Wednesday, 28 October 2026
BREAKING
• हरियाणा में 12,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर MoU, गुजरात दौरे पर सीएम नायब सैनी ने की उद्योगपतियों से मुलाकात • 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में शामिल हुए हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण • हादसा देख मंत्री कृष्णलाल पंवार ने रुकवाया काफिला, घायल चालक को पायलट गाड़ी से भिजवाया अस्पताल • शिक्षा, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से देश एवं प्रदेश के विकास में अपना अहम योगदान दें युवा : राज्यपाल घोष • Happening Haryana 2.0: नायब सैनी का मिशन—हरियाणा के हर क्षेत्र में उद्योग, हर हाथ को काम और युवाओं को उद्यमी बनने का अवसर • आंदोलन और कानून के सहारे जेजेपी बचाएगी सीडीएलयू की बेशकीमती जमीन - दिग्विजय चौटाला • मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की घोषणाएं, भुंतर में खुलेगा विद्युत सब-डिवीजन; सीवरेज के लिए 22 करोड़ रुपये मंजूर • कुल्लू दशहरा के भव्य समापन पर सीएम सुक्खू का बड़ा ऐलान, देवी-देवताओं के मानदेय में की बढ़ोतरी • घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में शामिल करवाना चाहती है कांग्रेस? अपना रुख स्पष्ट करे : बिंदल • पंजाब राज्य सूचना आयोग ने राज्यपाल को भेंट की ‘आरटीआई एंड गुड गवर्नेंस’ पुस्तक

व्यापार

FSSAI की सख्ती बढ़ने से फूड कंपनियों और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की लागत बढ़ने की आशंका: Jefferies

Updated on Thursday, October 15, 2026 14:46 PM IST

नई दिल्ली(एजेंसी) : भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर निगरानी बढ़ाए जाने से फूड कंपनियों, रेस्टोरेंट और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की अनुपालन लागत बढ़ सकती है। Jefferies की एक रिपोर्ट के अनुसार, नियामक अब केवल खाद्य उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि विज्ञापन दावों, लेबलिंग, उत्पादों की प्रामाणिकता, ऑनलाइन लिस्टिंग, भंडारण और खाद्य सुरक्षा से जुड़े तरीकों की भी जांच कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य क्षेत्र में नियामकीय निगरानी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। कंपनियों को अब ऑडिट, दस्तावेजीकरण और आंतरिक नियंत्रण मजबूत करने पड़ रहे हैं। Jefferies ने बताया कि भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रमुख फूड, बेवरेज, डेयरी और न्यूट्रास्यूटिकल कंपनियों को कथित तौर पर 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं। इसके बाद कई कंपनियों ने अपने दावे वापस लिए, लेबल में बदलाव किए, प्लेटफॉर्म से उत्पाद हटाए और विज्ञापन बंद किए हैं।

पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल का प्रस्ताव
नियामकीय निगरानी के प्रमुख क्षेत्रों में चीनी, नमक और फैट की अधिक मात्रा वाले पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके तहत पैकेजिंग पर प्रमुखता से लाल रंग के हेक्सागोन आकार के लेबल लगाए जाने की संभावना है। इससे कंपनियों की पैकेजिंग, मार्केटिंग रणनीति और उत्पादों की सामग्री में बदलाव से जुड़े फैसले प्रभावित हो सकते हैं।

क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की भी बढ़ेगी जवाबदेही
Jefferies के अनुसार, क्विक-कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को अब केवल उत्पाद बेचने वाले मध्यस्थ के रूप में नहीं, बल्कि खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के जवाबदेह हिस्सेदार के रूप में देखा जा रहा है।

प्रस्तावित आवश्यकताओं के तहत इन प्लेटफॉर्म को अपने ऐप पर उत्पादों की एक्सपायरी डेट, मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी जानकारी और बैच नंबर दिखाने पड़ सकते हैं। इसके अलावा, विक्रेताओं की पुष्टि, उत्पादों की सही जानकारी और डार्क स्टोर में खाद्य पदार्थों के भंडारण की स्थिति पर भी निगरानी बढ़ सकती है।

रेस्टोरेंट और डेयरी सेक्टर भी निगरानी के दायरे में
रेस्टोरेंट, क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट चेन, क्लाउड किचन और होटल में साफ-सफाई, कैलोरी की जानकारी, मेन्यू लेबलिंग और लाइसेंस से जुड़े नियमों की जांच सख्त हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख रेस्टोरेंट चेन समेत फूड सर्विस कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों को कथित तौर पर 30 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं।

