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दुनिया

H-1B वीजा पर नए शुल्क का ट्रंप ने किया समर्थन, अमेरिकी कर्मचारियों की प्राथमिकता पर दिया जोर

Updated on Tuesday, September 08, 2026 12:20 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबर डे के मौके पर H-1B वीजा याचिकाओं पर प्रस्तावित नए शुल्क का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी कंपनियां विदेशों से कर्मचारियों की तलाश करने से पहले योग्य अमेरिकी नागरिकों को नियुक्त करने और उन्हें प्रशिक्षित करने पर ध्यान देंगी।

ट्रंप ने सोमवार को जारी लेबर डे घोषणा में कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती और प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए H-1B वीजा याचिकाओं पर नया शुल्क प्रस्तावित किया गया है। इसका उद्देश्य कंपनियों को विदेशों से श्रमिकों को लाने से पहले अमेरिका में उपलब्ध योग्य लोगों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

H-1B कार्यक्रम में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी
H-1B वीजा कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियों समेत कई नियोक्ता उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने के लिए करते हैं।

भारतीय नागरिक लंबे समय से H-1B वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी समूह रहे हैं। इसलिए इस कार्यक्रम में होने वाला कोई भी बदलाव भारत और अमेरिका में रहने वाले भारतीय पेशेवरों के बीच खास तौर पर देखा जाता है।

1,03,265 डॉलर शुल्क का प्रस्ताव
ट्रंप ने जिस शुल्क का जिक्र किया है, वह सोमवार को लगाया गया नया शुल्क नहीं है। अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) ने पिछले महीने H-1B याचिकाओं पर 1,03,265 डॉलर का शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था।

यह शुल्क उन H-1B याचिकाओं पर लागू होने का प्रस्ताव है जो हर साल तय संख्या यानी annual numerical cap के तहत आती हैं। इसमें advanced-degree exemption के लिए पात्र याचिकाएं भी शामिल हैं।

प्रस्ताव के अनुसार, याचिका दाखिल करते समय यह शुल्क देना होगा और यह अन्य लागू इमिग्रेशन फीस के अतिरिक्त होगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इससे मिलने वाली राशि कानूनी इमिग्रेशन सिस्टम को चलाने से जुड़े संघीय खर्चों को पूरा करने में मदद करेगी।

अमेरिकी नौकरियों और मैन्युफैक्चरिंग पर ट्रंप का जोर
ट्रंप ने H-1B शुल्क के प्रस्ताव को अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने वाली अपनी व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा बताया।

उन्होंने कहा कि कई दशकों की ऐसी व्यापार नीतियों के बाद, जिनसे अमेरिकी औद्योगिक ताकत को नुकसान हुआ, कंपनियां अब अमेरिका लौट रही हैं, देश की अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश कर रही हैं और 9 लाख से अधिक अमेरिकी नौकरियां जोड़ रही हैं।

ट्रंप ने अपने ‘protective tariffs’ को अमेरिकी कर्मचारियों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने वाला कदम बताया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग लगातार छह महीनों से बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका अब अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग, तकनीकी नवाचार और आर्थिक समृद्धि के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जिसकी ताकत अमेरिकी कर्मचारियों से मिलेगी।

नया शुल्क अभी लागू नहीं हुआ
यह प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन की H-1B नीति में बदलाव की एक नई कोशिश है। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने नए H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर शुल्क लगाने का प्रयास किया था।

जून में मैसाचुसेट्स की एक संघीय अदालत ने इस शुल्क को रद्द कर दिया था और कहा था कि प्रशासन ने अपनी कानूनी शक्तियों से आगे जाकर यह कदम उठाया। जुलाई में एक संघीय अपीलीय अदालत ने मामले की सुनवाई जारी रहने तक उस फैसले को रोकने की प्रशासन की मांग भी खारिज कर दी थी।

वहीं, 1,03,265 डॉलर का नया प्रस्तावित शुल्क अभी संघीय नियम बनाने की प्रक्रिया में है। यह तत्काल प्रभाव से लागू नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि केवल ट्रंप की लेबर डे घोषणा के आधार पर कंपनियों से यह नया शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा में 7 सितंबर को लेबर डे के रूप में घोषित किया गया और अमेरिकी श्रमिकों के योगदान तथा उनके संघर्ष और मजबूती को सम्मान देने की अपील की गई।

 

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