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राष्ट्रीय

पीएम मोदी ने शेयर किया सुभाषित, निःस्वार्थ सेवा और परोपकार का दिया संदेश

Updated on Friday, August 21, 2026 15:10 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने लिखा कि नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए किस प्रकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।

संस्कृत श्लोक के जरिए दिया सेवा का संदेश
प्रधानमंत्री ने पोस्ट में संस्कृत श्लोक, “जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः। इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥” साझा किया। इसका भावार्थ है कि मनुष्य को अपना जीवन सदैव दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। जिस तरह नदियां बिना किसी स्वार्थ के निरंतर बहती हैं और अपने जल से असंख्य प्राणियों का जीवन पोषित करती हैं, उसी तरह मनुष्य को भी अपने जीवन और सामर्थ्य का उपयोग दूसरों के हित में करना चाहिए।

निःस्वार्थ सेवा को बताया जीवन की सार्थकता
सुभाषित के भाव में कहा गया है कि निःस्वार्थ सेवा, परोपकार और लोककल्याण में ही मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता निहित है। प्रधानमंत्री के संदेश में नदियों के प्रवाह को मानव जीवन में सेवा और समर्पण की भावना के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

एक दिन पहले भी साझा किया था सुभाषित
पीएम नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले भी सोशल मीडिया पर एक संस्कृत श्लोक साझा किया था। उन्होंने लिखा था, “आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः। इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना।” इसका भावार्थ है कि स्थिर और दृढ़ बुद्धि वाले ज्ञानीजन संकट और कठिन परिस्थितियों में भी अपना उत्साह नहीं खोते।

बुधवार को परोपकार पर दिया था संदेश
बुधवार को भी प्रधानमंत्री ने सुभाषित साझा करते हुए परोपकार और कल्याणकारी कर्म करने का संदेश दिया था। उन्होंने ‘एक्स’ पर “एतावज्जन्मसाफल्यं देहिनामिह देहिषु। प्राणैरर्थैर्धिया वाचा श्रेय एवाचरेत्सदा॥” श्लोक पोस्ट किया था। इसका अर्थ है कि मनुष्य के जन्म की सार्थकता इसी में है कि वह अपने शारीरिक सामर्थ्य, धन-संपत्ति, बुद्धि और वाणी के माध्यम से सदैव दूसरों के हित और कल्याण के लिए कार्य करे।

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