कि इस ऐतिहासिक प्रतिमा को क्रेन से उखाड़ दिया गया है और पास के ही एक जंगली इलाके में लावारिस फेंक दिया गया है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक स्थानीय कार्यक्रम के लिए जगह बनाने की नीयत से इस मूर्ति को हटाया गया था। कांग्रेस नेताओं ने तुरंत 24 घंटे के भीतर मूर्ति को सम्मानपूर्वक वापस स्थापित करने की चेतावनी दी थी। कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया कि मूर्ति को जानबूझकर हटाया गया है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसमें पार्टी की कोई भूमिका नहीं है और यह मामला स्थानीय गुटबाजी या आंतरिक राजनीति का नतीजा हो सकता है।
दूध से हुआ ‘शुद्धिकरण’
विवाद बढ़ने के बाद मूर्ति को दोबारा स्थापित कर दिया गया है। प्रशासन द्वारा आधी रात को मूर्ति को फिर से स्थापित किए जाने के बाद, मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर इकट्ठा हुए। कार्यकर्ताओं ने प्रतीक रूप से प्रतिमा को दूध से नहलाकर उसका ‘शुद्धिकरण’ किया और नारेबाजी भी की।