इसके अलावा, डेयरी उत्पाद, हेल्थ सप्लीमेंट, अल्कोहल वाले पेय और पान मसाला की पैकेजिंग भी नियामकीय निगरानी के दायरे में हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एनालॉग पनीर को ‘पनीर’ नाम से बेचने पर प्रस्तावित प्रतिबंध का असर डेयरी सेक्टर पर भी पड़ सकता है।

कंपनियां नियमों के पालन के लिए तैयारी में जुटीं
रिपोर्ट के अनुसार, फूड कंपनियां और रेस्टोरेंट चेन अनुपालन टीमों, आंतरिक ऑडिट, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और क्वालिटी कंट्रोल प्रक्रियाओं को मजबूत कर रही हैं। Jefferies का मानना है कि जिन कंपनियों की आंतरिक प्रक्रियाएं मजबूत हैं और जो नियमों से जुड़ी कमियों को तेजी से दूर कर सकती हैं, वे बढ़ती नियामकीय सख्ती का बेहतर तरीके से सामना कर सकती हैं।

हालांकि, नियामकीय आवश्यकताओं के बढ़ते दायरे से कंपनियों और प्लेटफॉर्म की लागत, सप्लाई और परिचालन दक्षता पर असर पड़ने की आशंका है।

 

Have something to say? Post your comment
भारत का ओवरसीज एफडीआई सितंबर में 14% घटकर 4.34 अरब डॉलर रहा: RBI

: भारत का ओवरसीज एफडीआई सितंबर में 14% घटकर 4.34 अरब डॉलर रहा: RBI

दिवाली से पहले खरीदारों की मौज, सोना-चांदी हुआ और सस्ता; उच्चतम स्तर से गोल्ड 21.33 प्रतिशत तो चांदी 2.28 लाख रुपए के नीचे

: दिवाली से पहले खरीदारों की मौज, सोना-चांदी हुआ और सस्ता; उच्चतम स्तर से गोल्ड 21.33 प्रतिशत तो चांदी 2.28 लाख रुपए के नीचे

स्टर्लिंग टूल्स का मुनाफा दूसरी तिमाही में करीब 31 प्रतिशत गिरा, आय 226 करोड़ रुपए रही

: स्टर्लिंग टूल्स का मुनाफा दूसरी तिमाही में करीब 31 प्रतिशत गिरा, आय 226 करोड़ रुपए रही

लगातार गिरावट के बाद सोने-चांदी में लौटी तेजी, MCX पर सोना ₹1.42 लाख और चांदी ₹1.96 लाख के पार

: लगातार गिरावट के बाद सोने-चांदी में लौटी तेजी, MCX पर सोना ₹1.42 लाख और चांदी ₹1.96 लाख के पार

एआई चिप खरीदने के लिए स्पेसएक्स ने जुटाई 40 अरब डॉलर की कर्ज फंडिंग

: एआई चिप खरीदने के लिए स्पेसएक्स ने जुटाई 40 अरब डॉलर की कर्ज फंडिंग

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 609 अंक टूटा; निफ्टी 22,400 के करीब

: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 609 अंक टूटा; निफ्टी 22,400 के करीब

टेस्ला इंडिया ने वाहन बिक्री के पहले वित्त वर्ष में दर्ज की 247 करोड़ रुपए की कमाई, मुनाफा 5 करोड़ रुपए के पार

: टेस्ला इंडिया ने वाहन बिक्री के पहले वित्त वर्ष में दर्ज की 247 करोड़ रुपए की कमाई, मुनाफा 5 करोड़ रुपए के पार

एलन मस्क ने एक्स मनी के नए फीचर का किया ऐलान, लाइक बटन से यूजर भेज पाएंगे डॉलर

: एलन मस्क ने एक्स मनी के नए फीचर का किया ऐलान, लाइक बटन से यूजर भेज पाएंगे डॉलर

महंगे कच्चे तेल का असर! विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में 53,337 करोड़ रुपए इक्विटी से निकाले

: महंगे कच्चे तेल का असर! विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में 53,337 करोड़ रुपए इक्विटी से निकाले

एएसटीपीएल और संस्थापक पर सेबी का बड़ा एक्शन, 546 करोड़ रुपए रिफंड के साथ 11.5 करोड़ रुपए का लगाया जुर्माना

: एएसटीपीएल और संस्थापक पर सेबी का बड़ा एक्शन, 546 करोड़ रुपए रिफंड के साथ 11.5 करोड़ रुपए का लगाया जुर्माना

X