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स्वास्थ्य

आम दिखने वाले ये लक्षण हो सकते हैं ब्लड कैंसर के खतरे की घंटी, प्रदीप रावत के निधन के बाद चर्चा में बीमारी

Updated on Monday, August 10, 2026 11:43 AM IST

दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत के 4 अगस्त 2026 को 74 साल की उम्र में निधन के बाद एक बार फिर Blood Cancer को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई में उनका निधन ब्लड कैंसर के दोबारा उभरने के बाद हुआ। ब्लड कैंसर को लेकर सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसकी शुरुआत कई बार ऐसे लक्षणों से हो सकती है, जिन्हें लोग सामान्य कमजोरी, वायरल संक्रमण या दूसरी आम स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हर थकान या बुखार ब्लड कैंसर का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ लक्षण लगातार बने रहें तो उनकी मेडिकल जांच जरूरी हो सकती है।


ब्लड कैंसर क्या है और इसके मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
ब्लड कैंसर एक अकेली बीमारी नहीं है। यह उन कैंसरों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला व्यापक नाम है, जो Blood, Bone Marrow और Lymphatic System को प्रभावित कर सकते हैं। इसके प्रमुख 3 प्रकारों में Leukemia, Lymphoma और Multiple Myeloma शामिल हैं। सामान्य स्थिति में बोन मैरो शरीर के लिए जरूरी रक्त कोशिकाएं बनाता है। ब्लड कैंसर में कुछ असामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं। इससे स्वस्थ Blood Cells का सामान्य उत्पादन और काम प्रभावित हो सकता है।

-ल्यूकेमिया आमतौर पर बोन मैरो से शुरू होता है और इसमें असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं बनने लगती हैं। यह एक्यूट हो सकता है, यानी तेजी से बढ़ने वाला, या क्रॉनिक, जिसमें बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है।

-लिम्फोमा लिम्फोसाइट्स को प्रभावित करता है। ये प्रतिरक्षा तंत्र की कोशिकाएं हैं, जो लिम्फ नोड्स और लसीका तंत्र के अन्य ऊतकों में पाई जाती हैं। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं- हॉजकिन लिम्फोमा और नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा।

-मल्टीपल मायलोमा प्लाज्मा कोशिकाओं को प्रभावित करता है। ये एक प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाएं हैं, जो शरीर में एंटीबॉडी बनाने का काम करती हैं। डॉ. जैन के अनुसार, इससे संबंधित अन्य स्थितियों में मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम और मायलोप्रोलिफेरेटिव नियोप्लाज्म भी शामिल हैं।


ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण
लगातार थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना या सांस फूलना: ये लक्षण एनीमिया के कारण हो सकते हैं।
बार-बार संक्रमण या बुखार: असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।
आसानी से चोट लगना या असामान्य रक्तस्राव: विशेषज्ञ अनुसार, आसानी से चोट लगना, लंबे समय तक रक्तस्राव, बार-बार नाक से खून आना या त्वचा पर छोटे-छोटे लाल धब्बे प्लेटलेट्स की संख्या कम होने का संकेत हो सकते हैं।
बिना कारण वजन कम होना और रात में पसीना आना: रात में अत्यधिक पसीना आना, बिना वजह वजन घटना और लगातार बुखार चेतावनी संकेत हो सकते हैं।
लिम्फ नोड्स में सूजन: गर्दन, बगल या जांघ के पास बिना दर्द वाली गांठ या सूजन दिखाई दे सकती है।
हड्डियों या जोड़ों में दर्द: कुछ लोगों को हड्डियों या जोड़ों में लगातार दर्द हो सकता है।
मल्टीपल मायलोमा से जुड़े लक्षण: इनमें लगातार कमर या पसलियों में दर्द, बार-बार फ्रैक्चर होना, अत्यधिक प्यास लगना, कमजोरी और किडनी से जुड़ी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।


महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से एक या अधिक लक्षण होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को ब्लड कैंसर ही है। विशेषज्ञ के अनुसार, अलग-अलग लक्षणों को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जब चेतावनी संकेतों का कारण स्पष्ट न हो और वे बने रहें, तो मेडिकल जांच में देरी भी नहीं करनी चाहिए।”


किन लोगों में ब्लड कैंसर का जोखिम ज्यादा?
ब्लड कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है। हालांकि, कुछ प्रकार बच्चों में अधिक पाए जाते हैं, जबकि कुछ अन्य प्रकार बुजुर्गों में अधिक आम होते हैं। कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर या विशेष आनुवंशिक स्थितियों का पारिवारिक इतिहास जोखिम बढ़ा सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, ऑटोइम्यून बीमारियां, पहले कीमोथेरेपी या रेडिएशन उपचार और कुछ लंबे समय तक रहने वाले वायरल संक्रमण भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। बेंजीन जैसे कुछ रसायनों के संपर्क को भी कुछ प्रकार के ल्यूकेमिया के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।

ब्लड कैंसर का जल्दी पता लगना जरूरी
जल्दी बीमारी का पता चलने से डॉक्टरों को कैंसर के सटीक प्रकार की पहचान करने और उसके अनुसार सही इलाज करने में अधिक कामयाबी मिलती है। इससे संक्रमण, रक्तस्राव, एनीमिया या शरीर के अंगों को होने वाले नुकसान जैसी जटिलताओं का समय पर इलाज भी किया जा सकता है। विशेषज्ञ के अनुसार, “आज कई ब्लड कैंसर को वर्षों तक नियंत्रित किया जा सकता है और कई प्रकार पूरी तरह ठीक भी हो सकते हैं।” इसलिए मरीजों के लिए संदेश डरने का नहीं, बल्कि जागरूक रहने का है।

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