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राष्ट्रीय

‘सूखा-मुक्त भारत’ के लक्ष्य के लिए वाटरशेड विकास को गति दें : शिवराज सिंह चौहान

Updated on Tuesday, September 01, 2026 17:19 PM IST

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक (WDC-PMKSY) की प्रगति की समीक्षा करते हुए राज्यों से परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर स्पष्ट एवं मापनीय परिणाम सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने वाटरशेड विकास को ‘विकसित भारत के लिए सूखा-मुक्त भारत’ के लक्ष्य को साकार करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि खेतों तक पानी पहुंचाना, भूमि की उत्पादकता बढ़ाना और किसानों की आय एवं आजीविका को मजबूत करना है।

1,220 परियोजनाएं स्वीकृत
WDC-PMKSY 2.0 के तहत अब तक 52.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए 1,220 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत 12,404 करोड़ रुपए है, जिसमें 8,134 करोड़ रुपए केंद्रीय हिस्सेदारी है। केंद्रीय हिस्सेदारी में से 6,955.75 करोड़ रुपए यानी 85% राशि जारी की जा चुकी है।

हर बूंद पानी का बेहतर उपयोग हो
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वाटरशेड विकास केवल जल संरचनाएं बनाने का कार्यक्रम नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य खेत में पानी पहुंचाना, भूमि की उत्पादकता बढ़ाना और किसान की आय एवं आजीविका को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर बूंद पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और उसका लाभ किसान तक पहुंचाना है।

1.40 लाख हेक्टेयर में बढ़ी फसल सघनता
केंद्रीय मंत्री ने किसान-केंद्रित परिणामों को वाटरशेड परियोजनाओं की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना बताया। उन्होंने कहा कि वाटरशेड हस्तक्षेपों के परिणामस्वरूप लगभग 1.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में, जहां पहले एक फसल लेना भी मुश्किल था, किसान अब दो और कई स्थानों पर तीन फसलें ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि बागवानी, सब्जी उत्पादन और उच्च मूल्य वाली फसलों का भी विस्तार हुआ है। इससे किसानों की आय और जीवन स्तर में सुधार आया है। चौहान ने कहा कि किसानों के जीवन में आया यह बदलाव ही योजनाओं की वास्तविक सफलता है।

1.24 लाख जल संरचनाओं का निर्माण
कार्यक्रम के तहत अब तक 1.24 लाख जल संचयन संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया है। इनमें चेक डैम, नाला बंध, परकोलेशन टैंक, गांव और खेत तालाब, मेड़बंदी, ट्रेंच, जलाशय तथा अन्य वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण संरचनाएं शामिल हैं। इन संरचनाओं के जरिए वर्षा जल को स्थानीय स्तर पर रोकने, उसका संचयन करने और भूजल का पुनर्भरण करने में मदद मिल रही है। इससे कृषि के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिली है।

3.08 लाख हेक्टेयर में सुरक्षात्मक सिंचाई
वाटरशेड विकास के प्रयासों के परिणामस्वरूप 3.08 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सुरक्षात्मक सिंचाई उपलब्ध हुई है। इससे वर्षा आधारित क्षेत्रों के किसानों को कम बारिश या सूखे की स्थिति में फसलों को बचाने में मदद मिल रही है। कार्यक्रम से अब तक 28.50 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। इसके अलावा 1.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वनीकरण, बागवानी और पौधरोपण किया गया है। कार्यक्रम के तहत 2.85 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ है।

खर्च नहीं, परिणाम बने मूल्यांकन का आधार
शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, प्रदर्शन आधारित और जन-केंद्रित तरीके से काम करने का आग्रह किया। उन्होंने परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वाटरशेड परियोजनाओं का मूल्यांकन केवल किए गए व्यय के आधार पर नहीं होना चाहिए। इसके बजाय भूमि सुधार, जल उपलब्धता, सिंचाई, फसल सघनता, भूमि उत्पादकता और किसानों की आजीविका में हुए वास्तविक सुधार को सफलता का आधार बनाया जाना चाहिए।

वाटरशेड विकास को जन-आंदोलन बनाने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘वाटरशेड यात्रा’ और ‘वाटरशेड महोत्सव’ के माध्यम से वाटरशेड विकास को जन-आंदोलन का रूप देने का प्रयास किया गया है। अब इसे केवल एक सरकारी योजना के रूप में नहीं, बल्कि जल एवं भूमि सुरक्षा, कृषि सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि के राष्ट्रीय अभियान के रूप में आगे बढ़ाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि तेज क्रियान्वयन, बेहतर परिणाम और अधिक प्रभाव के साथ काम करना ही सरकार का संकल्प होना चाहिए।

अंतिम छोर तक पहुंचे लाभ
समीक्षा बैठक में राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों से समन्वित तरीके से काम करने का आह्वान किया गया। इस दौरान यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि वाटरशेड विकास का लाभ अंतिम छोर तक किसानों और ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे और परियोजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

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