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राष्ट्रीय

भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत, कमी के दावे निराधार : केंद्र

Updated on Saturday, April 25, 2026 18:22 PM IST

देश की उर्वरक सुरक्षा मजबूत, स्थिर एवं सुव्यवस्थित बनी हुई है और सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता निरंतर आवश्यकता से अधिक है। उर्वरकों की कमी के हाल के दावे निराधार हैं, क्योंकि हाल ही में समाप्त हुए रबी 2025-26 सीजन और वर्तमान अवधि के आंकड़े देश भर में पर्याप्त और सुरक्षित आपूर्ति की स्थिति को दर्शाते हैं। यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 4,000 रुपये प्रति बोरी से अधिक हो गई हैं, इसके बावजूद सरकार किसानों को 266.5 रुपये प्रति 45 किलोग्राम की बोरी की अत्यधिक रियायती दर पर यूरिया की आपूर्ति जारी रखे हुए है।

उर्वरक विभाग के अनुसार, रबी के अंत तक के आंकड़ों (अक्टूबर 2025 से मार्च 2026) के अनुसार, उर्वरकों की उपलब्धता आवश्यकता से काफी अधिक रही। यूरिया की उपलब्धता 257.59 एलएमटी थी, जबकि आवश्यकता 196.06 एलएमटी थी। वहीं डीएपी की उपलब्धता 75.40 एलएमटी थी, जबकि आवश्यकता 53.43 एलएमटी थी। इसी प्रकार, एमओपी की उपलब्धता 19.64 एलएमटी थी जबकि आवश्यकता 15.69 एलएमटी थी। एनपीके की उपलब्धता 117.44 एलएमटी थी, जबकि आवश्यकता 82.38 एलएमटी थी। एसएसपी की उपलब्धता 50.10 एलएमटी थी, जबकि आवश्यकता 31.19 एलएमटी थी। इससे स्पष्ट होता है कि सभी पोषक तत्वों की श्रेणियों में आपूर्ति मांग से अधिक थी।

आपको बता दें, चालू वित्त वर्ष में भी आपूर्ति की मजबूत स्थिति बनी हुई है। 1 अप्रैल 2026 से 23 अप्रैल 2026 की अवधि के लिए, उपलब्धता आवश्यकता से काफी अधिक है। यूरिया की उपलब्धता 69.33 एलएमटी है, जबकि आवश्यकता 18.17 एलएमटी है। डीएपी की उपलब्धता 22.78 एलएमटी है, जबकि आवश्यकता 5.90 एलएमटी है। एमओपी की उपलब्धता 8.32 एलएमटी है, जबकि आवश्यकता 1.73 एलएमटी है। एनपीके की उपलब्धता 52.75 एलएमटी है, जबकि आवश्यकता 7.46 एलएमटी है। एसएसपी की उपलब्धता 25.60 एलएमटी है, जबकि आवश्यकता 3.30 एलएमटी है। यह आगामी खरीफ सीजन के लिए मजबूत शुरुआती स्थिति का स्पष्ट संकेत देता है।

तैयारियों को और मजबूत करते हुए, खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की आवश्यकता 390.54 एलएमटी आंकी गई है, जिसमें से लगभग 180 एलएमटी (46 प्रतिशत) पहले से ही प्रारंभिक स्टॉक के रूप में उपलब्ध है। यह सामान्य सीजन के पूर्व के स्तर (लगभग 33 प्रतिशत) से काफी अधिक है। यह सरकार द्वारा बेहतर योजना, अग्रिम स्टॉक भंडारण और कुशल लॉजिस्टिक्स प्रबंधन को दर्शाता है।

निरंतर उपलब्धता और कुशल वितरण सुनिश्चित करने हेतु, राज्यों के कृषि सचिव एवं अधिकारी उर्वरक विभाग के साथ लगातार समन्वय कर रहे हैं ताकि जिलों में उर्वरकों की आवाजाही और उपलब्धता पर कड़ी निगरानी रखी जा सके। राज्यों को उर्वरकों की हेराफेरी, जमाखोरी, कालाबाजारी और दहशत फैलाने के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सलाह दी गई है, ताकि उर्वरकों का किसानों तक समय पर और समान रूप से पहुंचना सुनिश्चित किया जा सके।

वहीं सरकार ने वैश्विक मोर्चे पर भी सक्रिय कदम उठाए हैं। विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास आयात में विविधता लाने के सरकारी प्रयासों में योगदान देते हुए आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों की सुविधा प्रदान करने में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। इसके अलावा, वैश्विक निविदाओं के जरिए लगभग 25 एलएमटी यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बावजूद आगामी सीजनों के लिए आपूर्ति मजबूत हुई है।

घरेलू यूरिया के उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता से संबंधित समस्याओं का भी समाधान किया गया है, उर्वरक संयंत्रों को निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त एलएनजी/आरएलएनजी की व्यवस्था की जा रही है। 

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