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राष्ट्रीय

पहले नजरअंदाज किए गए बॉर्डर अब सरकार की टॉप प्रायोरिटी, रिजिजू ने चीनी घुसपैठ के दावों को किया खारिज

Updated on Thursday, August 20, 2026 12:27 PM IST

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि देश की सीमा से सटे इलाके, जिनकी पहले अनदेखी की गई थी, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शीर्ष प्राथमिकता बन गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सीमाई इलाकों में विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

किरेन रिजिजू ने ‘एक्स’ पर अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों माजा, गालेमो और तक्सिंग के दौरे का एक वीडियो भी पोस्ट किया। वीडियो में बुनियादी ढांचे के काम के लिए मशीनें चलती दिखीं। केंद्रीय मंत्री ने सेना के जवानों और स्थानीय लोगों से बातचीत की। वीडियो में दुर्गम और ऊबड़-खाबड़ हिमालयी इलाका भी दिखा जो सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है।

‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए किरेन रिजिजू ने लिखा, “कुछ लोग सीमा को लेकर लापरवाही से टिप्पणी कर देते हैं। सीमाई क्षेत्र मुश्किल हैं, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार सीमा के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मैं अरुणाचल प्रदेश के माजा, गालेमो, तक्सिंग इलाकों में गया ताकि बुनियादी ढांचे के काम तेज किए जा सकें। पहले सीमाओं की अनदेखी हुई थी लेकिन अब यह शीर्ष प्राथमिकता है।”

उन्होंने इंटरव्यू का एक क्लिप भी पोस्ट किया। केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब विपक्षी नेता लगातार आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार चीनी घुसपैठ की जानकारी छिपा रही है और सीमा पर भारतीय क्षेत्र की ठीक से रक्षा नहीं कर रही है। इससे पहले बुधवार को विशेष बातचीत में किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस दावे को खारिज किया जिसमें उन्होंने भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ का आरोप लगाया था। रिजिजू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में उठ रही चिंताओं को भारत-चीन सीमा के लंबे समय से तय न होने के संदर्भ में देखना चाहिए।

उन्होंने कहा, “ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर मुद्दे हैं। इन मुद्दों की जड़ को समझने की जरूरत है। अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की बहुत लंबी सीमा है जिसे औपचारिक रूप से तय नहीं किया गया है। वहां कोई सीमा स्तंभ नहीं हैं और जमीन पर सीमा रेखा साफ नहीं है। यह कोई नई बात नहीं है। जब तिब्बत एक अलग इकाई था, तब भी तिब्बत और भारत के बीच सीमा तय नहीं थी।”रिजिजू ने माना कि सीमा तय न होने के कारण सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता जायज है, लेकिन उन्होंने कहा कि बिना पुष्टि किए वीडियो और दावे शेयर करके जनता को गुमराह करना गलत है। उन्होंने कहा, “लोगों के लिए अलग-अलग वीडियो शेयर करके भ्रम फैलाना गलत है। सीमा को लेकर वाकई एक मुद्दा है। अरुणाचल प्रदेश के कुछ ग्रामीणों ने सीमा को लेकर चिंता जताई है और यह सही भी है, क्योंकि वहां सीमा तय नहीं है।”

केंद्नीय मंत्री ने बताया कि इस इलाके की दुर्गम जमीन के कारण पहले यहां स्थायी बसावट कम थी। इन इलाकों का इस्तेमाल पहले शिकार और चराई के लिए होता था, रहने के लिए नहीं। सीमा तय न होने के कारण भारत और चीन के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। रिजिजू के मुताबिक मुद्दे की जड़ सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार से भी जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने बहुत पहले सड़कें और अन्य ढांचा बनाना शुरू कर दिया था, जबकि कांग्रेस की सरकारों ने अलग नीति अपनाई।

तत्कालीन यूपीए सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “उस समय भारत में कांग्रेस की सरकार थी। कांग्रेस सरकार के तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने संसद में कहा था कि सरकार की नीति भारतीय तरफ बुनियादी ढांचा न बनाने की है। वहीं चीन लगातार अपना ढांचा बनाता रहा। रिजिजू ने दावा किया कि 2014 में मोदी सरकार आने के बाद स्थिति बदली। सरकार ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सीमा इलाकों में सड़क और कनेक्टिविटी पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी ने नीति बदली और अब हमारी तरफ भी सड़कें बन रही हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से ‘माजा’ गया, जो अंतिम सीमा बिंदु पर स्थित गांव है। वहां सीमा बल के जवानों और सैनिकों से मिला। सड़क का काम पूरा हो गया है। 1947 के बाद से आज तक सीमा पर कोई सड़क नहीं बनी थी। पीएम मोदी के नेतृत्व में हमने सड़क बनवाई।”

उन्होंने ‘तक्सिंग’ तक सड़क कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया। रिजिजू ने कहा, पहले तक्सिंग तक सड़क नहीं थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में तक्सिंग तक सड़क बनवाई। चीन ने अपनी ओर सड़क बना ली थी, चीनी सेना ने कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में कब्जा कर सीमा संबंधी बुनियादी ढांचा विकसित कर लिया था। अब भारत भी अपनी तरफ से बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है,” उन्होंने कहा। रिजिजू ने इस बात को खारिज किया कि चीन ने भारतीय गांवों पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ विवादित क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से सीमांकन न होने के कारण स्थिति जटिल बनी हुई है।

उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि उन्होंने हमारे किसी गांव पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने एक ऐसे भू-भाग पर डेरा डाला है, जहां सीमा निर्धारित नहीं है। हमारे लोगों का मानना है कि हमारा क्षेत्र उससे आगे तक फैला हुआ है, जबकि वहां के स्थानीय लोग उस जमीन को अपना बताते हैं।” रिजिजू ने यह भी कहा कि सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की गश्त को और मजबूत किया गया है। उन्होंने लोंगजू से आगे के एक क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वहां चीनी बलों ने ढांचे खड़े कर लिए हैं और वह इलाका कई दशकों से चीन के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा, “जिस गांव की बात की जा रही है, वह लोंगजू से आगे एक घाटी में स्थित है। वहां चीनी पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) ने गांव जैसी दिखने वाली कुछ इमारतें और संरचनाएं बनाई हैं। उस जमीन पर 1959 में कब्जा कर लिया गया था और 1962 में चीन ने वहां अपनी पकड़ और मजबूत कर ली थी।”

उन्होंने यह भी बताया कि सीमा पर भारतीय सेना और आईटीबीपी की गश्त बढ़ाई गई है। ‘रीढ़ की पहाड़ी’ पर चीनी सैन्य गतिविधि बढ़ी है, जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ी है और इसे गंभीरता से लेना होगा। उस खास जगह पर भारत-चीन के बीच कोई आवाजाही नहीं है, लेकिन रीढ़ पर चीनी गतिविधि जरूर बढ़ी है। आखिर में रिजिजू ने कांग्रेस पर सीमा मुद्दे को लेकर राजनीतिक नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया और कहा, “बांग्लादेश का बताया जाने वाला एक फर्जी वीडियो चलाकर इस तरह का नैरेटिव फैलाना गलत है। इससे हमारे सशस्त्र बलों का मनोबल गिरता है।”

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