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पंजाब

PPCB ने आयोजित किया अंतरराष्ट्रीय पंजाब प्लास्टिक एक्शन समिट 2026, प्लास्टिक कचरे के समाधान और उत्पादकों की जवाबदेही पर दिया जोर

Updated on Sunday, October 11, 2026 18:44 PM IST

चंडीगढ़ : पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने मोहाली स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय पंजाब प्लास्टिक एक्शन समिट 2026 का आयोजन किया। इसमें नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नागरिक समाज, पर्यावरण विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी समाधान तलाशना और प्रगतिशील ‘रंगला पंजाब’ के विजन को आगे बढ़ाना था। समिट ने वैश्विक अनुभवों के आदान-प्रदान, तकनीक आधारित उपायों और प्लास्टिक की पूरी मूल्य श्रृंखला में जवाबदेही मजबूत करने के लिए एक मंच प्रदान किया। इसमें स्पष्ट संदेश दिया गया कि प्लास्टिक कचरे का सुरक्षित संग्रह, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि यह खाद्य श्रृंखला में प्रवेश न करे, मिट्टी और पानी को दूषित न करे तथा लोगों को हानिकारक प्रदूषकों के संपर्क में आने से बचाया जा सके।
इस अवसर पर पंजाब के मुख्य सचिव, IAS के.ए.पी. सिन्हा, पंजाब विकास आयोग की उपाध्यक्ष सीमा बंसल, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशक डॉ. शैलेंद्र कौर, IFS, तथा एलायंस टू एंड प्लास्टिक वेस्ट और विश्व बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख हितधारक उपस्थित रहे।
समिट में प्लास्टिक कचरे की बढ़ती चुनौती पर विचार-विमर्श किया गया और उन्नत कचरा प्रसंस्करण तकनीकों, सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल, टिकाऊ विकल्पों, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा समुदाय आधारित पहलों जैसे समाधानों पर चर्चा हुई। इस दौरान पंजाब के छह प्रमुख शहरों में PPCB द्वारा किए गए प्लास्टिक वेस्ट ब्रांड ऑडिट के निष्कर्ष भी प्रस्तुत किए गए। ऑडिट के तहत लगभग 7,000 किलोग्राम कचरे के नमूनों की जांच की गई और करीब 12,000 पैकेटों को 231 कंपनियों से जोड़ा गया। इन निष्कर्षों ने ब्रांडेड प्लास्टिक कचरे के व्यापक स्तर और उत्पादकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
कागजी अनुपालन से जमीनी जवाबदेही की ओर
अपने विशेष संबोधन में पंजाब के मुख्य सचिव श्री सिन्हा ने प्लास्टिक की मूल्य श्रृंखला के आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेफर्स, बिस्कुट और अन्य उपभोक्ता उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली मल्टी-लेयर प्लास्टिक (MLP) पैकेजिंग का कबाड़ बीनने वालों के लिए बहुत कम या कोई आर्थिक मूल्य नहीं होता। परिणामस्वरूप, ऐसी पैकेजिंग अक्सर सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर बिखरी रह जाती है। उन्होंने जन-जिम्मेदारी के महत्व पर भी जोर दिया और याद दिलाया कि धार्मिक शिक्षाओं में परंपरागत रूप से संयम, सादगी और सोच-समझकर उपभोग करने की भावना को प्रोत्साहित किया गया है।
समिट में ब्रांड ऑडिट से सामने आई एक प्रमुख चिंता को रेखांकित किया गया: राष्ट्रीय EPR प्रणालियों पर दर्ज अनुपालन और जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाले ब्रांडेड प्लास्टिक कचरे के बीच अंतर।
मौजूदा व्यवस्था के तहत, देश के किसी अन्य हिस्से में प्रसंस्कृत प्लास्टिक कचरे के आधार पर जारी किए गए EPR प्रमाणपत्रों के माध्यम से उत्पादक अपने पुनर्चक्रण संबंधी दायित्वों को पूरा कर सकते हैं। इससे जरूरी नहीं कि जिन राज्यों में उनके उत्पादों की खपत होती है, वहां उतनी ही मात्रा में प्लास्टिक कचरे का संग्रह और प्रसंस्करण सुनिश्चित हो।
यह एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है: अनुपालन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले वास्तविक कचरा बोझ के प्रति संवेदनशील कैसे बनाया जाए? प्रतिभागियों ने ऐसे मजबूत जवाबदेही तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो उत्पादकों के दायित्वों को मापने योग्य पर्यावरणीय परिणामों से जोड़ सकें।
