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हरियाणा

संसद में गूंजा मंडी मजदूरों की आजीविका और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा : कुमारी सैलजा

Updated on Monday, August 10, 2026 18:01 PM IST

पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने सोमवार को संसद में नियम 377 के तहत हरियाणा, विशेषकर सिरसा सहित प्रदेश के प्रमुख अनाज उत्पादक क्षेत्रों के मंडी मजदूरों की आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा सदन के पटल पर रखा। उन्होंने केंद्र सरकार से मौजूदा खरीद एवं मंडी हैंडलिंग व्यवस्था की समीक्षा करने और मंडी मजदूरों के हितों की सुरक्षा के लिए व्यापक कल्याणकारी नीति बनाने की मांग की।
कुमारी सैलजा ने सदन के पटल पर रखे अपने वक्तव्य में कहा कि हरियाणा की मंडियों में हजारों पंजीकृत मजदूर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली के अंतर्गत खरीदे जाने वाले खाद्यान्न की सफाई, ग्रेडिंग, लोडिंग और हैंडलिंग के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता बनाए रखने में भी इन मजदूरों का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके बावजूद बदलती खरीद और खाद्यान्न हैंडलिंग व्यवस्था में उनकी पारंपरिक भूमिका लगातार कम होती जा रही है, जिसका सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ रहा है।


सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि मंडी मजदूर वर्षों से कृषि खरीद व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहे हैं। किसान की उपज मंडी में पहुंचने से लेकर उसकी सफाई, ग्रेडिंग, भराई, उठान और भंडारण की प्रक्रिया तक मजदूर कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसे में व्यवस्था में किसी भी प्रकार का बदलाव करते समय इन मजदूरों के रोजगार और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि ऐसी शिकायतें भी सामने आई हैं कि पर्याप्त वैज्ञानिक प्रसंस्करण व्यवस्था के अभाव में सफाई और गुणवत्ता सुधार के नाम पर किसानों से कटौती की जा रही है। ऐसी स्थिति में एक ओर किसानों को उनकी उपज का नुकसान उठाना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर मंडी मजदूरों के परंपरागत रोजगार के अवसर भी प्रभावित होते हैं। इसलिए केंद्र सरकार को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए जिसमें खाद्यान्न की सफाई और ग्रेडिंग पूरी तरह पारदर्शी, वैज्ञानिक और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।


सांसद ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल खाद्यान्न खरीद तक सीमित नहीं हो सकती। इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने वाले मजदूरों और किसानों के हितों की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है। मंडी मजदूर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की तरह अनेक जोखिमों के बीच काम करते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार से मांग की कि पंजीकृत मंडी मजदूरों की आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनके लिए स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, पेंशन तथा जहां संभव हो ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का प्रावधान किया जाए। प्रदेश की प्रमुख मंडियों में मजदूरों के लिए बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं, ताकि काम के दौरान बीमारी अथवा दुर्घटना की स्थिति में उन्हें तत्काल उपचार मिल सके।


कुमारी सैलजा ने मंडी मजदूरों के लिए एक व्यापक कल्याणकारी नीति तैयार करने की मांग करते हुए कहा कि खरीद व्यवस्था में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाना जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ वर्षों से इस व्यवस्था से जुड़े मजदूरों को रोजगार से वंचित करना नहीं होना चाहिए। सरकार ऐसी संतुलित नीति बनाए जिससे किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले, मंडी मजदूर की आजीविका सुरक्षित रहे और उपभोक्ता तक गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न पहुंचे।


कुमारी सैलजा ने कहा कि मंडी मजदूरों के हितों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा यह विषय हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल है। केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करते हुए खरीद एवं मंडी हैंडलिंग व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए और किसानों, मजदूरों तथा उपभोक्ताओं तीनों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

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