Friday, 30 October 2026
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पंजाब

भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 6 महीनों में 14,032 मरीजों को श्वसन संबंधी बीमारियों का कैशलेस इलाज, 37.30 करोड़ रूपये के उपचार व्यय का वहन

Updated on Monday, July 27, 2026 17:56 PM IST

चंडीगढ़ : सांस फूलने को अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगातार रहने वाली खांसी को मौसम का असर मान लिया जाता है और सीने में घरघराहट को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक सीढ़ियां चढ़ना भी कठिन न हो जाए। तब तक अनेक मरीज फेफड़ों की गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो चुके होते हैं, जिसके उपचार के लिए लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है या बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के अंतर्गत पंजाब के ताजा उपचार संबंधी आंकड़े बताते हैं कि फेफड़ों की पुरानी बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं। अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने वाले मरीजों का बड़ा हिस्सा राज्य के कामकाजी आयु वर्ग से संबंधित है, जो यह दर्शाता है कि श्वसन संबंधी बीमारियां स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी तेजी से बढ़ा रही हैं।

अमेरिका के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के अनुसार, फेफड़ों की पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं और अपने आप ठीक नहीं होतीं। जितनी जल्दी इनकी पहचान हो जाए, फेफड़ों को होने वाले नुकसान को उतनी ही आसानी से रोका जा सकता है। दवाओं और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन से लाभ मिलता है, जबकि गंभीर मामलों में थोरेसिक सर्जरी जीवनरक्षक साबित हो सकती है। ऐसे मामलों में उपचार में देरी करना कभी भी उचित नहीं होता। दुर्भाग्यवश, उपचार का खर्च वहन न कर पाने के कारण अनेक मरीज इलाज टालते रहते हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 8 जनवरी से 21 जुलाई 2026 के बीच 14,032 लोगों ने फेफड़ों की पुरानी बीमारियों तथा थोरेसिक सर्जरी/श्वसन संबंधी उपचार का लाभ प्राप्त किया। इन उपचारों पर 37.30 करोड़ रूपये की कैशलेस राशि का भुगतान किया गया। इन आंकड़ों के पीछे उन हजारों मरीजों की कहानी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने से पहले लाखों रुपये की व्यवस्था करने की चिंता नहीं करनी पड़ी। यही इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता है।

आंकड़ों के अनुसार 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 5,559 उपचार के मामले दर्ज किए गए, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के 5,659 वरिष्ठ नागरिकों ने भी अस्पताल में उपचार प्राप्त किया। ये दोनों आयु वर्ग मिलकर योजना के अंतर्गत हुए कुल श्वसन संबंधी उपचारों के 80 प्रतिशत से अधिक मामलों में शामिल रहे। इसके अतिरिक्त 2,522 युवा वयस्कों तथा 292 बच्चों ने भी श्वसन संबंधी उपचार प्राप्त किया।

लिंग आधारित आंकड़ों के अनुसार 8,345 पुरुषों का 22.79 करोड़ रूपये की लागत से उपचार किया गया, जबकि 5,684 महिलाओं को 14.50 करोड़ रूपये के उपचार का लाभ मिला। इसके अतिरिक्त 'अन्य' लिंग श्रेणी के तीन लाभार्थियों ने भी योजना के अंतर्गत कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

मासिक आंकड़े दर्शाते हैं कि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान विशेष श्वसन संबंधी सेवाओं की मांग लगातार बनी रही। उपचार के मामलों की संख्या जनवरी में 1,332 से बढ़कर अप्रैल में 2,509 हो गई, जो छह महीनों में सर्वाधिक रही। हालांकि जून में 2,004 मामले दर्ज किए गए, लेकिन उपचार पर कुल 6.73 करोड़ रूपये खर्च किए गए, जो सबसे अधिक था। इससे स्पष्ट होता है कि योजना के अंतर्गत अधिक जटिल और महंगे श्वसन संबंधी उपचार भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “ये आंकड़े श्वसन संबंधी बीमारियों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। लोग लगातार रहने वाली खांसी या सांस फूलने को अक्सर अस्थायी समस्या अथवा बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दुर्भाग्यवश, फेफड़ों की पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती रहती हैं। जब तक अनेक मरीज चिकित्सकीय सहायता लेते हैं, तब तक फेफड़ों को गंभीर क्षति पहुंच चुकी होती है। सांस फूलने की समस्या को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर उपचार से फेफड़े, जीवन और आजीविका—तीनों को बचाया जा सकता है।”

स्वास्थ्य मंत्री ने विशेष रूप से धूम्रपान करने वालों, औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों तथा धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों से अपील की कि यदि लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने तंबाकू से दूर रहने, प्रदूषित वातावरण के संपर्क को कम करने तथा श्वसन संबंधी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराने पर भी जोर दिया।

समय पर बीमारी की पहचान, तंबाकू का सेवन छोड़ना, वायु प्रदूषण के संपर्क को कम करना, कार्यस्थल पर सुरक्षा उपाय अपनाना तथा समय पर उचित चिकित्सकीय उपचार प्राप्त करना फेफड़ों की पुरानी बीमारियों की रोकथाम और बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता से बचने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।

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