यह मुद्दा केवल कचरे और शहरों की सुंदरता तक सीमित नहीं है। अपर्याप्त रूप से एकत्रित या प्रसंस्कृत प्लास्टिक कचरा टूटकर छोटे-छोटे कणों में बदल सकता है और मिट्टी तथा पानी को दूषित करने में योगदान दे सकता है। इससे प्लास्टिक और उससे जुड़े प्रदूषकों के खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करने की आशंका बढ़ जाती है। विभिन्न पर्यावरणीय नमूनों और मानव जैविक नमूनों में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी सामने आई है। समिट में इस बात पर जोर दिया गया कि प्लास्टिक कचरे को पर्यावरण में प्रवेश करने से रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि केवल बाद में उसकी सफाई पर निर्भर रहना।
स्वच्छ पंजाब के लिए वैश्विक विशेषज्ञता और तकनीक
समिट में प्लास्टिक पैकेजिंग के डिजाइन में सुधार, प्लास्टिक कचरे के संग्रह, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और प्रसंस्करण को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी प्रगति पर जोर दिया गया। साथ ही, नए यानी वर्जिन कच्चे माल पर निर्भरता घटाने और कचरे के उत्पादन को न्यूनतम करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा देने तथा समाधानों को प्रभावी, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और बड़े स्तर पर लागू करने योग्य बनाने पर विचार साझा किए। एलायंस टू एंड प्लास्टिक वेस्ट ने पंजाब में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए तकनीकी और वित्तीय सहयोग की संभावनाएं तलाशने की प्रतिबद्धता जताई।
समिट की प्रमुख प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना रही कि प्लास्टिक कचरे को केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर न पहुंचाया जाए, बल्कि उसके पूरे जीवन चक्र में उसका सुरक्षित प्रबंधन हो। इसमें जिम्मेदार उपभोग और कचरे के पृथक्करण से लेकर संग्रह, पुनर्प्राप्ति, पुनर्चक्रण तथा गैर-पुनर्चक्रण योग्य सामग्री के उचित निपटान तक की प्रक्रिया शामिल है।
इस अवसर पर PPCB की चेयरपर्सन सुश्री रीना गुप्ता ने कहा:
“हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि उपयोग के बाद प्लास्टिक को सुरक्षित तरीके से एकत्र किया जाए, वैज्ञानिक ढंग से प्रसंस्कृत किया जाए और जिम्मेदारीपूर्वक निपटाया जाए। यह हमारी मिट्टी और पानी को प्रदूषित न करे, हमारी खाद्य श्रृंखला में प्रवेश न करे और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा न बने। सर्वोत्तम उपलब्ध तकनीकों को अपनाकर, उत्पादकों की जवाबदेही मजबूत करके और प्रत्येक नागरिक को इस मिशन का भागीदार बनाकर हम प्लास्टिक कचरे की चुनौती को एक स्वच्छ, स्वस्थ और अधिक टिकाऊ पंजाब के निर्माण के अवसर में बदल सकते हैं। यही रंगला पंजाब का विजन है—एक ऐसा जीवंत पंजाब, जहां विकास के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी आगे बढ़े और जहां पर्यावरण की रक्षा का अर्थ आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा करना हो।”
सुश्री गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल सफाई कर्मचारियों या सरकारों तक सीमित नहीं हो सकती। उत्पादकों, संस्थानों, समुदायों और प्रत्येक नागरिक की इसमें भूमिका है, ताकि प्लास्टिक उपयोगी सामग्री बना रहे, न कि पर्यावरण पर अनियंत्रित बोझ।
समुदाय की भागीदारी से बदलाव की पहल
PPCB ने सार्वजनिक आयोजनों और शैक्षणिक संस्थानों में प्लास्टिक की खपत कम करने तथा जिम्मेदार विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए अपनी जारी पहलों को भी प्रदर्शित किया।
इनमें फतेहगढ़ साहिब में प्लास्टिक-मुक्त लंगर, पटियाला के काली माता मंदिर में प्लास्टिक-मुक्त प्रसाद और श्री आनंदपुर साहिब में प्लास्टिक-मुक्त होला मोहल्ला जैसी पहलें शामिल हैं। इन आयोजनों में हजारों श्रद्धालुओं ने स्टील और बायोडिग्रेडेबल कटलरी का उपयोग किया।
इसके अतिरिक्त, पटियाला के स्कूलों और कॉलेजों में प्लास्टिक-मुक्त लंच अभियान और मल्टी-लेयर प्लास्टिक (MLP) संग्रह अभियान का पायलट स्तर पर संचालन किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को जिम्मेदार उपभोग और कचरे के उचित पृथक्करण की आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

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